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‘मोदी सरकार के 2 साल के कार्यकाल में कम हुई है मानवाधिकार और धार्मिक आजादी’

नागरिक आजादी के समर्थक एवं खोजी पत्रकार अजीत साही का मत था भारत में सरकारी एवं गैर सरकारी पक्ष, दोनों व्याप्क स्तर पर मानवाधिकार का उल्लंघन करते हैं, प्राय: एक दूसरे से सांठगांठ कर।

Author वॉशिंगटन | June 9, 2016 4:18 PM
ह्यूमन राइट्स वॉच (एचआरडब्ल्यू)

मोदी सरकार के दो साल के शासनकाल में मानवाधिकार एवं धार्मिक आजादी कम होने का दावा करते हुए मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस मुद्दे को भारत की अमेरिका के साथ होने वाली नियमित वार्ता का अंग बनाने को कहा है।
ह्यूमन राइट्स वॉच, एशिया एडवोकेसी के निदेशक जॉन सिफ्टन ने कहा, ‘भारत में मानवाधिकार की प्रगति तब तक अस्थिर रहेगी जब तक कि मोदी प्रशासन सभी नागरिकों के लिए न्याय एवं जवाबदेही तय करने, कमजोर समुदाय के संरक्षण तथा विचारों एवं मतभेदों के मुक्त आदान प्रदान को सुनिश्चित करने के लिए कदम नहीं उठाएगा।’

सिफ्टन ने कहा कि कानून एवं नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन का अभाव एक निरंतर चुनौती बना हुआ है। उन्होंने यह बात मंगलवार (7 जून) को टाम लेनटास मानवाधिकार आयोग द्वारा ‘चुनौतियां एवं अवसर : भारत में मानवाधिकारों की प्रगति’ विषय पर आयोजित एक सुनवाई में कही। उन्होंने दावा किया कि सरकारी अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं हो रही है तथा पुलिस एवं अन्य सुरक्षा कर्मियों के लिए छूट कायम है जिन्हें गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों में अभियोजन के विरुद्ध कानून से राहत दी गई है।

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सिफ्टन ने कहा, ‘हम संसद सदस्यों से अनुरोध करेंगे कि अमेरिका पर दबाव डालकर भारत सरकार के साथ इन महत्वपूर्ण मुद्दों को प्राथमिकता दी जाए तथा आने वाले महीनों एवं वर्षों में भारत सरकार के साथ होने वाली बातचीत में इन्हें प्रत्यक्ष रूप से उठाया जाए।’ यह संगोष्ठी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ व्हाइट हाउस में हुई मुलाकात के कुछ समय बाद हुई।

इंटरनेशनल क्रिश्चियन कंसर्न के अध्यक्ष जेफ किंग ने कहा कि भारत सरकार इन अपराधों को अंजाम देने में सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं है, किन्तु प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं सरकारी अधिकारियों की चुप्पी मुद्दे को दबाने वाली है। इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल ने कहा, ‘मेरा मानना है कि सामरिक एवं वाणिज्यिक वार्ता सुरक्षा, आर्थिक सहयोग आदि से आगे जानी चाहिए ताकि दोनों देश लोकतंत्र, धार्मिक स्वतंत्रता एवं कानून के शासन के बारे में अपने साझा मूल्यों का विस्तार कर सकेंगे।’

उन्होंने कहा कि इन वार्ता के जरिए अमेरिका को भारतीय अधिकारियों को धार्मिक अल्पसंख्यकों के संरक्षण को मजबूत करने, धार्मिक हिंसा के मामलों में न्याय सुनिश्चित कर धार्मिक स्वतंत्रता को वैध ठहराने तथा भंड़ाफोड़ करने वाले के संरक्षण के लिए कानून बनाने के बारे में समझाना चाहिए। ह्यूमन ट्रैफिकिंग प्रो बोना लीगल सेंटर की अध्यक्ष मार्टिना ई वंडेनबर्ग ने मांग की कि मानव तस्करी से निबटने के लिए भारत द्वारा निर्णायक कदम उठाने में विफल रहने की रोशनी में भारत को 2016 की मानव तस्करी संबंधित पर्सन्स रिपोर्ट में टियर 3 में रखा गया है।

नागरिक आजादी के समर्थक एवं खोजी पत्रकार अजीत साही का मत था भारत में सरकारी एवं गैर सरकारी पक्ष, दोनों व्याप्क स्तर पर मानवाधिकार का उल्लंघन करते हैं, प्राय: एक दूसरे से सांठगांठ कर। साही ने कहा, ‘शुरुआत करने के लिए यह अपरिहार्य है कि भारत सरकार एक तंत्र कायम करे जिसमें आतंकवादी मामलों में निर्दोष लोगों को फंसाने वाले पुलिस अधिकारियों को उनके गैर कानूनी कामों के लिए दंडित किया जा सके। अन्य मांग है कि सरकार गलत कामों की पहचान करे तथा इस तरह के फर्जी अपराधिक मामलों में पीड़ितों को उपुयक्त रूप से मुआवजा दे और उनका पुनर्वास करे।’

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