भारत-ओमान व्यापार समझौता सोमवार से लागू हो रहा है, इस समझौते के तहत भारतीय उपादों पर कोई भी टैक्स नहीं लगेगा। यह व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) पर पिछले साल दिसंबर में प्रधानमंत्री मोदी की मस्कट दौरे के दौरान हुआ था।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बात करते हुए केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने समझौते की शुरू होने की घोषणा करते हुए कहा कि यह छात्रों, कारीगरों, महिलाओं, किसानों, मछुआरों और लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए समृ्द्धि के वैश्विक मार्ग बनाने के केंद्र सरकार के मिशन में मील का पत्थर साबित होगा। इसके तहत नए बाजार खोले जाएंगे, निर्यात को बढ़ावा मिलेगा, निवेश आकर्षित होगा और रोजगार सृजन में तेजी आएगी।
क्यों अहम है यह समझौता?
भारत-ओमानी सीईपीए डील अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच लागू हुआ है, इस युद्ध के कारण होर्मुज जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। रणनीतिक रूप से अहम इस अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र से दुनिया का करीबन 20 प्रतिशत यानी वैश्विक तेल खपत का लगभग पाँचवाँ हिस्सा गुजरता है, जो इस युद्ध के कारण अभी करीब-करीब बंद है।
चूंकि ओमान की अधिकांश तटरेखा होमुर्ज जलमार्ग से बाहर, सीधे अरब सागर और ओमान की खाड़ी से जुड़ी हुई है, ऐसे में भारत आसानी से अपने तेल और गैस की आपूर्ति कर सकेगा।
एनडीटीवी के मुताबिक, थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि ओमान की रणनीतिक स्थिति के कारण सलालाह और दुक्म जैसे अहम पोर्ट होमुर्ज जलडमरुमध्य बंद होने पर भी प्रभावित नहीं होते।
अजय ने आगे कहा, “इसके फलस्वरूप, खाड़ी में संघर्ष या अस्थिरता के दौर में ओमान एक विश्वसनीय व्यापार और ऊर्जा प्रवेश द्वार के रूप में काम करना जारी रख सकता है।”
खाड़ी देशों देशों से व्यापार घाटा बढ़ा
प्रमुख खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्थाओं से भारत का आयात अप्रैल 2025 में करीब 15 अरब अमेरिकी डॉलर से घटकर अप्रैल 2026 में 9.8 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया है। वहीं, भारत का निर्यात भी घटकर 4.4 अरब अमेरिकी डॉलर से 2.7 अरब डॉलर पर आ गया है।
केवल ओमान से व्यापार बढ़ा
हालांकि ओमान से कच्चे तेल और यूरिया के अधिक खरीद के कारण भारत का आयात 246.4 प्रतिशत से बढ़कर 430 मिलियन अमेरिकी डॉलर से लगभग 1.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर पहुंच गया है। इस बीच, ओमान को भारत के निर्यात में केवल 10.3 प्रतिशत ही गिरावट दर्ज हुई है।
सीईपीए के तहत, ओमान अपने 98.08 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर जीरो टैक्स की पेशकश कर रहा है, जो ओमान के भारत के निर्यात के 99.38 प्रतिशत को कवर करता है। सीईपीए से पहले तक यह छूट निर्यात के 15.3 प्रतिशत पर थी। रत्न और आभूषण, वस्त्र, चमड़ा, जूते, खेल सामग्री, प्लास्टिक, फर्नीचर, कृषि उत्पाद, इंजीनियर उत्पाद, फार्मास्यूटिकल, मेडिकल उपकरण और आटोमोबाइल समेत सभी प्रमुख श्रण-प्रधान क्षेत्रों को पूर्ण टैक्स फ्री का लाभ मिलता है।
वित्त वर्ष 2026 में ओमान को भारतीय निर्यात लगभग 3.64 बिलियन डॉलर रहा, जिसमें पेट्रोल (781 मिलियन डॉलर) और नेफ्था (746 मिलियन डॉलर) जैसे पेट्रोलियम उत्पादों का योगदान सबसे अधिक रहा, इसके बाद कैल्सीनेटड एल्यूमिना (277 मिलियन डॉलर) लौह और इस्पाद उत्पाद (230 मिलियन डॉलर), मशीनरी (178 मिलियन डॉलर) और चावल (167 मिलियन अमेरिकी डॉलर) शामिल था।
हालांकि भारत से निर्यात होने वाले 80 फीसदी से अधिक पहले से ही पांच प्रतिशत के अपेक्षाकृत कम औसत शुल्क पर ओमान आते हैं। फिर भी कुछ उत्पादों पर यह शुल्क 100 फीसदी तक पहुंच गया था।
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अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि ओमान ने वॉशिंगटन को भरोसा दिलाया है कि उसकी ईरान के साथ मिलकर होर्मुज जलमार्ग पर किसी भी तरह की टोल व्यवस्था लागू करने की प्लानिंग नहीं है। खाड़ी देश वह अमेरिका के साथ अच्छे संबंध बनाए रखना चाहता है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
