ताज़ा खबर
 

भारत-पाकिस्तान संघर्षविराम रेखा की निगरानी स्वीडिश मेजर के हवाले, संराष्ट्र ने बनाया नया अध्यक्ष

भारत कहता रहा है कि संराष्ट्र सैन्य पर्यवेक्षक समूह अपना महत्व खो चुका है और शिमला समझौते एवं नियंत्रण रेखा की स्थापना के बाद से यह अप्रासंगिक हो गया है।

Author संयुक्त राष्ट्र | June 9, 2016 1:57 PM
संयुक्त राष्ट्र (फाइल फोटो)

जम्मू-कश्मीर में पड़ने वाली भारत और पाकिस्तान के बीच की संघर्षविराम रेखा की निगरानी के लिए स्वीडिश सेना के एक उच्च स्तरीय अधिकारी को संयुक्त राष्ट्र मिशन का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि मेजर जनरल पर गुस्ताफ लोदिन (59) को संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की-मून द्वारा भारत एवं पाकिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सैन्य पर्यवेक्षक समूह (यूएनएमओजीआईपी) के लिए मिशन का मुख्य सैन्य पर्यवेक्षक और प्रमुख नियुक्त किया गया है। लोदिन लॉजिस्टिक्स के विशेषज्ञ भी हैं।

मेजर जनरल लोदिन घाना के मेजर जनरल डेलाली जॉनसन साकी की जगह ले रहे हैं। इस पद पर उनका दो साल का कार्यकाल दो जुलाई को पूरा हो रहा है। भारत कहता रहा है कि यूएनएमओजीआईपी अपना महत्व खो चुका है और शिमला समझौते एवं नियंत्रण रेखा की स्थापना के बाद से यह अप्रासंगिक हो गया है।

लोदिन ने स्वीडिश सेना में अपने सैन्य करियर की शुरुआत वर्ष 1978 में की थी। मेजर जनरल लोदिन द्वारा संभाला गया सबसे हालिया पद स्वीडिश सैन्य बलों के लिए खरीद एवं साजोसामान निदेशक का था। इससे पहले लोदिन ‘नेशनल आर्मामेंट्स फॉर स्वीडन’ के उपनिदेशक और स्वीडिश सैन्य बलों में डिप्टी चीफ ऑॅफ स्टाफ थे। वर्ष 1971 के प्रस्ताव 307 में दिए गए जनादेश के अनुसार, यूएनएमओजीआईपी परमाणु क्षमता से संपन्न दक्षिण एशियाई पड़ोसी देशों के बीच जम्मू-कश्मीर स्थित नियंत्रण रेखा पर और इसके आसपास होने वाले संघर्ष विराम उल्लंघनों का अवलोकन करता है और इनकी रिपोर्ट देता है। इसके साथ ही वह उन घटनाओं की भी रिपोर्ट देता है जिनके कारण संघर्ष विराम उल्लंघन हो सकते हैं।

इस साल 31 मार्च तक यूएनएमओजीआईपी के 44 सैन्य पर्यवेक्षक, 25 अंतरराष्ट्रीय असैन्य कर्मी और स्थानीय असैन्य स्टाफ के 47 सदस्य थे। पर्यवेक्षक समूह को संयुक्त राष्ट्र के नियमित बजट से वित्तपोषण मिलता है। वर्ष 2014-2015 के लिए 196.4 लाख डॉलर की व्यवस्था की गई थी।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App