पाकिस्तान: सैन्य प्रतिष्ठान की आलोचक रही मानवाधिकार कार्यकर्ता अस्मां जहांगीर का निधन - human right activist and senior lawyer Asma Jahangir passwed away in Lahore - Jansatta
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पाकिस्तान: सैन्य प्रतिष्ठान की आलोचक रही मानवाधिकार कार्यकर्ता अस्मां जहांगीर का निधन

वरिष्ठ वकील अदील राजा ने कहा, ‘आज अस्मां को दिल का दौरा पड़ा और उन्हें लाहौर के हामिद लतीफ अस्पताल के जाया गया। अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली।’ उनके निधन की खबर फैलते ही वकीलों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नेताओं की ओर से शोक संदेश आने लगे और उन्होंने इसे पाकिस्तान के लिए इसे बहुत बड़ी क्षति करार दिया।

Author February 11, 2018 7:39 PM
अपने मुखर स्वभाव एवं मानवाधिकार के लिए जज्बे को लेकर र्चिचत अस्मां (66) पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की अध्यक्ष बनने वाली पहली महिला थीं। (फोटो सोर्स सोशल मीडिया)

पाकिस्तान की प्रख्यात मानवाधिकार वकील और सामाजिक कार्यकर्ता तथा देश के सशक्त सैन्य प्रतिष्ठान की मुखर आलोचक अस्मां जहांगीर का रविवार (11 फरवरी, 2018) को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। उनकी बेटी ने यह जानकारी है। अपने मुखर स्वभाव एवं मानवाधिकार के लिए जज्बे को लेकर र्चिचत अस्मां (66) पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की अध्यक्ष बनने वाली पहली महिला थीं। उनकी बेटी मुनीजे जहांगीर ने ट्वीट किया, ‘मां अस्मां जहांगीर के गुजर जाने से मैं बिल्कुल टूट गई। हम शीघ्र ही अंतिम संस्कार की तारीख की घोषणा करेंगे। हम अपने रिश्तेदारों का लाहौर आने का इंतजार कर रहे हैं।’ वरिष्ठ वकील अदील राजा ने कहा, ‘आज अस्मां को दिल का दौरा पड़ा और उन्हें लाहौर के हामिद लतीफ अस्पताल के जाया गया। अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली।’ उनके निधन की खबर फैलते ही वकीलों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नेताओं की ओर से शोक संदेश आने लगे और उन्होंने इसे पाकिस्तान के लिए इसे बहुत बड़ी क्षति करार दिया।

पाकिस्तान के प्रधान न्यायाधीश मियां साकिब निसार, पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ, पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के अध्यक्ष इमरान खान ने अस्मां के निधन को असाध्य क्षति करार दिया है। पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री शहबाज शरीफ ने भी उनके निधन पर शोक प्रकट किया है। उनके परिवार में दो बेटियां और एक बेटा है। उनकी बेटी मुनीजे जहांगीर टीवी एंकर हैं। जनवरी, 1952 में लाहौर में पैदा हुईं अस्मा ने ह्यूमन राइट्स ऑफ पाकिस्तान की स्थापना की और उसकी अध्यक्षता भी संभाली। वह सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की अध्यक्ष भी रहीं।

वर्ष 1978 में पंजाब विश्वविद्यालय से एलएलबी डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में वकील के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की। वह लोकतंत्र की पुरजोर समर्थक बनीं और उन्हें पाकिस्तान में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे जियाउल हक के सैन्य शासन के खिलाफ मूवमेंट फोर रिस्टोरेशन ऑफ डेमोक्रेसी में भाग लेने को लेकर 1983 में जेल में डाल दिया गया। उन्होंने इफ्तिकार चौधरी को पाकिस्तान का प्रधान न्यायाधीश बहाल करने के लिए प्रसिद्ध वकील आंदोलन में सक्रिय हिस्सेदारी की। वह न्यायिक सक्रियाता को लेकर सुप्रीम कोर्ट की आलोचक थीं तथा उन्होंने पिछले साल नवाज शरीफ को प्रधानमंत्री के पद के लिए अयोग्य ठहराने के लिए शीर्ष अदालत की आलोचना की थी।

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