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संयुक्त राष्ट्र में बोलीं मेनका गांधी, लैंगिक समानता का वातावरण बनाने का हो रहा प्रयास

केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी का कहना है कि भारत लैंगिक समानता का वातावरण बनाने का प्रयास कर रहा है और महिलाओं के लिए अपनी राष्ट्रीय नीति में भी सुधार कर रहा है ताकि महिला सशक्तीकरण की प्रतिबद्धता को रफ्तार देने के लिए एक मजबूत नींव का निर्माण किया जा सके।

Author संयुक्त राष्ट्र | March 16, 2016 03:05 am

केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी का कहना है कि भारत लैंगिक समानता का वातावरण बनाने का प्रयास कर रहा है और महिलाओं के लिए अपनी राष्ट्रीय नीति में भी सुधार कर रहा है ताकि महिला सशक्तीकरण की प्रतिबद्धता को रफ्तार देने के लिए एक मजबूत नींव का निर्माण किया जा सके।

महिला बाल विकास मंत्री मेनका ने कहा, ‘लैंगिक समानता को सुनिश्चित करना, महिला सशक्तीकरण को बढ़ाना और महिलाओं के खिलाफ हिंसा व भेदभाव से जूझना एक समावेशी समाज और विकास के लिए हमारी राष्ट्रीय कोशिश में शामिल है।’ कमीशन आॅन द स्टेटस आॅफ वीमेन (सीएसडब्लू) के 60वें सत्र पर एक गोलमेज सम्मेलन में उन्होंने कहा, ‘हमने दोनों तरह की गतिविधियों को अपनाया है।

एक तरफ हम महिलाओं की बेहतरी के लिए विधायी और नीतिगत संरचना बना रहे हैं वहीं दूसरी ओर सामाजिक पूर्वाग्रहों और रूढ़ियों से निपटने के लिए पीढ़ियों को जागरूक व संवेदनशील बनाने के कार्यक्रम चला रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि 17वें सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप महिलाओं के प्रति जताई गई अपनी प्रतिबद्धता को रफ्तार देने के लिए भारत अपनी राष्ट्रीय नीति का उन्नयन कर रहा है ताकि इसके लिए एक मजबूत ढांचे का निर्माण हो सके।

गांधी ने कहा, ‘सतत विकास लक्ष्यों के लिए हमने नए सार्वभौमिक एजंडा लागू करना प्रारंभ किया है। महिला सशक्तिकरण और लैंगिक समानता को वास्तविक रूप में स्थापित करने की परिस्थितियां भारत में पहले से ही मौजूद हैं।’’
सीएसडब्लू के सत्र का शुभारंभ सोमवार को हुआ है और यह 24 मार्च तक चलेगा। इस दौरान लैंगिक समानता और महिला सशक्तीकरण की दिशा में कहां तक काम हुआ है इसकी समीक्षा करने के लिए दुनिया भर से राज्यों, नागरिक समाज और संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के प्रतिनिधि जुटेंगे और नई कार्यविधियों व पहलों की योजना बनाएंगे।

सीएसडब्ल्यू के लिए पूरे शहर में तकरीबन 400 से ज्यादा कार्यक्रमों की योजना बनाई गई है और इन सभी के मूल में महिला सशक्तिकरण और सतत विकास है। सितंबर 2015 में एजंडा 2030 को आत्मसात किए जाने के बाद यह इस आयोग का पहला सत्र है।
मेनका ने गोलमेज सम्मेलन को बताया कि वर्ष 2030 के सतत विकास लक्ष्यों के मूल में निहित महिला सशक्तीकरण और लैंगिक समानता के लिए राष्ट्रीय सांस्थानिक प्रबंधों को बढ़ाया गया है और सरकार के ‘स्वच्छ भारत अभियान’, ‘मेक इन इंडिया’, ‘डिजिटल इंडिया’, ‘स्किल इंडिया’, ‘स्मार्ट सिटीज’ और ‘जन धन योजना’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से इन्हें पहले ही लागू किया जा रहा है। मंत्री ने बताया कि प्रक्रियाओं को सही स्थान पर लगाया गया है क्योंकि हर योजना को बनाने से पहले ही उनका विश्लेषण किया गया है और इनमें कुछ साझे संकेतकों को स्थापित किया गया है जो परिणाम तक हमारी पहुंच सुनिश्चित कराएंगे।

लैंगिक समानता, महिला अधिकार और सशक्तीकरण में परिवर्तन को साकार करने को लेकर भारत की वैश्विक प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए मेनका गांधी ने कहा कि राजनीति में महिला नेताओं की भूमिका बढ़ रही है और अपनी भागीदारी से वह संसद को मजबूत बना रही हैं। उन्होंने कहा, ‘महिलाओं के मुद्दों और नवीन मुद्दों को अब पहले से कहीं आसान तरीके से उठाया गया है।’

लैंगिक समानता के लिए 2005 में भारत सरकार ने लैंगिक आधार पर बजटीय प्रावधान को भी अपनाया है। इस क्षेत्र में क्षमताओं के निर्माण और शोध बढ़ाने को ध्यान में रखते हुए सरकार राष्ट्रीय और उप-राष्ट्रीय स्तर पर कई नोडल केंद्र शुरू करने के लिए तैयार है ताकि योजना निर्माण, बजट और लागू करने की प्रक्रिया के हर स्तर पर लैंगिक परिदृश्य को सामने रखा जा सके। उन्होंने बताया कि क्षमता निर्माण को उच्च प्राथमिकता दी गई है और ‘विलेज कनवर्जेंस एंड फैसिलिटेशन सेंटर्स’ की मदद से गांवों में समुदायों के बीच लैंगिक विशेषता वाले कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने कहा कि जब वे यहां उपस्थित विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों और उनकी प्रतिबद्धता को देखते हैं तो उन्हें विश्वास हो जाता है कि महिला समानता को हर जगह प्राप्त किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि जब तक महिला अधिकारों की अवहेलना होती रहेगी तब तक यह संघर्ष खत्म नहीं होगा।

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