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चीन सागर आचार संहिता को नतीजे तक जल्द पहुंचाया जाए: भारत

विवादित समुद्री क्षेत्र को लेकर चीन की बढ़ती आक्रामकता के बीच यहां एशिया-प्रशांत देशों के रक्षा मंत्रियों की बैठक में भारत ने बुधवार को सामरिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण दक्षिण चीन..

Author कुआलालंपुर | November 4, 2015 10:28 PM
रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर (पीटीआई फाइल फोटो)

विवादित समुद्री क्षेत्र को लेकर चीन की बढ़ती आक्रामकता के बीच यहां एशिया-प्रशांत देशों के रक्षा मंत्रियों की बैठक में भारत ने बुधवार को सामरिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण दक्षिण चीन सागर के लिए आचार संहिता को जल्द आम सहमति से निष्कर्ष तक ले जाने का आह्वान किया। चीन लगभग समूचे दक्षिणी चीन सागर पर अपना दावा करता है।

आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक को संबोधित करते हुए भारत के रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर ने नौवहन की स्वतंत्रता पर जोर देते हुए उम्मीद जताई कि दक्षिण चीन सागर क्षेत्र से जुड़े विवादों में संबंधित पक्ष आचार के संबंध में 2002 के घोषणापत्र का पालन करेंगे और इसके प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करेंगे व विवादों का शांतिपूर्ण समाधान सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करेंगे।

पर्रीकर ने कहा कि दक्षिण चीन सागर में मौजूदा हालात और हालिया घटनाक्रमों ने दिलचस्पी एवं चिंता दोनों पैदा की हैं। उन्होंने कहा-‘यह स्वाभाविक है क्योंकि 1982 के संयुक्त राष्ट्र सामुद्रिक कानून समझौते सहित अंतरराष्ट्रीय कानून के स्वीकार्य सिद्धांतों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में नौवहन की स्वतंत्रता, जलक्षेत्र से होकर गुजरने का अधिकार व इसके ऊपर से उड़ान भरने का अधिकार, निर्बाध वाणिज्य व संसाधनों तक पहुंच हम सबके लिए चिंता का विषय है।’ रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत उम्मीद करता है कि दक्षिण चीन सागर पर आचार संहिता को जल्द ही आम सहमति से निष्कर्ष तक ले जाया जाएगा।

पर्रीकर ने इस बात पर जोर दिया कि समुद्री सुरक्षा एक साझा चुनौती है। उन्होंने कहा कि हमारे क्षेत्र में सागर और महासागर हमारी समृद्धि के महत्त्वपूर्ण आधार हैं। चीन करीब पूरे दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा करता है जिसका वियतनाम, फिलीपीन, मलेशिया, बु्रनेई और ताइवान पुरजोर विरोध करते हैं। इन पांचों देशों को इस रुख पर अमेरिका का समर्थन प्राप्त है।

दक्षिणी चीन सागर को चीन और अमेरिका के बीच टकराव पिछले सप्ताह उस वक्त बढ़ गया जब अमेरिकी विध्वंसक यूएसएस लासेन विवादित क्षेत्र के कम से कम 12 समुद्री मील भीतर दाखिल हो गया

रक्षा मंत्री ने अपने अमेरिकी समकक्ष एश्टन कार्टर, जापानी समकक्ष जनरल जनरल नाकातानी व थाई रक्षा मंत्री जनरल प्रवित वोंगसुवान से मुलाकात की। पर्रीकर ने पूर्व सैन्यकर्मियों तथा सैन्य यौद्धाओं के कल्याण का प्रस्ताव दिया। बैठक के दौरान इस क्षेत्र में राष्ट्रीय अनुभवों का आदान-प्रदान किया गया।

पर्रीकर ने कहा कि आतंकवाद और कट्टरपंथ का खतरा चिंता का एक और विषय है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद की हरकत को किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता और हमें भर्तियों, वित्तपोषण व आतंकवादियों के लिए हथियारों पर अंकुश लगाने के लिए पूरी मजबूती के साथ काम करना होगा।

पर्रीकर ने कहा कि आसियान भारत की ‘ऐक्ट ईस्ट नीति’ की धुरी और एशियाई सदी के उसके सपने का केंद्र है। उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि भारत ने हिंद महासागर से लेकर प्रशांत महासागर तक के क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता बढ़ाने के लिए इस सम्मेलन में उपस्थित सभी देशों के साथ द्विपक्षीय और बहुपक्षीय ढंग से काम किया है।

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