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हाइपरलूप का एक और टेस्‍ट सफल: 1200 कि‍मी/घंटा होगी इस लोकल ट्रेन की रफ्तार

1200 किलोमीटर प्रति घंटे चलने वाली इस हाइपरलूप ट्रेन से लोग एक घंटा का सफर कर भोपाल, पटना, रांची, गोरखपुर, बनारस, गया, धनबाद, अहमदाबाद, गांधीनगर, सूरत, जम्मू जैसे शहर पहुंच सकेंगे।

हाइपरलूप ट्रांसपोर्टेशन टेक्नोलॉजी के जरिए घंटों की दूरी मिनटों में होगी तय

सुपरसोनिक रेल सिस्टम जिसे आम बोल-चाल की भाषा में हाइपरलूप कहा जाता है, उसने दूसरा टेस्ट सफलतापूर्वक पास कर लिया है। स्टार्टअप कंपनी हाइपरलूप ने बुधवार (02 अगस्त) को इसकी जानकारी दी है। इस लोकल ट्रेन की रफ्तार 1200 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। हालांकि, यह अभी शुरुआती चरण में है लेकिन इसे मूर्त रूप दिया गया तो लोग देश की राजधानी नई दिल्ली से कई राज्यों की राजधानी घंटे भर में पहुंच जाएंगे। मसलन, 1200 किलोमीटर प्रति घंटे चलने वाली इस हाइपरलूप ट्रेन से लोग एक घंटा का सफर कर भोपाल, पटना, रांची, गोरखपुर, बनारस, गया, धनबाद, अहमदाबाद, गांधीनगर, सूरत, जम्मू जैसे शहर पहुंच सकेंगे।

बता दें कि अमेरिकी कंपनी टेस्ला और स्पेस एक्स ने मिलकर हाइपरलूप तकनीक का ईजाद किया है। अमेरिकी उद्यमी और टेस्ला के फाउंडर एलोन मस्क ने साल 2012 में इससे जुड़ी थ्योरी दी थी। इस पर आगे की तकनीक विकसित करने के लिए अमेरिकी कंपनी टेस्ला और स्पेस एक्स ने मिलकर हाइपरलूप वन बनाई जो इस तकनीक पर लगातार काम कर रही है। हाइपरलूप में एक सील की ट्यूब की सीरीज होती है जिसके जरिए किसी भी घर्षण और हवा के रूकावट के बिना लोगों को एक जगह से दूसरी जगह की यात्रा कराई जा सकती है। इस ट्यूब में ट्रेन की तरह लोगों के बैठने की व्यवस्था बनाई जा सकती है।

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उद्यमी एलोन मस्क के मुताबिक, अमेरिका के लास वेगास के निकट रेगिस्तान में अपनी निजी सुविधा के बल पर हाइपरलूप सिस्टम ने परीक्षण के दौरान रिकॉर्ड गति पाई है। 29 जुलाई को हाईपरलूप वन के प्रोटोटाइप पॉड को 500 मीटर लंबे टेस्ट ट्यूब में छोड़ा गया था। इस परीक्षण में हाईपर लूप वन ने लगभग 309 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ी थी। कंपनी का दावा है कि यह अब तक का सबसे तेज हाईपरलूप टेस्ट है। कंपनी का मानना है कि यह हाइपरलूर 1200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पूरी कर सकती है, इसलिए आगे भी इसका परीक्षण जारी रहेगा।

इधर, भारत में भी बिरला इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी एंड साइन्स  (BITS), पिलानी के कुछ छात्र इसी प्रॉजेक्ट को लेकर काम कर रहे हैं। छात्र एक “Hyperloop” तकनीक से चलने वाला वाहन तैयार कर रहे हैं जो 1,200 km प्रतिघंटा की रफ्तार पर दौड़ सकेगा। हाइपरलूप तकनीक का इस्तेमाल कर छात्र एक “पॉड” बना रहा है। यह “पॉड” या एक वैक्यूम ट्यूब होगा जिसके लिए तैयार किया गया खास वाहन 1,200 km प्रतिघंटा की रफ्तार हासिल कर सकेगा। “Hyperloop India” इस वैक्यूम ट्यूब या पॉड को बनाने के आखिरी मुकाम पर हैं। सिंगल कम्पार्टमेंट के इस पॉड के अगस्त महीने के अंत तक सामने आने की उम्मीद है। शोध कर रहे छात्र शंकर के मुताबिक, शंकर ने कहा, “हाइपरलूप एक ट्यूब ट्रेवल तकनीक है। ट्यूब में एक वाहन होता है जो चुम्बकीय शक्ति के कारण हवा में एक ऊंचाई पर तैरते हुए ट्रेवल करता है।”

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