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मोदी ने जाफना के बेघर तमिलों को सौंपे घर

कभी युद्ध से तबाह हुए क्षेत्र की ऐतिहासिक यात्रा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को श्रीलंका में सभी नागरिकों के समान विकास व सम्मान का आह्वान किया। समझा जा रहा है उनका इशारा तमिलों की ओर था जो श्रीलंका में लिबरेशन टाइगर्स आॅफ तमिल ईलम (एलटीटीई) और सेना के बीच चली लड़ाई में […]
Author March 15, 2015 09:43 am
Modi Jaffna Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी नागरिकों के सम्मान का किया आह्वान। (फ़ोटो-पीटीआई)

कभी युद्ध से तबाह हुए क्षेत्र की ऐतिहासिक यात्रा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को श्रीलंका में सभी नागरिकों के समान विकास व सम्मान का आह्वान किया। समझा जा रहा है उनका इशारा तमिलों की ओर था जो श्रीलंका में लिबरेशन टाइगर्स आॅफ तमिल ईलम (एलटीटीई) और सेना के बीच चली लड़ाई में सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं।

तमिल बहुल जाफना की यात्रा के साथ ही अपनी दो दिवसीय श्रीलंका यात्रा में मुलाकातों के दौर का समापन करते हुए उन्होंने कहा- उन्हें खुशी है कि वह हिंसा का दंश झेलने वालों की आंखों के आंसू पोंछने वालों में से एक हैं। प्रधानमंत्री की जाफना यात्रा को बहुत बड़े प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है क्योंकि किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली जाफना यात्रा है। 2013 में यहां आए ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन के बाद इस क्षेत्र का दौरा करने वाले दूसरे अंतरराष्ट्रीय नेता मोदी ने उन तमिलों को 27,000 नए घर सौंपे जो गृहयुद्ध के दौरान बेघर हो गए थे। ये मकान सुलह प्रक्रिया में मदद पहुंचाने की भारत की कोशिश के तहत भारत की मदद से बनाए गए हैं। जाफना के इलावलाई में मोदी ने एक परिवार के परंपरागत गृह प्रवेश अनुष्ठान में हिस्सा भी लिया। महिलाओं ने उनकी आरती उतारी और नादस्वरम संगीत बजाया गया।

मकानों को सौंपे जाने के कार्यक्रम में मोदी ने कहा- ये मकान बस ईंटों और पत्थरों की दीवारें नहीं हैं। ये मकान उन लोगों की जिंदगी खुशहाल बनाने की कोशिश हैं जो मुसीबतों से गुजरे हैं। उन्होंने कहा अगले चरण में विस्थापितों के लिए 47 हजार मकान बनाए जाएंगे। उनकी इस घोषणा पर लोगों ने खूब तालियां बजाईं। मोदी ने कहा कि यह अपने आप में अनोखी परियोजना है और इस तरह की योजनाओं पर गुजरात में 2001 के भूकम्प के बाद अमल शुरू हुआ था।

श्रीलंका का दो दिवसीय दौरा खत्म करने के बाद मोदी कोलंबो से स्वदेश रवाना हुए। किसी भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा 25 वर्ष में श्रीलंका का यह पहला दौरा था। श्रीलंकाई प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे मोदी की विदाई के समय हवाई अड्डे पर मौजूद थे। तीन देशों के पांच दिवसीय दौरे के अंतिम दिन शनिवार को मोदी जाफना का दौरा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने। श्रीलंका से पहले मोदी सेशेल्स और मारीशस भी गए थे।

अपनी जाफना यात्रा से एक दिन पहले मोदी ने शुक्रवार को कोलंबो में श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना से भेंट की और अखंड श्रीलंका में समानता, न्याय, शांति व गरिमा पर बल दिया। उन्होंने श्रीलंका सरकार से राजनीतिक हल ढूंढ़ने के लिए तमिलों के अधिकारों के विकेंद्रीकरण से जुड़े 13वें संविधान संशोधन का शीघ्र व पूर्ण क्रियान्वयन सुनिश्चित करने और उससे भी आगे बढ़ने की अपील की थी।

जाफना में सांस्कृतिक केंद्र की आधारशिला रखते हुए मोदी ने कहा- श्रीलंका को भी तरक्की करनी चाहिए। एकता, शांति और सौहार्द समान विकास के अनिवार्य तत्त्व हैं जहां सभी नागरिकों के लिए सम्मान हो। इस केंद्र का निर्माण भारत कर रहा है। इसके निर्माण पर 60 करोड़ रुपए का खर्च आने की संभावना है। मोदी ने जाफना के लोगों को सांस्कृतिक केंद्र समय पर बनकर तैयार होने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि भारत जाफना में अनोखे और विश्व स्तरीय सांस्कृतिक केंद्र की स्थापना का मौका पाकर गौरवान्वित है। जब एक पुस्तकालय, जहां पुस्तकें मिलती हैं, स्थापित किया जाता है, तो वह पीढ़ियों को एक करता है।

जाफना के लोगों के साथ एकजुटता प्रदर्शित करते हुए उन्होंने कहा- जाफना अपने लिए नया लक्ष्य बना रहा है। दुनिया को यहां से शांति के संदेश का अनुभव हो रहा है। मैं बिना किसी निर्धारित कार्यक्रम के इस भूमि को नमन करने यहां आता, तब भी यह बड़ी बात होती। प्रधानमंत्री ने कहा- जाफना ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। लोगों ने कई कठिनाइयां झेली हैं। मोदी ने जाफना में नागुलेश्वरम मंदिर में प्रार्थना भी की। उन्होंने बाद में ट्वीट किया- धन्य हुआ।

इससे पहले मोदी ने श्रीलंका के पश्चिमोत्तर शहर तलाई मन्नार में एक रेल सेवा को हरी झंडी दिखाई। यह दशकों तक चले गृहयुद्ध के बाद बहाल हुई है। तलाई मन्नार भारत के सबसे निकट है। इस रेल सेवा के शुरू होने के साथ ही उत्तरी प्रांत रेलवे लाइन का पुनर्निर्माण कार्य पूरा हो गया है।

प्रधानमंत्री ने श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे से मुलाकात की। यह मुलाकात भारतीय उच्चायोग परिसर में स्थित इंडिया हाउस में मोदी की श्रीलंका यात्रा के अंतिम दिन हुई। मोदी 25 साल में श्रीलंका की यात्रा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं। यह बैठक राजपक्षे के इन आरोपों की पृष्ठभूमि में हुई है कि जनवरी में हुए चुनाव में उनकी अपमानजनक हार के पीछे अमेरिका व यूरोपीय देशों का हाथ था। मोदी और राजपक्षे की मुलाकात का ब्योरा सामने नहीं आया है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने दोनों नेताओं की भेंट की तस्वीर को ट्वीट करते हुए लिखा, ‘पिछले चार दिनों में तीन देशों की यात्रा के दौरान 40 से अधिक मुलाकात की शृंखला में अंतिम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पूर्व राष्ट्रपति राजपक्षे के साथ मुलाकात।’

सीलोन चेंबर ऑफ कॉमर्स में शुक्रवार को श्रीलंकाई कारोबारी समुदाय को संबोधित करते हुए नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत में दुनिया का भरोसा फिर से बहाल हुआ है। देश के साथ वैश्विक भागीदारी नए स्तर पर पहुंच गई है। उन्होंने श्रीलंका को आश्वस्त किया कि वृहद दोतरफा कारोबार असंतुलन पर उसकी चिंताओं के समाधान के लिए कदम उठाए जाएंगे। यह उल्लेख करते हुए कि क्षेत्र में श्रीलंका के भारत के मजबूत आर्थिक साझेदार बनने की संभावना है, मोदी ने कहा कि उसे भारत की अर्थव्यवस्था के आकार से चिंतित नहीं होना चाहिए। उन्होंने माना कि व्यापक कारोबारी असंतुलन के बारे श्रीलंका में कुछ चिंताएं हैं। मैं उसके समाधान के लिए आपके साथ काम करने को तैयार हूं। मैं कारोबार में संतुलित विकास चाहता हूं।

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