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CAA विरोधी प्रस्ताव पर यूरोपीय संसद में 30 जनवरी को वोटिंग नहीं! भारत ने फिर किया साफ- यह आंतरिक मसला

यूरोपियन संसद में सीएए पर चर्चा से पहले यूरोपीय संसद द्वारा ब्रेक्जिट विधेयक पर ऐतिहासिक मुहर लगाई जाएगी जिसके तहत ब्रिटेन शुक्रवार को औपचारिक रूप से ईयू से अलग हो जाएगा।

Author Updated: January 30, 2020 12:02 AM
यूरोपियन संसद पहुंचा सीएए-एनआरसी का मामला

भारत में नागरिकता विवाद के बीच Citizenship Amendment Act (CAA) विरोधी प्रस्ताव पर यूरोपीय संसद में गुरुवार को वोटिंग नहीं होगी। बुधवार को यह जानकारी सरकारी सूत्रों के हवाले से समाचार एजेंसी ANI ने दी। बताया गया कि भारत के मित्र देश यूरोपीय संसद में 29 जनवरी को पाकिस्तान का साथ देने वाले देशों के सामने मजबूत नजर आए। सूत्रों ने यह भी कहा कि सीएए भारत के लिए आंतरिक मसला है और यह देश में लोकतांत्रिक तरीके से लाया गया है। हमें उम्मीद है कि इस मामले में हमारे तमाम पहलुओं और उद्देश्यों को बिना किसी भेदभाव और तटस्थ तरीके से यूरोपीय संसद के सदस्य समझेंगे।

दरअसल, सीएए के खिलाफ यूरोपीय संसद के सदस्यों (एमईपी) द्वारा पेश पांच विभिन्न संकल्पों से संबंधित संयुक्त प्रस्ताव को बुधवार को ब्रसेल्स में होने वाले पूर्ण सत्र में चर्चा के अंतिम एजेंडे में सूचीबद्ध किया गया था। इस प्रस्ताव में पिछले महीने दिये गए संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त (यूएनएचसीआर) के बयान को संज्ञान में लिया गया, जिसमें सीएए को ‘बुनियादी रूप से भेदभाव की प्रकृति’ वाला कहा गया था।

इसमें संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ के उन दिशानिर्देशों को भी आधार बनाया गया, जिनमें भारत सरकार से संशोधनों को निरस्त करने की मांग की गई। बुधवार को संसद में सीएए पर चर्चा से पहले यूरोपीय संसद द्वारा ब्रेक्जिट विधेयक पर ऐतिहासिक मुहर लगाने की उम्मीद थी।

भारत सरकार ने इससे पहले भी कहा था कि पिछले महीने संसद द्वारा पारित नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) देश का आंतरिक मामला है और इसका उद्देश्य पड़ोसी देशों में उत्पीड़न का शिकार अल्पसंख्यकों को संरक्षण प्रदान करना है। भारत ने ईयू के कदम की कड़ी निंदा की थी।

इसी बीच, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को यूरोपीय संसद अध्यक्ष डेविड मारिया सासोली को उक्त प्रस्तावों के संदर्भ में पत्र लिखकर कहा कि एक देश की संसद द्वारा दूसरी संसद के लिए फैसला देना अनुचित है और निहित स्वार्थों के लिए इनका दुरुपयोग हो सकता है।

बिरला ने पत्र में लिखा, ‘‘अंतर संसदीय संघ के सदस्य के नाते हमें दूसरे देशों, विशेष रूप से लोकतांत्रिक देशों की संसद की संप्रभु प्रक्रियाओं का सम्मान रखना चाहिए।’’ यूरोपीय संसद के प्रस्ताव में मुसलमानों को संरक्षण प्रदान नहीं किये जाने की ंिनदा की गयी है। इसमें यह भी कहा गया है कि भूटान, बर्मा, नेपाल और श्रीलंका से भारत की सीमा लगी होने के बाद भी सीएए के दायरे में श्रीलंकाई तमिल नहीं आते जो भारत में सबसे बड़ा शरणार्थी समूह है और 30 साल से अधिक समय से रह रहे हैं।

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