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सिंधु जल समझौता: अपना पानी रहे अपने पास, न जाए पाक

सिंधु जल आयोग की लाहौर में होने वाली बैठक के पहले भारत ने अपने हिस्से के जल संसाधन के पूरे इस्तेमाल के लिए पर्याप्त ढांचागत निर्माण के लिए योजनाएं बनानी शुरू कर दी है।

Author नई दिल्ली | Published on: March 5, 2017 2:03 AM
भारत- पाकिस्तान।

सिंधु जल आयोग की लाहौर में होने वाली बैठक के पहले भारत ने अपने हिस्से के जल संसाधन के पूरे इस्तेमाल के लिए पर्याप्त ढांचागत निर्माण के लिए योजनाएं बनानी शुरू कर दी है। पंजाब में प्रस्तावित शाहपुर कांडी बांध परियोजना का काम दोबारा शुरू कर दिया गया है। साथ ही, पाकिस्तान के हिस्से की पश्चिमी नदियों से 36 मिलियन एकड़ फीट (एमएएफ) पानी के भंडारण के लिए जरूरी निर्माण की योजना बनाई गई है।  अपने हिस्से के संसाधनों के इस्तेमाल की तैयारियों की शुरुआत पंजाब में प्रस्तावित शाहपुर कांडी बांध परियोजना पर अहम फैसले से की गई है। भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर और पंजाब को इस बांध परियोजना के लिए रजामंद कर लिया है। दोनों राज्यों के साथ केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय ने करारनामा कर लिया है। दोनों राज्यों के बीच इस बांध की डिजाइन को लेकर विवाद के कारण इस पनबिजली परियोजना पर काम रुका हुआ था।

केंद्रीय जल संसाधन सचिव अमरजीत सिंह की मौजूदगी में दोनों राज्यों के सिंचाई सचिव पंजाब के केएस पन्नू और जम्मू-कश्मीर के सौरभ भगत ने शुक्रवार की देर रात करारनामे पर दस्तखत किए। इस परियोजना को आयोग की अपने हिस्से वाली नदियों के संसाधन के पूरे इस्तेमाल की दिशा में शुरुआत माना जा रहा है। शाहपुर कांडी बांधकी मंजूरी को भारत के हिस्से में आने वाली रावी, व्यास और सतलुज नदियों के पानी के समुचित इस्तेमाल की योजना के मद्देनजर मजबूत ढांचागत निर्माण का हिस्सा माना जा रहा है।  पंजाब के गुरदासपुर में 55.5 मीटर ऊंचा शाहपुर कांडी बांध बन रहा है। इसकी मदद से पंजाब में पांच हजार हेक्टेयर और जम्मू-कश्मीर में 32,173 हेक्टेयर जमीन की सिंचाई जरूरतों को पूरा किया जा सकेगा। इस बांध से 206 मेगावाट बिजली पैदा की जा सकेगी। इस परियोजना पर मई 1999 में काम शुरू किया गया था, लेकिन पंजाब और जम्मू-कश्मीर में विवाद के बाद 2014 में इससे जुड़ा काम रुक गया था। इस पर दोबारा काम शुरू होने से सिंधु जल समझौते के तहत मिलने वाले पानी के हिस्से के पूरे इस्तेमाल का मकसद पूरा किया जा सकेगा। इस पर 2008 में लागत 2285.81 करोड़ रुपए आंकी गई थी।

वर्ष 1960 में दोनों देशों के बीच हुए जल समझौते के मुताबिक, पूर्वी नदियों का पानी भारत को मिलता है। समझौते के मुताबिक, भारत को पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम और चेनाब) का पानी बहने देना होता है। हालांकि, भारत को इन पश्चिमी नदियों से 36 मिलियन एकड़ फीट (एमएएफ) पानी का भंडारण करने की इजाजत है, जिसका वह घरेलू मकसद से इस्तेमाल कर सकता है। भारत ने अभी तक पानी के भंडारण की कोई व्यवस्था नहीं बनाई है। समझौते के तहत सिंचाई के लिए तयशुदा पूरे कोटे का भारत ने कभी इस्तेमाल नहीं किया, लेकिन अब किया जाएगा और योजना पर लाहौर की बैठक में चर्चा होगी।
पिछले साल उड़ी में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने तय किया था कि वह सिंधु जल समझौते को लेकर पाकिस्तान के साथ होने वाली बैठक में हिस्सा नहीं लेगा। दो दिन पहले विश्व बैंक की दखल के बाद फैसला किया गया कि इस मामले पर बने आयोग के जरिए बातचीत दोबारा से शुरू की जाए। इस आयोग की बैठक महीने के आखिर में लाहौर में होने वाली है। यह आयोग एक व्यवस्था है, जिसके जरिए दोनों देशों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर किसी भी किस्म के विवाद का निपटारा और सिंधु जल समझौते का सही क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाता है।

 

 

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