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नेपाल में भारत से लगती सीमा पर मदरसों को मिल रही विदेशी फंडिंग, केन्द्र सरकार ने जतायी चिंता

परिषद् के मुताबिक भारत से लगे सीमावर्ती क्षेत्रों में मदरसों को कतर, सऊदी अरब और तुर्की जैसे देशों से धन मिल रहे हैं। परिषद् में सदस्य सचिव राजेंद कुमार पौडेल ने स्वीकार किया कि "भारत ने इसे लेकर चिंता जाहिर की है।"

नेपाल में बढ़ते चरमपंथ पर भारत ने जतायी चिंता। (एपी फोटो)

नेपाल में भारत की सीमा से लगते इलाकों में मदरसों को विदेशी फंडिंग मिलने की बात सामने आयी है। भारत सरकार ने इस संबंध में नेपाल सरकार के साथ अपनी चिंता साझा की है। इसके बाद नेपाल सरकार, देश में चल रहे गैर सरकारी संगठनों (NGO) को विदेशों से मिल रही फंडिंग के संबंध में कानून में बदलाव करने जा रही है। इस संबंध में नेपाल सरकार ने एक मसौदा तैयार किया है, जिसके तहत नेपाल एनजीओ पर शिकंजा कस भारत और चीन के साथ अपने संबंधों को संतुलित करने की योजना बना रहा है।

काठमांडू पोस्ट की एक खबर के अनुसार, नेपाल के समाज कल्याण परिषद् द्वारा एनजीओ के लिए तैयार किए जा रहे मसौदे में कहा गया है कि “नेपाल एक भूआबद्ध (सभी ओर से जमीन से घिरा हुआ) देश है और उसके उत्तर और दक्षिण में दो बड़ी आबादी वाले देश (भारत और चीन) हैं। यह नीति एनजीओ को वैसे कार्यक्रम संचालित करने से हतोत्साहित करेगी, जो नेपाल के पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

परिषद् में सूचना अधिकारी दुर्गा प्रसाद भट्टराई ने कहा कि प्रस्तावित नीति का लक्ष्य एनजीओ की गतिविधियों, खासतौर पर सीमावर्ती क्षेत्रों से जुड़ी चिंताओं को दूर करना होगा। भट्टाराई के अनुसार, “प्रस्तावित नीति का उद्देश्य इस बात पर जोर देना है कि नेपाल सरकार, खासतौर पर सीमावर्ती क्षेत्रों में, मदरसों एवं मठों के निर्माण के जरिए अंतरराष्ट्रीय एनजीओ की रणनीति को लेकर चिंतित है।”

परिषद् के मुताबिक भारत से लगे सीमावर्ती क्षेत्रों में मदरसों को कतर, सऊदी अरब और तुर्की जैसे देशों से धन मिल रहे हैं। परिषद् में सदस्य सचिव राजेंद कुमार पौडेल ने स्वीकार किया कि “भारत ने गृह मंत्रालय के जरिए सीमावर्ती क्षेत्र में मदरसों की बड़ी मौजूदगी के बारे में चिंता जाहिर की है।”

उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए हमने विदेशी धन की मंजूरी मुहैया करने के दौरान धन के स्रोत की जांच के लिए और मदरसों में संचालित हो रहे कार्यक्रमों की प्रकृति की छानबीन के लिए कदम उठाए हैं। हम भारत की चिंताओं को दूर करने के पक्ष में हैं लेकिन हमने काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास से कोई राय नहीं ली है।”

नेपाल और भारत के काफी नजदीकी संबंध रहे हैं। हालांकि बीते कुछ समय से नेपाल में चीन का प्रभाव भी काफी बढ़ा है। चीन नेपाल में काफी निवेश कर रहा है, जिसे लेकर भारत में चिंताएं भी हैं। यही वजह है कि अब नेपाल दोनों देशों के साथ अपने संबंधों को लेकर सजग हो गया है। इस दिशा में भी ताजा मसौदा काफी अहम है।

दरअसल भारत द्वारा चरमपंथ संबंधी चिंताएं नेपाल के साथ साझा करने के साथ ही चीन ने भी तिब्बतियों की गतिविधियों के बारे में पूर्व में नेपाल से शिकायत की है। भट्टाराई के अनुसार, “हम चीन से लगे सीमावर्ती इलाकों में भी एनजीओ की गतिविधियों के बारे में समान रूप से संवेदनशील हैं ताकि उत्तरी पड़ोसी देश (चीन) के साथ हमारे संबंधों पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़े।”

(भाषा इनपुट के साथ)

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