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‘पेरिस जलवायु समझौते से कदम वापस खींचना सबको नुकसान पहुंचा सकता है’

पिछले सप्ताह राष्ट्रपति का पदभार संभालने वाले डोनाल्ड ट्रंप ने जलवायु परिवर्तन पर संदेह जताया था।

Author संयुक्त राष्ट्र | January 25, 2017 4:52 PM
पेरिस जलवायु समझौता पूर्व औद्योगिक काल के स्तरों की तुलना में ग्लोबल वॉर्मिंग को दो डिग्री सेल्सियस से कम और संभव हो तो डेढ़ डिग्री सेल्सियस पर रखने का आह्वान करता है। (Michel Euler/AP/File)

महत्वाकांक्षी पेरिस जलवायु समझौते से ट्रंप प्रशासन के पीछे हटने की आशंका के बीच भारत का कहना है कि इस ऐतिहासिक समझौते के क्रियान्वयन की प्रतिबद्धताओं से कदम वापस खींचना ‘सभी के लिए हानिकारक’ हो सकता है। सतत विकास एजेंडा, 2030 और सतत शांति के बीच सहयोग पर मंगलवार (24 जनवरी) को यहां हुई उच्च स्तरीय वार्ता में विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सुजाता मेहता ने कहा कि सतत विकास का एजेंडा और पेरिस समझौता समिति जिम्मेदारी और जरूरतमंद लोगों को सहायता पहुंचाने की आवश्यकता को समझता है। हालांकि उन्होंने चिंता जताई कि ऐतिहासिक समझौते के क्रियान्वयन के बाद होने वाली प्रगति उतनी उत्साहजनक नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘इन दो ऐतिहासिक समझौतों के क्रियान्वयन संबंधी दायित्वों से परंपरागत सहयोगियों के पीछे हटने के संकेत दुर्भाग्यपूर्ण हैं। ये समझौते वास्तव में मानवीय समाजों को बदलकर रख सकते हैं और हम सब की बेहतरी के लिए हैं। लेकिन इनसे कदम वापस लेना ऐसा संभावनाओं पर सवाल खड़े कर देता है। प्रतिबद्धताओंं से पीछे हटना हम सभी को नुकसान पहुंचा सकता है।’

पिछले सप्ताह राष्ट्रपति का पदभार संभालने वाले डोनाल्ड ट्रंप ने जलवायु परिवर्तन पर संदेह जताया था जिसके बाद यह अंदेशा जताया जाने लगा था कि अमेरिका जलवायु परिवर्तन से निबटने वाले पेरिस समझौते से कदम खींच सकता है। संयुक्त राष्ट्र के नए महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने पिछले सप्ताह दावोस में विश्व आर्थिक मंच पर ट्रंप के अप्रत्यक्ष संदर्भ में कहा था कि पेरिस जलवायु समझौते पर ‘कुछ सरकारों की ओर से कम सहयोग की संभावना’ से बचने के लिए व्यवसाय ‘सबसे अच्छा साथी’ साबित हो सकता है।

विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सुजाता मेहता ने कहा कि वैश्विक विकास के दीर्घकालिक प्रयासों में सहयोग और क्षमता निर्माण में विकासशील देशों और संयुक्त राष्ट्र को मदद देने के अलावा सतत विकास और जलवायु परिवर्तन पर महत्वकांक्षी एजेंडा को लागू करने की दिशा मेंं भारत पुरजोर तरीके से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि शांति और सुरक्षा अब साझा तथा अभाज्य अवधारणा हैं जो दीर्घकालिक निष्पक्ष सतत विकास पर निर्भर करते हैं।

मेहता ने कहा, ‘इसके लिए, सतत विकास के लक्ष्यों को लागू करने की खातिर राष्ट्रों की सरकारों में वैश्विक साझेदारी की वास्तविक भावना के साथ-साथ ठोस प्रतिबद्धता की जरूरत है।’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गुटेरेस ने बढ़ती असमानता, लंबे समय से चले आ रहे संघर्षों और जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों के बीच सतत विकास और सतत शांति के संबंध के महत्व को पहचानने की जरूरत पर जोर दिया।उन्होंने कहा, ‘‘संघर्ष को जड़ से खत्म करने और शांति, सतत विकास तथा मानवाधिकारों को अखंड रूप में स्थापित करने के लिए वैश्विक प्रतिक्रिया की जरूरत है।’’

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