कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी शुक्रवार, 27 फरवरी से 2 मार्च 2026 तक भारत दौरे पर आ रहे हैं। यह दौरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर हो रहा है। भारत-कनाडा के बीच पिछले तीन सालों से संबंध तनावपूर्ण रहे हैं। कनाडाई पीएम कार्नी का यह दौरा द्विपक्षीय संबंधों में सुधार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। कार्नी पीएम मोदी के अलावा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करेंगे।

सितंबर 2023 में खालिस्तान समर्थक नेता की कनाडा में हत्या को लेकर लगे आरोपों और FTA वार्ता रुकने के बाद दोनों देशों के रिश्ते निचले स्तर पर पहुंच गए थे। दोनों देशों के नेता एक व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते के लिए रूपरेखा तैयार करने के प्रयासों की समीक्षा करेंगे।

Global Trade Research Initiative (GTRI) की लेटेस्ट रिपोर्ट में भारत-कनाडा के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर कुछ बड़ी बातें साझा की गई हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि कार्नी के इस दौरे से दो बड़े संभावित नतीजे हो सकते हैं।

FTA वार्ता दोबारा शुरू

इस दौरे का सबसे बड़ा परिणाम भारत-कनाडा मुक्त व्यापार समझौता (FTA) वार्ता की औपचारिक बहाली हो सकता है। साथ ही, तय समयसीमा में समझौता पूरा करने की राजनीतिक प्रतिबद्धता भी सामने आ सकती है।

गौर करने वाली बात है कि 2025 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 7.8 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। भारत ने लगभग 4.5 अरब डॉलर के उत्पाद (दवाइयां, रत्न-आभूषण, वस्त्र, मशीनरी) एक्सपोर्ट किए जबकि कनाडा से करीब 3.3 अरब डॉलर का आयात हुआ। इस इंपोर्ट में दालें, लकड़ी, पल्प-पेपर और खनन उत्पाद प्रमुख रहे।

दोनों देशों का व्यापार ढांचा एक-दूसरे का पूरक (complementary) है। इसलिए FTA से कृषि-खाद्य, स्वच्छ ऊर्जा और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे सेक्टरों में निवेश और व्यापार को बढ़ावा मिल सकता है।

यूरेनियम आपूर्ति समझौता

इस दौरे का एक दूसरा अहम परिणाम दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति समझौते पर हस्ताक्षर हो सकता है। इससे भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता विस्तार को मजबूती मिलेगी। जबकि कनाडा के लिए यह अमेरिका के अलावा, यूरेनियम निर्यात के लिए एक विश्वसनीय और स्थायी दीर्घकालिक बाजार सुनिश्चित करेगा।

इस समझौते का महत्व भारत के परमाणु क्षेत्र में 2025 के SHANTI Act के तहत किए गए सुधारों के कारण और बढ़ जाता है। इनका उद्देश्य विदेशी तकनीकी भागीदारों को आकर्षित करना और एडवांस्ड व छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों की तैनाती को तेज करना है। भरोसेमंद साझेदार से सुनिश्चित यूरेनियम आपूर्ति विस्तारित रिएक्टर क्षमता को समर्थन देने के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगी।

इस दौरे के दौरान भारत और कनाडा के बीच यूरेनियम आपूर्ति को लेकर 10 वर्षीय समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना जताई जा रही है। कनाडा की ओर से कहा गया है कि दोनों देश व्यापार, ऊर्जा, टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, प्रतिभा एवं संस्कृति के साथ ही रक्षा जैसे क्षेत्रों में नई और महत्वाकांक्षी साझेदारियों के जरिए द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत और एक्सपेंड करने पर जोर देंगे।

क्या है कार्नी की भारत यात्रा का एजेंडा?

कनाडा के प्रधानमंत्री का पहला पड़ाव मुंबई होगा जहां वह विभिन्न व्यावसायिक कार्यक्रमों में भाग लेंगे। इसके अलावा शीर्ष भारतीय एवं कनाडाई कॉरपोरेट नेताओं, वित्तीय विशेषज्ञों और इनोवेटर्स के साथ बातचीत करेंगे। कार्नी रविवार को नई दिल्ली पहुंचेंगे और दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच सोमवार को व्यापक वार्ता होगी।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों नेता भारत-कनाडा रणनीतिक साझेदारी के विभिन्न क्षेत्रों में अब तक हासिल की गई प्रगति की समीक्षा करेंगे, जो पिछले साल जून में कनानास्किस और पिछले साल नवंबर में जोहानिसबर्ग में हुई उनकी पिछली बैठकों पर आधारित होगी। मंत्रालय ने कहा, ”यह दौरा सामान्य होते भारत-कनाडा द्विपक्षीय संबंधों के महत्वपूर्ण चरण पर हो रहा है।”

विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, ”दोनों देशों के प्रधानमंत्री पहले ही एक रचनात्मक और संतुलित साझेदारी को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त कर चुके हैं, जो एक-दूसरे की चिंताओं और संवेदनशील मुद्दों पर पारस्परिक सम्मान, मजबूत जन-संबंधों और बढ़ती आर्थिक परस्पर पूरकता पर आधारित होगी।”

बयान के अनुसार, ”दोनों देशों के नेताओं के बीच होने वाली यह आगामी बैठक भारत तथा कनाडा के मध्य एक दूरदर्शी साझेदारी के निर्माण में सकारात्मक प्रगति तथा साझा दृष्टिकोण की पुष्टि करने का अवसर प्रदान करेगी।”