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आतंकवाद से निपटने के लिए रक्षा सहयोग पर सहमत भारत और घाना

घाना सरकार ने क्षमता निर्माण और मानव संसाधन विकास में भारत के योगदान के लिए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को धन्यवाद दिया।

अकरा | June 15, 2016 5:13 AM
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी (File Photo)

आतंकवाद को अभिशाप करार देते हुए भारत और घाना ने इससे मुकाबला करने के लिए व्यापक सुरक्षा और रक्षा सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। दोनों देशों की ओर से मंगलवार को जारी संयुक्त बयान में कहा गया है कि जहां एक तरफ भारत लंबे समय से सीमापार आतंकवाद से पीड़ित है, वहीं घाना बेहद अस्थिर क्षेत्र में स्थित है। इसमें कहा गया है, ‘अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद एक अभिशाप है और इससे पूरी सभ्य दुनिया को खतरा है। इसलिए दोनों पक्षों ने वृहद सुरक्षा व रक्षा सहयोग पर सहमति जताई है, साथ ही अकरा स्थित कोफी अन्नान संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षक केंद्र और नई दिल्ली स्थित संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षक केंद्र के बीच व्यापक आदान-प्रदान पर सहमत हुए हैं।’

घाना पश्चिमी अफ्रीका में स्थित है जो आइएसआइएस और बोको हरम के खतरों का सामना कर रहा है क्योंकि इन आतंकी संगठनों ने पड़ोसी देशों में उपस्थिति बनाई है। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपनी दो दिवसीय यात्रा का समापन करते हुए अपने समकक्ष जान महामना से मंगलवार को कई विषयों पर चर्चा की। तीन देशों की यात्रा के क्रम में वे यहां से आइवरी कोस्ट के लिए रवाना हुए। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की इस यात्रा को ‘अफ्रीका तक पहुंच’ बनाने की पहल के रूप में देखा जा रहा है। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की यात्रा के दौरान कई घोषणाएं की गर्इं जिससे घाना को क्षमता उन्नयन और मानव संसाधन विकास समेत आइसीटी में भारत-घाना कोफी अन्नान उत्कृष्टता केंद्र के लिए 10 लाख डॉलर की अनुदान सहायता देना शामिल है जिसकी स्थापना 28.6 लाख डॉलर के भारतीय सहयोग से की गई है। इसमें कहा गया है कि भारत ने आइटीईसी कोटे को 250 से बढ़ाकर 300 करने की घोषणा की और आइसीसीआर के तहत प्रति वर्ष पूर्णकालिक छात्रवृत्ति को 20 से बढ़ाकर 40 कर दिया गया है।

घाना सरकार ने क्षमता निर्माण और मानव संसाधन विकास में भारत के योगदान के लिए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को धन्यवाद दिया। इसमें कहा गया है, ‘घाना सरकार ने अनुदान और ऋण सुविधा के माध्यम से भारत के रियायती विकास सहायता की सराहना की है। विशेष तौर पर कोमेंडा चीनी संयंत्र और अलमीना मत्स्य संवर्द्धन संयंत्र जैसी सामाजिक-आर्थिक परियोजनाओं के लिए भारत के सहयोग के लिए आभार जताया है। संयुक्त बयान में दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों के बीच संबंधों को और मजबूत बनाने की पहल के तहत भारत सरकार ने विदेशी नीति प्रशिक्षण संस्थान स्थापित करने के लिए ऋण सुविधा को भी मंजूरी दी। पिछले पांच वर्षों में घाना से 1000 सरकारी अधिकारियों ने भारत में प्रशिक्षण हासिल किया है जबकि 100 छात्र पूर्ण छात्रवृत्ति के आधार पर भारत में पूर्णकालिक अकादमिक पाठ्यक्रम के तहत अध्ययन कर रहे हैं।

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