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पेरिस जलवायु समझौते पर हस्ताक्षर कर भारत अरबों डॉलर बना रहा: डोनाल्ड ट्रंप

पेरिस जलवायु समझौते से पीछे हटने के अपने कदम को न्यायोचित ठहराते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत व चीन पर निशाना साधते हुए कहा कि समझौते से दोनों देशों को सर्वाधिक फायदा हुआ है, जबकि अमेरिका के साथ नाइंसाफी हुई।

Author वाशिंगटन | June 2, 2017 23:42 pm
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (File Photo)

पेरिस जलवायु समझौते से पीछे हटने के अपने कदम को न्यायोचित ठहराते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत व चीन पर निशाना साधते हुए कहा कि समझौते से दोनों देशों को सर्वाधिक फायदा हुआ है, जबकि अमेरिका के साथ नाइंसाफी हुई। व्हाइट हाउस के रोज गार्डन से गुरुवार को दिए गए एक भाषण में ट्रंप ने कहा कि पेरिस समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए नई दिल्ली को अरबों डॉलर मिलेंगे। उन्होंने कहा कि आने वाले वक्त में चीन के साथ-साथ भारत अपने कोयला आधारित विद्युत संयंत्रों की संख्या दोगुनी कर लेंगे, जिससे उन्हें वित्तीय तौर पर अमेरिका की तुलना में लाभ होगा।

ट्रंप ने कहा, “भारत ने विकसित देशों से अरबों डॉलर की विदेशी सहायता प्राप्त करने के लिए समझौते में भागीदारी की है। कई अन्य उदाहरण हैं। लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि पेरिस समझौता अमेरिका के लिए अन्यायपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यह फैसला उन्होंने अमेरिकी कारोबारियों तथा मजदूरों के हित के संरक्षण के लिए किया। उन्होंने कहा, “समझौते का पालन करने से साल 2025 तक 27 लाख नौकरियां जाएंगी। मुझपर विश्वास कीजिए, यह वह नहीं है, जिसकी हमें जरूरत है।”

राष्ट्रपति ने कहा, “मेरा निर्वाचन पिट्सबर्ग का प्रतिनिधित्व करने के लिए हुआ है, पेरिस के लिए नहीं।उन्होंने कहा, “आज की तारीख से ही अमेरिका पेरिस समझौते के सभी तरह के क्रियान्वयन को रोक देगा, जो एक कठोर वित्तीय व आर्थिक बोझ है, जिसे समझौते के रूप में अमेरिका पर थोपा गया है।”

वहीं रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम के पूर्ण अधिवेशन के दौरान शुक्रवार को कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का आकलन पेरिस जलवायु समझौते से उनके पीछे हटने के फैसले के आधार पर नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा, “मैं फिलहाल राष्ट्रपति ट्रंप का आकलन करने से बचूंगा, क्योंकि पेरिस समझौते में शामिल होने का फैसला ओबामा ने किया था।”

समाचार एजेंसी तास के मुताबिक, पुतिन ने कहा, “..हो सकता है कि राष्ट्रपति सोचते हों कि यह पूरी तरह ग्राह्य नहीं है, हो सकता है वह सोचते हों कि पर्याप्त संसाधन नहीं हैं..इन हालातों का अच्छी तरह से अध्ययन करने की जरूरत है।”

रूस के राष्ट्रपति ने हालांकि इस ओर इशारा दिलाते हुए कहा, “यह संभव था कि वह पेरिस समझौते से कदम पीछे नहीं खींचते, क्योंकि यह ण्क प्रारूप दस्तावेज है और इसलिए अमेरिकी दायित्व में बदलाव किए जा सकते थे। पुतिन ने कहा कि मॉस्को पेरिस जलवायु समझौते की पुष्टि करने से पहले इंतजार करना चाहता था, जब तक कि सहभागी देश कड़े नियम निर्धारित नहीं कर लेते।

उन्होंने कहा, “जहां तक मुझे याद है, अमेरिका ने समझौते में संशोधन किया था, लेकिन हमने (रूस) अभी तक नहीं किया। पुतिन ने कहा, “हमने इसे नहीं किया, क्योंकि हम तब तक इंतजार करना चाहते थे, जबतक संशोधनों के वितरण के नियम न बन जाते।”

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