Bangladesh Election 2026: बांग्लादेश में आज आम चुनाव के लिए 299 सीटों पर वोटिंग हो रही है। इस बीच प्रसिद्ध लेखिका तसलीमा नसरीन ने वहां की राजनीतिक स्थिति पर गहरी चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि अगर जमात-ए-इस्लामी सत्ता में आ जाती है, तो लोकतंत्र का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा। धर्मतंत्र हावी हो जाएगा और सब कुछ नष्ट कर देगा। अल्पसंख्यकों को उत्पीड़न का सामना करना पड़ेगा और उन्हें देश छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में तस्लीमा नसरीन ने कहा, “महिलाओं को बुर्का और नकाब के अंधेरे में धकेल दिया जाएगा और देश के अफगानिस्तान में तब्दील होने का खतरा होगा। हालांकि, मुझे उम्मीद है कि जिस तरह जमात-ए-इस्लामी अतीत में कभी चुनाव नहीं जीत पाई है, वह इस बार भी नहीं जीतेगी। हालांकि जमात-ए-इस्लामी को अवामी लीग के चुनाव बहिष्कार से फायदा हुआ है, मुझे उम्मीद है कि अंततः 1971 के मुक्ति युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना के ये सहयोगी, भारत विरोधी और पाकिस्तान समर्थित चरमपंथी ताकतें चुनाव जीतने में सफल नहीं होंगी।”
बीएनपी को चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा- तस्लीमा नसरीन
तस्लीमा नसरीन ने कहा, “अगर बीएनपी सत्ता में आती है, तो उसे गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। हर हाल में उसे लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, महिलाओं की समानता, मानवाधिकार, सभी के लिए शिक्षा और सभी के लिए स्वास्थ्य सेवा की रक्षा करनी होगी। सरकार को आर्थिक विकास की दिशा में काम करना होगा और अमीर-गरीब के बीच की खाई को पाटना होगा। अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी। अगर बीएनपी सरकार इन मुद्दों पर प्रभावी ढंग से काम कर पाती है, तो उसे जनता का विश्वास और लोकप्रियता हासिल होगी।”
जमात-ए- इस्लामी कट्टरपंथी इस्लामी दल- तस्लीमा नसरीन
लेखिका तस्लीमा नसरीन ने आगे कहा, “कई लोगों का मानना है कि बीएनपी चुनाव जीतेगी और सरकार बनाएगी। तब जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश के इतिहास में पहली बार मुख्य विपक्षी दल बनेगी। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि यह एक कट्टरपंथी इस्लामी दल है जो लोकतंत्र विरोधी, महिला विरोधी, गैर-मुस्लिम विरोधी, धर्मनिरपेक्ष विरोधी और सांप्रदायिक सद्भाव का विरोधी है। इस दल में कई उग्रवादी और जिहादी शामिल हैं और इस बात का वास्तविक खतरा है कि यह चुनी हुई सरकार के खिलाफ हिंसा या आतंकवाद का सहारा ले सकता है। दूसरी ओर, अवामी लीग सरकार के खिलाफ साजिश रचकर अराजकता पैदा कर सकती है, ताकि यह साबित किया जा सके कि अवामी लीग के बिना स्थिर शासन असंभव है। इस अस्थिरता का फायदा उठाकर वह राजनीति में वापसी करने की कोशिश कर सकती है। अवामी लीग को राजनीति में वापसी करने और चुनाव में भाग लेने का पूरा अधिकार होना चाहिए।”
तस्लीमा नसरीन ने कहा कि कुछ वोटिंग सेटरों पर गड़बड़ी की खबरे सामने आई हैं। उन्होंने कहा, “दोनों पार्टियों के समर्थकों के बीच झड़पें हुईं, लेकिन मैंने सुना है कि मतदान काफी हद तक शांतिपूर्ण रहा। आरोप है कि कल शाम से ही जमात-ए-इस्लामी के कार्यकर्ताओं ने कुछ मतदान केंद्रों पर खुद ही वोट डाले। एक जमात नेता को 74 लाख टका नकद के साथ पकड़ा गया। जमात कार्यकर्ताओं पर पैसे बांटकर वोट खरीदने और यह दावा करके प्रचार करने का आरोप है कि तराजू के चिन्ह पर वोट देने से जन्नत का टिकट मिलेगा, यहां तक कि उन्होंने यह भी कहा कि अल्लाह ने लोगों को जमात-ए-इस्लामी को वोट देने का निर्देश दिया है।” बांग्लादेश चुनाव से जुड़ी तमाम बड़ी अपडेट्स के लिए पढ़ें लाइव ब्लॉग
