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आर्थिक मंदी पर IMF चीफ का बड़ा बयान- भारत पर साफ दिख रहा असर, 0.8% घटाया इकनॉमिक ग्रोथ रेट

अक्टूबर में आईएमएफ चीफ का पदभार संभालने वाली जॉर्जीवा ने कहा कि भारत और ब्राजील जैसे देशों पर सुस्त वैश्विक अर्थव्यस्था का असर साफ दिख रहा है। उन्होंने ग्लोबल ट्रेड वॉर को सुस्ती की अहम वजह करार दिया। उन्होंने चीन और अमेरिका के बीच जारी ट्रेड वॉर को बताया।

Author Updated: October 9, 2019 4:39 PM
आईएमएफ की नई चीफ क्रिस्टलीना जॉर्जीवा और पीएम मोदी। (फाइल फोटो) सोर्स: Twitter/Kristalina Georgieva

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने कहा है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में है। उन्होंने मौजूदा मंदी की स्थिति को सिंक्रोनाइज्ड यानी एक दूसरे से जुड़ा स्लोडाउन करार दिया है। इसके साथ ही आईएमएफ की नई चीफ क्रिस्टलीना जॉर्जीवा ने कहा है कि इसका असर भारत पर ज्यादा है। उन्होंने कहा कि 90 प्रतिशत वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में आ चुकी है।

उन्होंने कहा कि कुछ सबसे बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल भारत और ब्राजील जैसे देशों में इसका असर “अधिक स्पष्ट” है। उन्होंने चेतावनी दी कि इन सबका असर इस साल विकास दर पर पड़ेगा। अक्टूबर में आईएमएफ चीफ का पदभार संभालने वाली जॉर्जीवा ने कहा कि भारत और ब्राजील जैसे देशों पर सुस्त वैश्विक अर्थव्यस्था का असर साफ दिख रहा है। उन्होंने ग्लोबल ट्रेड वॉर को सुस्ती की अहम वजह करार दिया। उन्होंने चीन और अमेरिका के बीच जारी ट्रेड वॉर को बताया।

उन्होंने कहा कि इस हफ्ते आईएमएफ का लेटेस्ट फोरकास्ट रिलीज किया जाएगा जिसमें वृद्धि इस दशक के सबसे निचले स्तर पर हो सकती है। ट्रेड वॉर से किसी को कुछ हासिल नहीं होता बल्कि सभी का नुकसान होता है। इसकी चपेट में भारत जैसी उभरती अर्थव्यस्था आती है जिसका असर लॉन्ग टर्म के लिए होता है।’

आईएमएफ चीफ ने कहा ‘ट्रेड वॉर से आने वाले समय में 700 बिलियन डॉलर का नुकसान होगा जो कि वैश्विक जीडीपी का 0.8 फीसदी है। जो कि स्विटजरलैंड की कुल अर्थव्यवस्था के बराबर है। जियॉर्जिएवा ने कहा कि अमेरिका और जर्मनी में बेरोजगारी की दर ऐतिहासिक निचले स्तर पर है। इसके बाद भी अमेरिका और जापान समेत यूरोप की विकसित अर्थव्यवस्थाओं में आर्थिक गतिविधियों में नरमी देखने को मिल रही है।’

बता दें कि विश्व बैंक और आईएमएफ की सालाना बैठक से पहले क्रिस्टलीना जॉर्जीवा का यह बयान काफी अहम माना जा रहा है। भारत में सुस्त व्यवस्था का असफ साफ देखा जा सकता है। लोगों को नौकरियों से निकाला जा रहा है। मोदी सरकार अर्थव्यवस्था में जान डालने के लिए कॉर्पोरेट टैक्स कटौती, लोन मेला और बैंकों का विलय कर चुकी है।

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