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ईशनिंदा मामले में मौत की सजा पा चुके शख्श को पाकिस्तान कोर्ट ने किया बरी, खुद को खुदा बताने का था आरोप

मुहम्मद इशाक पर शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि ये खुद को भगवान बताता है जिसके बाद पाकिस्तानी कोर्ट ने 2013 में इसे मौत की सजा सुना दी।

सांकेतिक फोटो

पाकिस्तानी कोर्ट ने ईशनिंदा मामले में मौत की सजा पा चुके मुहम्मद इशाक नाम के व्यक्ति को पिछले सप्ताह बरी कर दिया। इस पर खुद को खुदा बताने का आरोप था इन आरोपो के बाद पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से पुलिस ने इसे गिरफ्तार कर लिया। कुछ महीनों तक चली कोर्ट कारवाई के बाद पाकिस्तानी कोर्ट ने 2013 में इसे मौत की सजा सुना दी। गिरफ्तार होने के बाद कोर्ट में दोबारा अपील की गई जिसके बाद पिछले सप्ताह कोर्ट ने उसे सारे आरोपों से मुक्त कर दिया। इशाक के वकील महमूद अख्तर ने पत्रकारों को बताया कि कागजी कारवाई के बाद मुहम्मद इशाक जेल से बाहर आ सकेंगे।

वकील महमूद अख्तर ने बताया कि कोर्ट में मुहम्मद इशाक के खिलाफ लगाए गए सारे आरोप झूठे साबित हुए हैं। मुहम्मद इशाक इस पूरे मामले में निर्दोष साबित हुए हैं। जल्द ही वो जेल से बाहर होंगे।

बता दें पाकिस्तान में blasphemy laws पूर्व सैन्य शासक जिया उल हक के दौर में बने थे । 1980 के दशक में बने इस कानून का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान में चरमपंथियों को निशाना बनाना था। पाकिस्तान में इस कानून का शरारती तत्वों ने कई बार दुरुपयोग किया है।इसी कानून के तहत मुहम्मद इशाक को ये सजा सुनाई गई थी पाकिस्तान में कई सामाजिक संगठनों ने इस कानून का कई बार विरोध किया और इस सुधार के लिए कई भी अभियान चलाए। लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के पूर्व गवर्नर सलमान तासीर 2011 में इस कानून को काला कानून’ कहा और इसमें सुधार की बात कही। लेकिन उन्हें एक पुलिस गार्ड ने गोली मार थी उनकी मौत को उनके इसी बयान से जोड़कर देखा गया। पाकिस्तान के कई कानूनों के खिलाफ पाकिस्तान के अंदर ही बार आवाज उठती रही है।

पाकिस्तानी तानाशाह जिया उल हक ने अस्सी के दशक की शुरुआत में अमेरिका ने अफगानिस्तान में सोवियत सेना को मात देने के लिए अफगानिस्तान में जेहाद का प्रोजेक्ट शुरू किया था जिसके कारण पाकिस्तान में जेहाद की जड़ें जमती चली गई। पाकिस्तान में कट्टरवाद को बढ़ावा मिला। कहा जाता है कि ये तानाशाह चरमपंथी संगठनों को शह देते थे। इस तरह के तबकों को खुश करने के लिए अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव वाले ऐसे कई कानून बनाए गए।

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