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गांधी जयंती के दिन भारत करेगा पेरिस जलवायु समझौते का अनुमोदन: सुषमा स्वराज

सुषमा स्वराज ने महासभा में अपने संबोधन में कहा, 'मेक इन इंडिया का आह्वान हो रहा है। डिजिटल इंडिया बहुत तेजी से अपने पैर पसार रहा है।'
Author संयुक्त राष्ट्र | September 26, 2016 23:42 pm
सुषमा ने कहा कि भारत एससीओ को प्रभावी क्षेत्रीय मंच के रूप में विकसित करने के लिए व्यापक रूप से सहयोग जारी रखेगा।

भारत अगले महीने दो अक्तूबर को महात्मा गांधी की जयंती के दिन मील का पत्थर माने जाने वाले पेरिस जलवायु परिवर्तन समझौते का अनुमोदन करेगा। भारत ने कहा कि वह जलवायु परिवर्तन से निपटने में अग्रणी भूमिका निभाता रहेगा, साथ ही विकसित देशों से भी अधिक वित्तीय योगदान और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के जरिये अपनी भूमिका निभाने को कहा। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 71वें सत्र को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने सोमवार (26 सितंबर) को कहा कि जलवायु परिवर्तन एक और ऐसा मुद्दा है, जो हमारे सामने एक गंभीर चुनौती बनकर खड़ा है। प्रकृति के पास संपदा तो अपार है लेकिन उतनी, जितने में वह मनुष्य की जरूरत को पूरा कर सके, पर इतनी नहीं कि उसके लालच का पेट भर सके क्योंकि लोभ की कोई सीमा नहीं होती। उन्होंने कहा कि पेरिस समझौते में साझा लेकिन क्षमताओं के अनुरूप अलग अलग जिम्मेदारी के सिद्धांत को स्वीकारा गया है, जिसका अर्थ है कि जिम्मेदारी तो सबकी साझी है, लेकिन देनदारी सबकी अलग-अलग। इसलिए ये बेहद जरूरी है कि विकसित देश अपनी जिम्मेदारियों का निवर्हन करते हुए सभी की भलाई के लिए तकनीक भी दें और धनराशि भी, तभी यह कार्यक्रम सफल होगा

सुषमा ने कहा, ‘मैं इस मंच से यह विश्वास दिलाती हूं कि जलवायु परिवर्तन की दिशा में भारत एक अग्रणी भूमिका निभाएगा। पेरिस समझौते के लिए भारत अपने अनुमोदन का प्रपत्र दो अक्तूबर को जमा करा देगा। हमने सोच समझकर यह तिथि तय की है क्योंकि यह गांधीजी का जन्म दिवस है जिनका संपूर्ण जीवन प्रकृति के संरक्षण को समर्पित रहा।’ उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक नया सिद्धांत दिया है, जलवायु न्याय का। हम प्रकृति के साथ न्याय करें तो वह हमारे और हमारी भावी पीढियों के साथ जरूर न्याय करेगी। लेकिन यदि हम उसका अंधाधुंध दोहन करेंगे तो वह क्रोधित हो जाएगी और अपना रौद्र रूप दिखाएगी। सुषमा ने कहा, ‘हम देख ही रहे हैं कि दुनिया में कई जगहों पर प्रकृति अप्राकृतिक हो बैठी है – किसी कोने में भयंकर वर्षा, कहीं, घनघोर गर्मी, कहीं झंझावात, कहीं सुनामी, कहीं बादलों का फटना।’

सुषमा स्वराज ने कहा, ‘हमने अपने देश में बहुत महत्वाकांक्षी योजना बनाई है, जिसमें हमने वर्ष 2030 तक 40 प्रतिशत ऊर्जा गैर जीवाश्म ईंधन से बनाने का लक्ष्य रखा है।’ उन्होंने कहा कि इसके लिए हमें एक निश्चित वातावरण की आवश्यकता होगी, क्योंकि बाहर से पूंजीनिवेश करने वाले लोग नीतियों की स्थिरता चाहते हैं। ये निश्चितता उन्हें मिले, इस प्रयास में हम लगे हैं। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन का गठन भी हमारी एक अभिनव पहल है जिससे सौर तकनीक सभी को उपलब्ध हो सके। विदेश मंत्री ने कहा, ‘यह समय का तकाजा है हम असीमित खपत पर रोक लगाएं और अपनी जीवन- शैली को पर्यावरण के अनुकूल बनाएं।’ उन्होंने कहा कि योग भारत का वह प्राचीन ज्ञान है, जो एक टिकाऊ जीवनशैली का प्रतीक है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के लिए दिए गए अपार समर्थन के लिए मैं आप सबका आभार व्यक्त करना चाहती हूं।

गरीबी को वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए उन्होंने कहा कि आज हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती है विश्व के कई कोनों में फैली हुई गरीबी को मिटाना, और यह सुनिश्चित करना कि हम उन सभी जरूरतमंद लोगों तक समृद्धि पहुंचा सकें। उन्होंने कहा, ‘हमें यह भी सुनिश्चित करना है कि स्त्रियों और पुरुषों के बीच लैंगिक समानता हो और महिलाओं को सुरक्षा मिल सके। हमें विश्व शांति के लिए कार्य करना है क्योंकि शांति के बिना समृद्धि नहीं आ सकती।’ विदेश मंत्री ने कहा कि पिछले एक वर्ष में विश्व में बहुत परिवर्तन हुआ है -कुछ अच्छा, कुछ बुरा और कुछ हम सबको बहुत चिंतित करने वाला। पिछले वर्ष के दौरान किए गए कार्यो और उपलब्धियों पर विचार विमर्श करने के लिए इससे बेहतर कोई और मंच नहीं हो सकता। हम सभी को यह याद रखना होगा कि जो काम हमने किए हैं, उनकी तो समीक्षा होगी ही, लेकिन जो नहीं कर पाए हैं, उनकी भी समीक्षा होगी।

सुषमा ने कहा कि इन्हीं चुनौतियों के महत्व को समझते हुए आपने इस महासभा के लिए सतत टिकाऊ लक्ष्य (एसडीजी) को सबसे उच्च प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि हम सब जानते हैं कि मानवता का छठा हिस्सा भारत में रहता है। इसलिए यदि भारत में एसडीजी सफल होगा तभी विश्व में सफल हो सकेगा। हम एजेंडा 2030 को पूरे मनोयोग से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमने तय किया है कि संसद के हर सत्र में एक दिन केवल एसडीजी पर चर्चा किया करेंगे ताकि इनकी प्रगति पर सतत निगरानी बनी रहे। इससे बहुत अच्छे परिणाम सामने आएंगे। विदेश मंत्री ने कहा कि एजेंडा 2030 को सफल बनाने के लिए सभी देश अपनी-अपनी सामर्थ्य के अनुसार तो कार्य कर ही रहे हैं परंतु यह भी जरूरी है कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी मिलता रहे।

उन्होंने कहा, ‘मुझे खुशी है आपको यह बताते हुए कि इसके तहत 17 लक्ष्यों में से अधिकतर लक्ष्यों को भारत सरकार ने अपने राष्ट्रीय कार्यक्रमों में शामिल कर लिया है। स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत स्कूलों में 4 लाख से अधिक शौचालयों का निर्माण हो चुका है। इसी तरह बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, एक देशव्यापी अभियान बन गया है।’ विदेश मंत्री ने महासभा में अपने संबोधन में कहा कि मेक इन इंडिया का आह्वान हो रहा है। जनधन योजना जो विश्व की सबसे बड़ी वित्तीय समावेशी योजना है, उसके अंतर्गत 25 करोड़ से ज्यादा गरीब लोगों के बैंक खाते खोले गए हैं। डिजिटल इंडिया बहुत तेजी से अपने पैर पसार रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय युवाओं को कौशल युक्त बनाने के लिए अनेकानेक प्रशिक्षण कार्यक्रम चल रहे हैं, जिनसे हमारे युवा अपनी क्षमताओं का समुचित विकास कर सकेंगे। इन पहलों से भारत की विकास यात्रा में नए आयाम जुड़ सके हैं और आज आर्थिक मंदी के दौर में भी भारत विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से विकास करनेवाली अर्थव्यवस्था बन गया है।

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