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हाइड्रॉक्सिक्लोरोक्वीन पर अब भी संदेह, कोई बताए कि इस मर्ज की दवा क्या है; रेमडेसिविर की भूमिका का पता लगाना बाकी

नेशनल इंस्टीट्यूट्स आफ हेल्थ के डॉ. एंथनी फाउची और एच. क्लिफोर्ड लेन ने ‘न्यू इंग्लैंड जर्नल आफ मेडिसिन’ में लिखा कि इस बात को लेकर स्पष्टता जरूरी है कि कि कौन-सी दवा लाभकारी है और कौन-सी नहीं, इससे ‘संभवत कई जिंदगियां बचाई जा सकेंगी।’ अध्ययन में हाइड्रॉक्सिक्लोरोक्वीन की भी जांच की गई और अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि जिन लोगों को यह दवा दी गई थी उनमें से 25.7 फीसद मरीजों की 28 दिनों बाद मौत हो गई।

Author लंदन | July 19, 2020 5:15 AM
Covid-19, Hydroxychloroquine, Ramdesvirदवाइयों को लेकर दुनिया भर में शोध हो रहे हैं, लेकिन अब भी पुख्ता तौर पर कोई इलाज का दावा नहीं कर सकता है।

कोरोना विषाणु से पूरी दुनिया सहमी है। कई देशों के वैज्ञानिक इसकी दवा या टीका बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि अभी तक कोई मुकम्मल टीका तैयार नहीं हुआ है। फिर भी शोधकर्ताओं और चिकित्सा विज्ञानियों ने हार नहीं मानी है। कोरोना को लेकर जितनी भ्रांतियां सामने आई हैं उतनी ही दवाइयां भी चर्चा में हैं। उधर, नए अध्ययनों से यह जानकारी मिल रही है कि कौन सी दवा कोविड-19 के इलाज में कारगर है और कौन-सी नहीं।

ब्रिटिश अनुसंधानकर्ताओं ने शुक्रवार को डेक्सामीथासोन नाम के सस्ते स्टेरॉयड पर अपना अध्ययन प्रकाशित किया। दो अन्य अध्ययनों में पाया गया कि मलेरिया के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा हाइड्रॉक्सिक्लोरोक्वीन हल्के लक्षण वाले मरीजों के इलाज में मददगार नहीं है। आक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन में शोथ या सूजन को कम करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले स्टेरॉयड का परीक्षण किया गया। करीब 2,104 मरीजों को यह दवा दी गई। इससे आॅक्सीजन मशीन की सहायता लेने वाले 36 प्रतिशत मरीजों की मौत का खतरा कम हुआ। हालांकि यह शुरुआती चरण या हल्के लक्षण वाले मरीजों के लिए हानिकारक दिखाई दी।

नेशनल इंस्टीट्यूट्स आफ हेल्थ के डॉ. एंथनी फाउची और एच. क्लिफोर्ड लेन ने ‘न्यू इंग्लैंड जर्नल आफ मेडिसिन’ में लिखा कि इस बात को लेकर स्पष्टता जरूरी है कि कि कौन-सी दवा लाभकारी है और कौन-सी नहीं, इससे ‘संभवत कई जिंदगियां बचाई जा सकेंगी।’ अध्ययन में हाइड्रॉक्सिक्लोरोक्वीन की भी जांच की गई और अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि जिन लोगों को यह दवा दी गई थी उनमें से 25.7 फीसद मरीजों की 28 दिनों बाद मौत हो गई।

इसमें कहा गया है कि हाइड्रॉक्सिक्लोरोक्वीन दवा वाले मरीजों के 28 दिनों के भीतर अस्पताल से जीवित घर लौटने की संभावना कम देखी गई। दो अन्य प्रयोगों से यह पता लगा कि इस दवा को शुरुआती स्तर पर देने से हल्के लक्षण वाले कोविड-19 के मरीजों को कोई मदद नहीं मिली।

कोरोना के इलाज में रेमेडेसिविर नाम की अन्य दवा भी मददगार पाई गई। वायरल रोधी इस दवा से अस्पताल में भर्ती रहने के दिनों की संख्या में औसतन करीब चार दिनों की कमी आई। एक अनुसंधानकर्ता ने कहा, ‘कोविड-19 के गंभीर मरीजों के इलाज में अभी रेमेडेसिविर की भूमिका का पता लगाना बाकी है।’ रेमेडेसिविर पर अध्ययन की जानकारियां अभी प्रकाशित नहीं की गई हैं।

मुकम्मल कोई भी नहीं
नेशनल इंस्टीट्यूट्स आफ हेल्थ के डॉ. एंथनी फाउची और एच. क्लिफोर्ड लेन ने ‘न्यू इंग्लैंड जर्नल आॅफ मेडिसिन’ में लिखा कि इस बात को लेकर स्पष्टता जरूरी है कि कि कौन-सी दवा लाभकारी है और कौन-सी नहीं, इससे ‘संभवत: कई जिंदगियां बचाई जा सकेंगी।’ अध्ययन में हाइड्रॉक्सिक्लोरोक्वीन की भी जांच की गई और अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि जिन लोगों को यह दवा दी गई थी उनमें से 25.7 फीसद मरीजों की 28 दिनों बाद मौत हो गई।

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