हाइपरसोनिक मिसाइल: चीनी परीक्षण से बहस शुरू

चीनी सेना ने हाल की अपनी परेड में हाइपरसोनिक मिसाइल प्लेटफार्म को दिखाया था।

हाइपरसोनिक मिसाइल! फाइल फोटो।

चीनी सेना ने हाल की अपनी परेड में हाइपरसोनिक मिसाइल प्लेटफार्म को दिखाया था। इस बारे में अमेरिका के अखबार फाइनेंशियल टाइम्स ने लिखा, चीन ने लगभग दो महीने पहले (अगस्त में) परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम अत्याधुनिक हाइपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण किया है जिससे अमेरिकी खुफिया तंत्र सकते में आ गया है।

हालांकि, चीन ने आधिकारिक तौर पर इसका खंडन किया है। चीन ने दावा किया है कि यह (परीक्षण) एक मिसाइल नहीं बल्कि अंतरिक्ष यान था। चीन के खंडन के बावजूद इस परीक्षण को लेकर दुनियाभर में बहस चल रही है। चीन की परमाणु हथियार नीति के विशेषज्ञ और एमआइटी के प्रोफेसर टेलर फ्रेवल ने मीडिया को बताया है कि परमाणु हथियारों से लैस ‘हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल’ अमेरिकी मिसाइल रक्षा प्रणाली को चकमा देने में चीन की मदद कर सकता है।

विशेषज्ञ इसे भविष्य के लिए एक चेतावनी के रूप में देख रहे हैं। हाइपरसोनिक मिसाइल से आशय उन मिसाइलों से है जो आवाज की गति से पांच गुना तेज उड़ते हुए अपने लक्ष्य की ओर बढ़ती हैं। हाइपरसोनिक हथियारों को उनका विशेष दर्जा उनकी रफ्तार से नहीं मिलता। हाइपरसोनिक मिसाइल पिछले 30-35 सालों की सबसे आधुनिक मिसाइल तकनीक है। इसके तहत पहले एक व्हीकल मिसाइल को अंतरिक्ष में लेकर जाता है। इसके बाद मिसाइल इतनी तेजी से लक्ष्य की ओर बढ़ती हैं कि एंटी मिसाइल सिस्टम इन्हें ट्रैक करके नष्ट नहीं कर पाते। बैलिस्टिक मिसाइल भी हाइपरसोनिक गति से चलती है लेकिन जब उसे एक जगह से छोड़ा जाता है तो पता चल जाता है कि वह कहां गिरेगी। इन मिसाइलों को ट्रैक करना आसान होता है। इसके साथ ही छोड़े जाने के बाद इन मिसाइलों की दिशा में परिवर्तन नहीं किया जा सकता है।

लेकिन हाइपरसोनिक मिसाइल के साथ छोड़े जाने के बाद दिशा परिवर्तन संभव है। ये मिसाइल वायुमंडल में हाइपरसोनिक स्पीड से ग्लाइड करती हैं और अपने लक्ष्य की ओर बढ़ती हैं। चूंकि ये बैलिस्टिक मिसाइलों की तरह आर्क और प्राजेक्टाइल नहीं बनाती हैं, इस वजह से इनके लक्ष्य का पता लगाना मुश्किल होता है। ऐसे में ये मिसाइल रोधी रक्षा प्रणाली की पकड़ में नहीं आतीं।

जाहिर है, अगर कोई मुल्क हाइपरसोनिक मिसाइल छोड़ता है तो उसे मिसाइल रोधी रक्षा प्रणाली की मदद से रोकना लगभग नामुमकिन होगा। यह मिसाइल राडार की पकड़ में भी नहीं आती। इससे इन मिसाइलों के लक्ष्य को लेकर एक भ्रम की स्थिति पैदा होती है। कथित मिसाइल लॉन्च की ख़बर आने के बाद कहा जा रहा है कि इसने अमेरिकी खुफिया तंत्र को चौंका दिया है।

जानकारों के मुताबिक, अमेरिका ने कभी ये नहीं सोचा होगा कि चीन अपने दम पर अपनी तकनीक को इतना मजबूत कर लेगा। चीन ने पिछले 25-30 साल अपने मिसाइल सिस्टम से लेकर सैन्य साजो-सामान विकसित किए हैं। ऐसे में अमेरिका के लिए ये एक चौंकाने वाली बात रही होगी।
क्या इसे अमेरिका के लिए एक चुनौती के रूप में देखे जाने की जरूरत है। यह खबर सामने आने के बाद अमेरिका और चीन के बीच बराबरी का रिश्ता बन गया है। चीन के परीक्षण को लेकर भारतीय सेना के पूर्व महानिदेशक (तोपखाना) पीआर शंकर के मुताबिक, जिस भी मुल्क का अंतरिक्ष कार्यक्रम है, उसके पास हाइपरसोनिक तकनीक होती है। लेकिन इसे हथियार में बदलने के लिए जमीन पर नियंत्रण केंद्र के साथ उपग्रह, वारहेड के साथ – साथ एक पूरी प्रणाली चाहिए।

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