प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री लक्सन ने 2030 तक वस्तुओं और सेवाओं के द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करके 35,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने की दिशा में काम करने पर सहमति जताई है। उन्होंने दोनों देशों के संबंधों में एक मील का पत्थर बताया। उन्होंने कम समय में समझौते को अंतिम रूप देने के लिए न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन का आभार जताया। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन की मौजूदगी में भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान हुआ।
पीएम मोदी ने कहा कि ऑकलैंड आप सबके बीच में आकर मुझे बहुत प्रसन्नता हो रही है मैं प्रधानमंत्री लक्सन और उनके सकारात्मक विचारों और भारत के प्रति उनके गहरी प्रतिबद्धता के लिए विशेष आभार व्यक्त करता हूं। आप सभी की उपस्थिति न्यूजीलैंड की नवाचार, उद्यम और भविष्य-उन्मुख सोच का प्रतीक है। भारत की ओर से मैं 140 करोड़ लोगों की आकांक्षा और महत्वाकांक्षा का संदेश लेकर आया हूं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ऑकलैंड में गवर्नमेंट हाउस में औपचारिक स्वागत के दौरान ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मेरे लिए खुशी की बात है कि 40 साल के बाद भारत के प्रधानमंत्री का न्यूज़ीलैंड आना हुआ है। आपने एक प्रकार से आपकी आर्थिक राजधानी में यह कार्यक्रम करके भारत और न्यूज़ीलैंड के संबंधों को एक नई ताकत देने का एक अवसर पैदा किया है। मैं इसके लिए आपका बहुत आभारी हूं।
पीएम मोदी ने कहा कि न्यूज़ीलैंड के लोगों के बीच आकर उनका भारत के प्रति जो स्नेह है, यह देखकर कोई भी व्यक्ति बहुत ही भावुक हो जाता है। यह हमारे संबंधों में एक ऐतिहासिक पड़ाव है, जो हमारे संबंधों की नई ऊर्जा, हमारी मित्रता के नए संकल्प को दोहराने वाला है। मुझे खुशी है कि आज हम अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के सूत्र में बांधने जा रहे हैं। यह मील का पत्थर हमें और अधिक ऊर्जा और अधिक विश्वास के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा। मुझे विश्वास है कि मेरी इस यात्रा से हम हमारे द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूती देंगे और वैश्विक शांति, स्थिरता और सुरक्षा में हम मिलकर अपना योगदान बढ़ाएंगे।
न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने कहा कि आज यहां आपकी मेजबानी करना खुशी और सम्मान की बात है। यह वास्तव में एक ऐतिहासिक घटना है, जिसके बारे में आपने और मैंने कल रात बात की थी, यह 40 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की न्यूजीलैंड की पहली यात्रा है। यह यात्रा न्यूजीलैंड-भारत संबंधों में भी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। जब मैंने पिछले साल भारत का दौरा किया था, तो आपने मेरा और मेरे प्रतिनिधिमंडल का बहुत गर्मजोशी और जबरदस्त उदारता के साथ स्वागत किया था और इसलिए मैं यहां आपका स्वागत करते हुए प्रसन्न हूं…मुझे लगता है कि हमने व्यापार एजेंडे पर बहुत कम समय में जबरदस्त प्रगति की है।
बता दें, मोदी अपने तीन देशों के दौरे के अंतिम चरण में ऑकलैंड पहुंचे हैं। 40 सालों में यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली न्यूजीलैंड यात्रा है। जिसे दोनों देशों के लिए ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण माना जा रहा।
हाल ही में भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर होने के बाद मोदी की यह यात्रा एक महत्वपूर्ण समय पर हो रही है। लक्सन की भारत यात्रा के दौरान दोनों पक्षों ने मार्च 2025 में वार्ता शुरू करने का निर्णय लिया था और इस वर्ष अप्रैल में एफटीए वार्ता को रिकॉर्ड 13 महीनों में पूरा करते हुए समझौते पर हस्ताक्षर किए।
न्यूजीलैंड के साथ द्विपक्षीय व्यापार वर्तमान में 2.25 अरब अमेरिकी डॉलर का है। अधिकारियों का कहना है कि मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) और लगभग शुल्क-मुक्त व्यापारिक वातावरण के चलते व्यापार में तीव्र वृद्धि की प्रबल संभावना है। दोनों देशों का लक्ष्य 2030 तक वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार को दोगुना करना है, और एफटीए के तहत अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश का प्रावधान मजबूत आर्थिक साझेदारी को बढ़ावा देगा।
इस यात्रा की रणनीतिक और भू-राजनीतिक पृष्ठभूमि न्यूजीलैंड की अपनी आर्थिक साझेदारियों में विविधता लाने की इच्छा है, क्योंकि यह एक ही बाजार पर अत्यधिक निर्भर है। एक ऐसा क्षेत्र जिसे भारत भरने की उम्मीद कर रहा है। प्रौद्योगिकी और नवाचार, जो न्यूजीलैंड की प्रमुख खूबियों में से एक है, इस यात्रा का मुख्य केंद्र बिंदु होगा। न्यूजीलैंड अपने सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 1.5% अनुसंधान एवं विकास पर खर्च करता है और दुग्ध उत्पादन, कृषि और उच्च-प्रदर्शन वाले खेलों जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्टता हासिल कर चुका है।
इंडो-पैसिफिक आउटरीच
प्रधानमंत्री की न्यूजीलैंड यात्रा, भारत-प्रशांत क्षेत्र के देशों से दिल्ली के संबंध सुधारने के प्रयासों का हिस्सा है, क्योंकि इस क्षेत्र में चीन का आक्रामक रवैया एक चुनौती बना हुआ है। भारत ने पिछले कुछ हफ्तों में जापान, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया से संपर्क साधा है। न्यूजीलैंड भी अपने बाजार का विस्तार करने के लिए भारत से संपर्क साध रहा है, जो उसकी आर्थिक विविधता का एक हिस्सा है।
एक अधिकारी ने कहा कि हम न्यूजीलैंड के साथ साझेदारी करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि उनकी सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों और नवाचारों से सीखकर संबंधित भारतीय क्षेत्रों को मजबूत कर सकें। न्यूजीलैंड भारत में कीवीफ्रूट एक्शन प्लान, एप्पल एंड पियर एक्शन प्लान और हनी एक्शन प्लान शुरू करने की प्रक्रिया में है और नागालैंड और उत्तराखंड में कीवीफ्रूट के लिए उत्कृष्टता केंद्र स्थापित कर रहा है।
अधिकारी ने बताया कि हम खेल जगत में संयुक्त कार्य योजना के माध्यम से इसी तरह के सहयोग पर भी चर्चा कर रहे हैं। साथ ही यह भी जानकारी दी कि पीएम मोदी वायडक्ट बिजनेस सेंटर में खेल और व्यापार संबंधी कार्यक्रमों में भाग लेंगे। मोदी की यात्रा के दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया ने खेल सहयोग के लिए एक रोडमैप पर भी हस्ताक्षर किए।
न्यूजीलैंड के साथ भारत का संबंध दिल्ली की इंडो-पैसिफिक रणनीति का हिस्सा है और इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया के साथ मिलकर यह भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी, महासागर विजन और एक स्वतंत्र एवं खुले इंडो-पैसिफिक के प्रति उसके दृष्टिकोण को और मजबूत करने की उम्मीद है। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के आक्रामक व्यवहार के मद्देनजर यह कदम और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
इस यात्रा का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू संबंधों को मजबूत करना होगा, क्योंकि न्यूजीलैंड में लगभग तीन लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं। इन लोगों का भारत के साथ गहरा संबंध है और वे देश की राजनीति, अर्थव्यवस्था और व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मोदी एक सामुदायिक कार्यक्रम में भारतीय प्रवासी भारतीयों को भी संबोधित करेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की न्यूजीलैंड यात्रा से पहले न्यूजीलैंड में उनके समकक्ष क्रिस्टोफर लक्सन ने गुरुवार को भारत-न्यूजीलैंड के बीच प्रस्तावित समझौते की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि इससे भारतीय बाजार तक न्यूजीलैंड के बिजनेस के विस्तार में मदद मिलेगी। पढें पूरी खबर।
