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इस साल भारत-पाकिस्तान संबंधों में दिखे सुधार के संकेत

कई महीनों से ठंडे पड़े भारत-पाकिस्तान संबंधों में उच्च स्तर पर बैठकों की शृंखला के बाद कुछ सुधार होता प्रतीत हुआ है। दोनों देशों के बीच 2015 में वार्ता फिर से शुरू हुई..

Author इस्लामाबाद | Published on: December 25, 2015 12:35 AM
pew research, narendra modi, modi pakistan policy, BJP pew research, pew research modi, pew research pak Policyपाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के साथ भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो एपी)

कई महीनों से ठंडे पड़े भारत-पाकिस्तान संबंधों में उच्च स्तर पर बैठकों की शृंखला के बाद कुछ सुधार होता प्रतीत हुआ है। दोनों देशों के बीच 2015 में वार्ता फिर से शुरू हुई। इस साल पाकिस्तान में आतंकवादी हमले हुए और तालिबान के साथ शांति वार्ता भी बंद हो गई। इस साल की शुरुआत मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड जकीउर रहमान लखवी को जमानत पर रिहा किए जाने और संघर्ष विराम उल्लंघन की घटनाओं के कारण कड़वाहट के साथ हुई लेकिन 30 नवंबर को पेरिस में जलवायु परिवर्तन सम्मेलन के इतर दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच मुलाकात के बाद यह कड़वाहट कम हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके पाकिस्तानी समकक्ष नवाज शरीफ के बीच संक्षिप्त मुलाकात ने दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (एनएसए) के बीच बैठक की भूमिका तैयार की। एनएसए स्तर की वार्ता दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की मुलाकात के बाद एक सप्ताह के भीतर हुई।

इसके बाद दिसंबर में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सरताज अजीज से इस्लामाबाद में मुलाकात की। भारत और पाकिस्तान के संबंधों को उस समय गहरा झटका लगा था जब कश्मीरी अलगाववादियों के मामले पर दोनों के बीच छिड़े वाक्युद्ध के कारण अगस्त में पहली एनएसए स्तर की वार्ता को अंतिम समय पर रद्द कर दिया गया था। आपसी संबंधों में आए गतिरोध को इसी माह तोड़ते हुए दोनों देशों ने एक ‘समग्र’ वार्ता करने का निर्णय किया, जिसमें शांति और सुरक्षा और जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को शामिल किया जाएगा। इस वार्ता को ‘व्यापक शांति प्रक्रिया’ का नाम दिया गया है और यह 2008 में मुंबई पर आतंकी हमलों के बाद पटरी से उतर गई ‘समग्र शांति प्रक्रिया’ से सिर्फ नाम में ही अलग है। वार्ता के पटरी से उतरने से पहले यह प्रक्रिया पांच साल तक चली थी।

आतंकवाद के मुद्दे पर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहाकारों के बीच विशेष वार्ताएं इस नए प्रारूप के प्रमुख गुणों में से एक हैं। पाकिस्तान वार्ताओं के इस नए प्रारूप में कश्मीर को शामिल करवाने में सफल रहा है। दो विदेश सचिवों को उस समूह की अध्यक्षता करने का काम सौंपा गया है, जो कि दशकों पुराने मुद्दों को सुलझाने की कोशिश करेगा। विदेश मामलों में पाकिस्तान के सलाहाकार अजीज ने संसद को वार्ताओं की बहाली की जानकारी देते हुए कहा कि वे शांति व सुरक्षा, विश्वास निर्माण के कदमों, जम्मू-कश्मीर, सियाचिन, सर क्रीक, वूलर बैरेज, तुलबुल नेविगेशन परियोजना, आर्थिक एवं व्यवसायिक सहयोग, आतंकवाद-रोध, नशीले पदार्थों पर नियंत्रण व मानवीय मुद्दों, जनता के बीच आपसी संपर्क और धार्मिक पर्यटन पर चर्चा करेंगे। उन्होंने कहा, ‘इस वार्ता में संयुक्त वार्ता के सभी विषयों को शामिल किया गया है और कुछ अतिरिक्त विषय भी जोड़े गए हैं। यह भी तय किया गया है कि इस व्यापक द्विपक्षीय वार्ता के तहत दोनों राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहाकारों के बीच आतंकवाद पर चर्चा की जाएगी।’

पाकिस्तान ने सभी लंबित मुद्दों पर चर्चा के लिए दोनों देशों के विदेश सचिवों के बीच जनवरी के मध्य में वार्ताएं करवाने का प्रस्ताव भारत के समक्ष प्रस्ताव रखा है। सुषमा ने पिछले सप्ताह संसद को बताया था कि मोदी और शरीफ ने जब जुलाई में ऊफा (रूस) में और हाल में पेरिस में मुलाकात की थी, तब उन्होंने आतंकवाद पर वार्ता करने का निर्णय लिया था।

उन्होंने कहा था, ‘हमने निर्णय लिया है कि आतंकवाद के मसले को वार्ता के जरिए ही सुलझाया जा सकता है क्योंकि आतंकवाद के साए को दूर करने का तरीका वार्ता ही है लेकिन हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं, हमारे प्रधानमंत्री ने यह स्पष्ट किया है कि वार्ता और आतंकवाद साथ साथ नहीं चल सकते।’ अजीज ने कहा कि विदेश सचिव नए फार्मेट के तहत जनवरी में मुलाकात करेंगे और बैठकों के कार्यक्रम के संबंध में निर्णय लेंगे। हालांकि पाकिस्तान में एक असैन्य व्यवस्था है लेकिन नए फार्मेट में सेना भी हिस्सा होगी क्योंकि सेवानिवृत्त सैन्य जनरल नासिर खान जंजुआ को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त किया गया है। वह अपने समकक्ष के साथ आतंकवाद के मुद्दे पर बात करेंगे जो कश्मीर से निकटता से जुड़ा है।

दोनों पक्ष वार्ता की तैयारी कर रहे हैं, ऐसे में मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई की दिशा में धीमी प्रगति एक बड़ी बाधा है। इस बीच पाकिस्तान में हिंसा जारी रही । इस साल अल्पसंख्यकों पर कई हमले हुए। मुहर्रम के दौरान सिंध में शिया समुदाय के एक जुलूस पर आत्मघाती हमले में 22 लोग मारे गए। बलूचिस्तान में भी एक शिया मस्जिद में एक आत्मघाती हमलावर ने बम विस्फोट कर दिया जिससे 12 लोगों की मौत हो गई।
सिंध के शिकारपुर में एक शिया इमामबाड़े में जनवरी में हुए बम विस्फोट में 61 लोगों की मौत हो गई थी और कम से कम 60 लोग घायल हुए। इन हमलों के अलावा पाकिस्तान को प्राकृतिक आपदाओं ने भी परेशान किया। देश में अक्तूबर में 7.5 तीव्रता का भूकम्प आया जिससे पंजाब और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में 250 से अधिक लोगों की मौत हो गई और 1300 से अधिक लोग घायल हुए।

भारत-पाकिस्तान के खराब संबंधों के बावजूद एक सुखद बात यह रही कि सुनने और बोलने में अक्षम गीता भारत लौट आई। वह एक दशक से अधिक समय पहले गलती से पाकिस्तान पहुंच गई थी।

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