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सौ बुराइयों के बावजूद पाक‍िस्‍तान की इन 10 बातों से सीख सकता है हिंदुस्तान

यूं तो पाकिस्तान नकारात्मक वजहों से ही अक्सर देश-दुनिया में सुर्खियों में रहता है, मगर वहां की 10 ऐसी बातें हैं, जिनसे हिंदुस्तान भी सीख सकता है।

भारत और पाकिस्तान । परस्पर पड़ोसी देश। सीमाएं जितनी करीब हैं, दिलों की दूरियां उतनी ही ज्यादा। आम आवाम भले ये दूरियां मिटाने की पक्षधर हो, मगर सियासत रोड़ा बनी हुई है। गुलामी के दौर में कभी एक थे, आजादी मिली तो बंटवारे से अलग मुल्क हुए। दोनों पड़ोसी देशों की स्वतंत्रता दिवस में एक दिन का अंतर है। भारत जहां हर साल 15 अगस्त को आजादी के गीत गाता है तो पाकिस्तान एक दिन पहले 14 अगस्त को ही अपना स्वतंत्रता दिवस मना लेता है। यूं तो पाकिस्तान नकारात्मक खबरों की वजह से देश-दुनिया में सुर्खियों में रहता है, मगर कुछ बातें इस देश में ऐसी हैं, जिससे अपना देश भी सीख सकता है।

1-वन नेशन-वन इलेक्शन- भारत में इस वक्त एक देश-एक चुनाव की मांग उठ रही है। ताकि एक ही वक्त लोकसभा और राज्य व‍िधानसभाओं का चुनाव होने से देश को बार-बार आचार संहिता की बंदिशें और भारी खर्चे का बोझ नहीं झेलना पड़े। पाकिस्तान में नेशनल और प्रांतीय असेंबली के चुनाव एक साथ होते हैं। बीते 25 जुलाई को पाकिस्तान में दोनों चुनाव एक साथ हुए। भारत में इसकी जरूरत इन बातों से समझी जा सकती है। 2014 के लोकसभा चुनाव में सरकारी खर्च का आंकड़ा चार हजार करोड़ रुपए का था। 2016 में महाराष्‍ट्र के अलग-अलग ह‍िस्‍सों में अलग-अलग चुनाव के चलते 365 में से 307 द‍िन आदर्श चुनाव आचार संह‍िता लागू रही थी।

2-मतदान के तुरंद बाद परिणामः पाक‍िस्‍तानी चुनाव व्‍यवस्‍था की यह एक बात भी अच्‍छी है क‍ि वोट‍िंग के तत्‍काल बाद ग‍िनती शुरू हो जाती है। भारत में कुछ व्‍यावहार‍िक मुश्‍क‍िलों के चलते ऐसा करना आसान नहीं है, लेक‍िन इस द‍िशा में सोचा जा सकता है। जनता को नतीजों के ल‍िए इंतजार नहीं करना होगा। मतगणना केंद्रों पर ही वोटों की ग‍िनती कराने की व्‍यवस्‍था कर समय, श्रम और संसाधन की भारी बचत की जा सकती है।

3-सत्‍ता में महिलाओं की भागीदारी: पाकिस्तान की असेंबली में महिलाओं के लिए 60 सीटें तय हैं। पाकिस्तान की एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक हर दल को पांच प्रतिशत टिकट महिलाओं को देना अनिवार्य है। यह प्रत‍िशत भले ही कम हो, लेक‍िन सत्‍ता में मह‍िलाओं की भागीदारी अन‍िवार्य करने की द‍िशा में अच्‍छी पहल है। हमारे यहां संसद में महि‍लाओं के ल‍िए 33 फीसदी आरक्षण पर चर्चा तो वर्षों से हो रही है, पर अभी तक यह कानूनी रूप नहीं ले सका है। हालांक‍ि, प‍िछले चुनाव में बीजेपी ने आठ तो कांग्रेस ने 12 फीसदी महि‍लाओं को ट‍िकट द‍िए थे।

4-भ्रष्‍टाचारी पीएम पर तुरंत फैसला: भारत में पनामा पेपर्स में जिन नेताओं और हस्तियों के नाम आए, अभी उनके खिलाफ ठीक से जांच भी नहीं हुई, मगर पाकिस्तान की अदालत ने प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के खिलाफ सुनवाई कर उन्हें जेल की सजा भी सुना दी। त्वरित और सबसे ताकवतर पदधारक के खिलाफ पाकिस्तान की अदालत का यह रुख खास है। 2008 के चुनाव में पीपुल्स पार्टी की जीत के बाद यूसुफ रजा गिलानी प्रधानमंत्री बने थे, मगर जरदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच से जुड़े मामले में पत्र न लिखने के आदेश का अवमानना करने पर कोर्ट ने उन्हें 2012 में पद के लिए अयोग्य करार दे दिया था। इसके बाद उन्हें पद छोड़ना पड़ा। भारत में नेताओं के खिलाफ ऐसे कई मामले चल रहे हैं, जिसमें अवमानना पर अदालतें फटकार लगाकर नेताओं को छोड़ देती हैं। गंभीर भ्रष्‍टाचार के मामलों में भी काूननी कार्रवाई देर से होती है और फैसला आने में लंबा वक्‍त लग जाता है।

5-खुश रहते हुए समस्‍याओं से जूझने का जज्‍बा: पाक‍िस्‍तान तमाम दुश्‍वार‍ियों से जूझ रहा है। पैसों की तंगी, आतंकवाद सह‍ित कई बड़ी समस्‍याएं हैं मुल्‍क में। इसके बावजूद जनता खुश है। यह बात लोगों को चौंका सकती है कि भारत की तुलना में पाकिस्तानी कहीं ज्यादा खुश हैं। इस साल आई वर्ल्ड हैपिनेस रिपोर्ट में जहां भारत 133 वें स्थान पर रहा, वहीं पाकिस्तान काफी ऊपर 75 वें नंबर पर। इससे हम खुश रहते हुए समस्‍याओं से जूझने का जज्‍बा जरूर सीख सकते हैं।

6 बलात्कार पर त्वरित फैसलाः मानवाध‍िकार के मामले में भले ही पाक‍िस्‍तान का रिकॉर्ड खराब रहा हो, लेक‍िन  पाकिस्तान के कसूर ज़िले में इस साल जनवरी में एक बच्ची के साथ हुई बलात्कार की घटना पर उसकी त्‍वर‍ित कार्रवाई सबक लेने लायक है। दरिंदगी की इस घटना पर समूचे देश में आक्रोश पनप उठा। जनाक्रोश को देखते हुए पाकिस्तानी कोर्ट ने त्वरित सुनवाई की। महज डेढ़ माह के भीतर दोषियों को फांसी की सजा सुना दी। भारत में बलात्कार की सर्वाधिक चर्चित घटना 16 दिसंबर 2012 को हुई थी। निर्भया वारदात में दोषियों को फांसी का फैसले होने में नौ महीने लग गए। 13 सितंबर, 2013 को फास्ट ट्रैक कोर्ट ने चार दोषियों को सजा सुनाई थी। हाल ही में कठुआ में एक बच्‍ची के साथ हुई घटना पर भी देश में उबाल आया था, लेक‍िन इस मामले में भी अदालती फैसला अभी दूर की कौड़ी लगता है। इस मामले में पाक‍िस्‍तान की तेजी भले ही आम न हो, पर इसे सबक के रूप में लेकर हम अपने यहां इसे साधारण प्रक्र‍िया बना सकते हैं।

7-सिविल सेवकों के लिए खास व्यवस्थाः पाकिस्तान में अच्छे सिविल सेवकों के प्रोत्साहन की एक खास व्यवस्था है। वहां परफारमेंस रैंक्ड सीरियल डिक्टेटरशिप(पीआरएसडी) स्कीम लागू है। इसके तहत अच्छा प्रदर्शन करने वाले सिविल सर्वेंट्स को अपनी अगली पोस्टिंग चुनने का अधिकार है। ताकि अच्छे अफसर और बेहतर कर सकें। भारत में अक्सर सरकारी अफसर-कर्मियों की पोस्टिंग में पारदर्शिता के अभाव के आरोप लगते हैं। यह भी आरोप लगता है क‍ि जनता के ह‍ित में और सरकार के खि‍लाफ काम करने वाले नौकरशाहों को तबादलों के जरि‍ए परेशान क‍िया जाता है।

8-सबसे बड़ा गैरसकारी एंबुलेंस नेटवर्कः भारत की तुलना में पाकिस्तान के पास सबसे बड़ा गैर सरकारी संगठन के जरिए संचालित एंबुलेंस नेटवर्क है। पाकिस्तान की समा टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक ईधी फाउंडेशन नामक एनजीओ यह सुविधा पाकिस्तान में संचालित करता है। इसके लिए उसका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज हो चुका है।

9-सबसे बड़ा मानवनिर्मित जंगलः एक जंगल प्राकृतिक होता है। जिसकी स्थापना में मानव नहीं प्रकृति की भूमिका होती है। मगर कुछ जंगल मैनमेड यानी मानवनिर्मित होते हैं। पाकिस्तान इस मामले में भारत से सौभाग्यशाली है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में चंगा-मंगा नामक मानवनिर्मित जंगल दुनिया के सबसे बड़े मैनमेड जंगल मेंहै, यह 12 हजार एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में फैला है। सभी पौधे यहां लोगों ने रोपे हैं।

10-टीवी शोः पाकिस्तान में टीवी सीरियल्स कुछ मायने में भारत के हिंदी टीवी सीरियल्स की तुलना में अलहदा होते हैं। पाकिस्तानी सीरियल्स में किरदार कम मेकअप में दिखत हैं, ज्यादातर शोज वास्तविकता पर आधारित होते हैं, जबकि भारत में बनने वाले ऐसे सीरियल्स में ज्यादातर नकारात्मक किरदार पर फोकस किया जाता है। ज्यादातर सीरियल्स कपोल कल्पित होते हैं। क्योंकि सास भी कभी बहु की तुलना में पाकिस्तान में जिंदगी गुलजार है नामक शो चलता है। दर्शक दोनों में अंतर महसूस कर सकते हैं।

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