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लड़के ने नहीं की दोस्ती तो तेजाब से चेहरा जलाया, लड़की और मां गिरफ्तार

तेजाब हमले की आरोपी किशोरी महीनों से पीड़ित का पीछा कर रही थी। महमुदुल हसन कई बार उसके दोस्‍ती के प्रस्‍तावों को ठुकरा चुका था। एक रात दोनों के बीच बहस हो गई थी, जिसके बाद किशोरी ने उसके चेहरे पर तेजाब उड़ेल दिया था।
दोस्‍ती का प्रस्‍ताव स्‍वीकार न करने पर किशोरी ने फेंका तेजाब। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

बांग्‍लादेश में एक अजीबोगरीब घटना सामने आई है। आमतौर पर लड़कियों द्वारा प्रेम या दोस्‍ती का प्रस्‍ताव ठुकराने पर लड़के हिंसक हो जाते हैं। लेकिन, बांग्‍लादेश की राजधानी ढाका में इसके उलट मामला सामने आया है। एक किशोर ने किशोरी के दोस्‍ती के अनुरोध को ठुकरा दिया था। इससे नाराज आरोपी युवती ने लड़के के चेहरे पर तेजाब उड़ेल दिया। इस घटना में घायल पीड़ि‍त फिलहाल अस्‍पताल में अपना इलाज करा रहा है। घायल की पहचान महमुदुल हसन मारुफ (17) के तौर पर की गई है। तेजाब हमले से उसका चेहरा झुलस गया है। पुलिस ने आरोपी (16 वर्षीय किशोरी) और उसकी मां को गिरफ्तार कर लिया है। महमुदुल की मां ने इस खौफनाक घटना के बारे में जानकारी दी। चेहरे के अलावा कंधा भी झुलस गया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, महमुदुल रात में अपने दोस्‍तों के साथ मौज-मस्‍ती के बाद घर लौट रहा था जब आरोपी लड़की से उसका आमना-सामना हुआ था। महमुदुल के कई बार इनकार करने के बावजूद वह महीनों से उसका पीछा कर रही थी। उस रात गरमा-गरमी के बाद युवती ने उसके चेहरे पर तेजाब फेंक दिया था। ढाका पुलिस ने घटना के एक दिन बाद युवती को मां के साथ गिरफ्तार कर लिया था। डॉक्‍टरों ने बताया कि चेहरे पर गहरा जख्‍म होने के कारण किशोर अपनी जिंदगी को लेकर बहुत चिंतित है। महमुदुल के चेहरे की स्किन को गहरा नुकसान पहुंचा है, जिसे पूरी तरह से ठीक होने में लंबा वक्‍त लग सकता है।

बता दें कि बांग्‍लादेश में तेजाब हमले की घटनाएं बहुत ज्‍यादा होती हैं। खासकर 1990 के दशक के बाद से इस तरह के हमलों में काफी वृद्धि देखी गई है। सालाना 500 से ज्‍यादा इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं। तेजाब हमले के घायलों की मदद के लिए बांग्‍लादेश में वर्ष 1999 में एसिड सर्वाइवर फाउंडेशन नामक संगठन की स्‍थापना की गई थी। यह संस्‍था ऐसे हमलों में घायलों की मदद करता है। संगठन के कार्यकर्ताओं का कहना है कि कई हमलों में तो लोगों के चेहरे बुरी तरह से क्षतिग्रस्‍त हो जाते हैं, जबकि कुछ मामलों में तो पीड़ि‍तों के आंखों की रोशनी तक चली जाती है। इस तरह के हमलों को आमतौर पर व्‍यक्तिगत रंजिश के कारण अंजाम दिया जाता है।

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