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आतंकवादियों की सुरक्षा के लिए ‘गुप्त वीटो’ पर फूटा भारत का गुस्सा, कहा- जवाबदेही तय करे UN

भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध समिति में ‘गुप्त वीटो’ के इस्तेमाल की आलोचना करते हुए जवाबदेही की मांग की और कहा कि....

Author संयुक्त राष्ट्र | April 16, 2016 1:10 AM
UN Sanctions,Terrorists,Pakistan,China, United Nations,Terrorism,India,Jaish-e-Mohammad,Masood Azhar,China,Al Qaeda,Taliban,Syed Akbaruddin,Pakistanसंयुक्त राष्ट्र में ‘गुप्त’ वीटो के इस्तेमाल पर भारत नाराज

भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध समिति में ‘गुप्त वीटो’ के इस्तेमाल की आलोचना करते हुए जवाबदेही की मांग की और कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के सदस्यों को ‘कभी भी’ आतंकियों पर प्रतिबंध लगाने के अनुरोध स्वीकार ना करने का कारण नहीं बताया जाता।

गौरतलब है कि पिछले महीने चीन ने दोबारा संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध समिति में जैशे-मोहम्मद के प्रमुख और पठानकोट आतंकी हमले के मास्टरमाइंड मसूद अजहर को प्रतिबंधित करने की भारत की कोशिश को बाधित कर दिया था। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरूद्दीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अलकायदा और तालिबान से जुड़ी प्रतिबंध समितियों के कामकाज को लेकर अपनाई जाने वाली ‘गोपनीयता’ की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि सुरक्षा परिषद के 15 सदस्य आतंकियों को प्रतिबंधित करने के अनुरोधों पर कैसे फैसला लेते हैं, संयुक्त राष्ट्र महासभा के सदस्यों को इसे लेकर अंधेरे में रखा जाता है।

उन्होंने ‘आतंकी कृत्यों के अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा पर खतरे’ विषय पर एक खुली बहस के दौरान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से कहा, अलकायदा, तालिबान और आइएसआइएस से संबंधित प्रतिबंध समितियों की प्रक्रियाओं को लेकर सर्वसम्मति और गोपनीयता की समीक्षा की जरूरत है। इस समय इसका नतीजा जवाबदेही की कमी के रूप में सामने आता है।

अकबरूद्दीन ने कहा कि समिति के सभी 15 सदस्यों के पास वीटो है। उन्होंने चीन का नाम लिए बिना कहा कि इन 15 सदस्यों के अलावा किसी को भी यह नहीं बताया जाता कि वह कौन है जिसने विशिष्ट मामले में वीटो का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा, संयुक्त राष्ट्र महासभा को कभी भी औपचारिक रूप से नहीं बताया जाता है कि आतंकियों को प्रतिबंधित करने के अनुरोधों को क्यों और कैसे मंजूर नहीं किया जाता। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से काम करने वाले प्रतिबंध समिति जैसे आतंक विरोधी तंत्रों को विश्वास का निर्माण करना चाहिए नाकि ‘गोपनीय वीटो’ का इस्तेमाल कर दंड से मुक्ति का भाव पैदा करना चाहिए।

अकबरूद्दीन ने कहा कि प्रतिबंध समिति को आतंकवाद से मुकाबले के लिए सदस्य देशों के प्रतिबंधों के बाकी पेज 8 पर उङ्मल्ल३्र४ी ३ङ्म स्रँी 8 अनुरोध का बेहतर जवाब देने के लिए प्रत्यक्ष समर्थन का विकास करना चाहिए। उन्होंने कहा, उन्हें सूचीबद्ध लोगों और संस्थाओं द्वारा उल्लंघन की शिकायतोें पर भी आगे ध्यान देने की जरूरत है। अकबरूद्दीन ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई में वास्तविक सहयोग और समन्वय के लिए जरूरी मंच उपलब्ध कराने के लिए विशिष्ट रूप से उपयुक्त है। लेकिन आतंकवाद से निपटने में सुरक्षा परिषद अकेले पर्याप्त रूप से जवाब नहीं दे सकती।

उन्होंने कहा, इस सहयोग के लिए मानदंडों की स्थापना, नियम निर्माण और साथ ही आतंकवाद से मुकाबले के लिए व्यवहारिक और विशिष्ट तरीकों की जरूरत है। इस कारण से हमें लगता है कि चिह्नित खतरों का जवाब देने में सुरक्षा परिषद कितनी भी प्रभावशाली क्यों ना हो, अकेले आतंकवाद की वैश्विक समस्या का पर्याप्त जवाब नहीं दे सकती।

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