इजरायल-ईरान युद्ध का आज 12वां दिन है। दोनों देशों की ओर से हमले जारी है। इसी बीच एक अहम घटनाक्रम में भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में एक प्रस्ताव का सह-समर्थन किया। इस प्रस्ताव में ईरान द्वारा गल्फ कॉपरेशन काउसिल (खाड़ी सहयोग परिषद) (GCC) के देशों और जॉर्डन पर किए गए “बेहद निंदनीय” हमलों की कड़ी निंदा की गई। साथ ही तेहरान (ईरान की राजधानी) से सभी हमले तुरंत रोकने की मांग की गई, और होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की उसकी धमकियों को भी खारिज किया गया।

135 अन्य देशों के साथ मिलकर किया सह-समर्थन

15 देशों वाली UNSC, जिसकी अध्यक्षता अभी संयुक्त राज्य अमेरिका कर रहा है, ने बुधवार को इस प्रस्ताव को पारित किया। प्रस्ताव के पक्ष में 13 वोट पड़े, विरोध में कोई वोट नहीं पड़ा। वीटो का अधिकार रखने वाले स्थायी सदस्य चीन और रूस ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। भारत ने बहरीन (पश्चिम एशिया) के नेतृत्व वाले इस प्रस्ताव का सह-समर्थन 135 अन्य देशों के साथ मिलकर किया।

इन देशों में ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, बांग्लादेश, भूटान, कनाडा, मिस्र, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, इटली, जापान, कुवैत, मलेशिया, मालदीव, म्यांमार, न्यूजीलैंड, नॉर्वे, ओमान, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, सिंगापुर, स्पेन, यूक्रेन, संयुक्त अरब अमीरात, यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका, यमन और जाम्बिया शामिल हैं।

इस प्रस्ताव में बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन की क्षेत्रीय अखंडता, संप्रभुता और राजनीतिक स्वतंत्रता के प्रति अपने दृढ़ समर्थन को दोहराया गया। इसमें GCC देशों और जॉर्डन पर ईरान द्वारा किए गए हमलों की कड़ी शब्दों में निंदा की गई, और यह माना गया कि ऐसी हरकतें अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हैं और अंतरराष्ट्रीय शांति व सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा हैं।

कार्रवाई या धमकियों से बाज आए ईरान

प्रस्ताव में ईरान से GCC देशों और जॉर्डन पर किए जा रहे सभी हमले तुरंत रोकने की मांग की गई। साथ ही, यह भी मांग की गई कि तेहरान “तुरंत और बिना किसी शर्त के” पड़ोसी देशों के खिलाफ किसी भी तरह की उकसावे वाली कार्रवाई या धमकियों से बाज आए, जिसमें प्रॉक्सी ताकतों का इस्तेमाल भी शामिल है।

इसमें इस बात की फिर से पुष्टि की गई कि अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार, व्यापारिक और कॉमर्शियल जहाजों के नेविगेशनल अधिकारों और स्वतंत्रताओं का सम्मान किया जाना चाहिए, विशेष रूप से महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों के आसपास। साथ ही, इसमें सदस्य देशों के उस अधिकार का भी संज्ञान लिया गया, जो अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत उन्हें “अपने जहाजों को हमलों और उकसावे वाली कार्रवाइयों से बचाने” का अधिकार देता है—विशेषकर उन स्थितियों में जब नेविगेशनल अधिकारों और स्वतंत्रताओं को कमजोर करने की कोशिश की जा रही हो।

प्रस्ताव में ईरान द्वारा की गई किसी भी ऐसी कार्रवाई या धमकी की निंदा की गई, जिसका उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते होने वाले अंतरराष्ट्रीय नेविगेशन को बंद करना, उसमें बाधा डालना, या किसी अन्य तरीके से उसमें हस्तक्षेप करना हो; साथ ही बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा को खतरे में डालना हो।

आम नागरिकों की मौत पर शोक व्यक्त किया

प्रस्ताव में इस बात की भी कड़ी निंदा की गई कि रिहायशी इलाकों पर हमले किए गए और नागरिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। इन हमलों के परिणामस्वरूप आम नागरिकों की जान गई और नागरिक इमारतों को नुकसान पहुंचा। प्रस्ताव के माध्यम से इन देशों और वहां के लोगों के प्रति एकजुटता व्यक्त की गई। इसने ईरान से अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार, किसी भी कार्रवाई या धमकी से तुरंत बाज आने का आह्वान किया। इसने ईरान से अंतर्राष्ट्रीय कानून—जिसमें अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून भी शामिल है—के तहत अपने दायित्वों का पूरी तरह से पालन करने का आह्वान किया; विशेष रूप से सशस्त्र संघर्ष के दौरान नागरिकों और नागरिक संपत्तियों की सुरक्षा के संबंध में।

दूसरी ओर, इस बैठक में रूस का एक प्रस्ताव पारित होने के लिए आवश्यक नौ वोट हासिल करने में विफल रहा। इस एक-पृष्ठ के दस्तावेज में ईरान, इजरायल, अमेरिका या खाड़ी देशों—जो सभी इस संघर्ष में शामिल हैं—का कोई जिक्र नहीं था; बल्कि इसमें केवल सैन्य गतिविधियों को रोकने का आग्रह किया गया था।

यह भी पढ़ें : युद्ध शुरू होने के बाद खाड़ी में कितने जहाजों को निशाना बनाया जा चुका है, TIMELINE

अमेरिका और इजरायल के ईरान से युद्ध की शुरुआत के बाद से ही होर्मुज स्ट्रेट में मालवाहक विमानों को निशाना बनाया जा रहा है। यह इसलिए भी चिंता का विषय है क्योंकि इसी रास्ते से दुनिया के 20% तेल और LNG का व्यापार होता है। ईरान युद्ध की शुरुआत से ही यह चेतावनी दे रहा है कि वो होर्मुज स्ट्रेट से किसी भी जहाज को गुजरने नहीं देगा। पूरी खबर पढ़ें…