ईरान और अमेरिका-इजरायल के युद्ध के कारण 4 मार्च से होमुर्ज जलमार्ग बंद है, इस कारण दुनिया तेल और गैस की कमी का सामना कर रही है। इसका असर वैश्विक शेयर बाजारों पर साफ तौर पर दिखाई दे रहा है।
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर फतेह बिरोल ने दुनिया को चेताया है कि यह संकट आने वाले महीनों में और भी अधिक गंभीर हो सकता है। यह संकट ईरान संघर्ष से जुड़ी दिक्कतों और दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक से तेल के आवाजाही में कमी के कारण पैदा हुआ है
अगस्त तक रेड जोन में कर सकता है प्रवेश
द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार को फतेह बिरोल ने चेतावनी दी कि मिडिल ईस्ट से ताजे तेल निर्यात की कमी के बीच गर्मियों के यात्रा सीजन से पहले, जुलाई-अगस्त तक वैश्विक तेल बाजार रेड जोन में प्रवेश कर सकता है।
लंदन के थिंक टैंक चैथम हाउस में बोलते हुए, फतेह बिरोल ने इस बात पर जोर दिया कि एकमात्र समाधान होर्मुज जलमार्ग को पूरी तरह और बिना किसी शर्त के फिर से खोलना है। उन्होंने कहा कि आईईए के सदस्य देश और अधिक रणनीतिक तेल भंडार जारी करने के लिए तैयार हैं, जैसा कि उन्होंने मार्च में किया था। उन्होंने यह भी कहा कि आईईए आगे की कार्रवाई में समन्वय स्थापित करने के लिए भी तैयार है।
मिडिल ईस्ट में स्थिति सुधरने में लगेंगे एक साल
फतेह बिरोल ने कहा कि गर्मियों में यात्रा और औद्योगिक गतिविधियां चरम पर पहुंच जाती है, ऐसे में तेल ही मांग भी लगातार बढ़ रही है, ऐसे में वैश्विक तेल भंडार कम हो रहा है। द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने चेतावनी दी कि तनाव कम होने पर भी मिडिल ईस्ट में उत्पादन और रिफाइनिंग क्षमता बहाल करने में कई महीने या एक साल तक का समय लग सकता है।
आईईए चीफ ने कही कि इस परेशानी के कारण फिलहाल बाजार से हर दिन करीब 14 मिलियन बैरल तेल कम पड़ रहा है। उन्होंने इस संकट को 1973 और 1979 के तेल संकटों और यूक्रेन पर रूस के आक्रमण से शुरू हुए 2022 के ऊर्जा संकट से भी अधिक गंभीर बताया।
चरमपंथी दल उठा सकते हैं फायदा
उन्होंने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में भू-राजनीति की इतनी गहरी और लंबी बाधा पहले कभी नहीं देखी। फतेह बिरोल ने चेतावनी दी कि यूरोप में चरमपंथी दल बढ़ती महंगाई का फायदा उठाकर यह दावा कर सकते हैं कि मौजूदा राजनीतिक व्यवस्थाएं विफल हो गई हैं- भले ही तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तय होती हों।
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि इराक जैसे देश तेल से होने वाली कमाई पर काफी अधिक निर्भर है, ऐसे में उन्हें इस संकट के कारण हुए वित्तीय नुकसान की वजह से ऊर्जा उत्पादन में दोबारा निवेश करने में मुश्किल हो सकती है। फतेह ने कहा कि उन्हें कम से कम एक साल तक तेल उत्पादन के पूरी तरह ठीक होने की कोई संभावना नजर नहीं आ रही है, और इसमें यूएई भी शामिल हैं।
ईंधन विकल्प की तलाश में भारत
इस बीच, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिडिल ईस्ट में जारी उथल-पुथल के बीच कई सरकारी विभागों से वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की तलाश करने को कहा है। प्रधानमंत्री ने आयातित पेट्रोलियम उत्पादों और जीवाश्म ईंधनों पर भारत की निर्भरता कम करने की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रयासों को तेज करने की बात कही।
केंद्र सरकार इस ऊर्जा संकट के बीच वैकल्पिक फ्यूल और एनर्जी विकल्पों की समीक्षा कर रही है, इसमें सोलर एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन, न्यूक्लियर एनर्जी, इथेनॉल मिश्रण और घरेली ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देना शामिल है।
पीएम मोदी ने विभागों को यह भी निर्देश दिया कि वे फिजूल फ्यूल और एनर्जी की खपत को कम करने के तरीके पहचानें। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में लंबे समय से चल रहा संघर्ष महंगाई, व्यापार मार्गों, फ्यूल की आपूर्ति और विदेश मुद्रा भंडार को प्रभावित कर सकता है। प्रधानमंत्री ने राज्य सरकारों और नागरिकों से इस संकट के प्रभावों के लिए तैयार रहने का आग्रह किया।
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ईरान ने अमेरिका को युद्ध में करारी चोट पहुंचाई है। ईरान ने फरवरी में संघर्ष शुरू होने के बाद से अमेरिका को करीब एक अरब डॉलर की कीमत के एमक्यू 9 रीपर ड्रोन को नष्ट कर दिया है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि युद्ध के दौरान अमेरिका के करीबन 20 प्रतिशत रीपर ड्रोन को बर्बाद हो गए है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
