पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा हुआ है। इस क्षेत्र में तनाव की वजह से जहाजरानी गतिविधियों में लगातार मुश्किलें आ रही हैं। एक अधिकारी ने बताया कि होर्मुज जलमार्ग में अभी भी 14 भारतीय जहाज फंसे हुए हैं। अधिकारी ने बताया कि अधिकारी होर्मुज और उसके आसपास की सुरक्षा स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं, इसी रास्ते से दुनिया की तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारी ने कहा, “हम होर्मुज जलमार्ग में लोडिंग के लिए टैंकर भेजने के संबंध में विदेश मंत्रालय से बातचीत कर रहे हैं।” अधिकारी के अनुसार, भारत इस क्षेत्र में जहाज तभी भेजेगा जब यह आकलन कर लिया जाएगा कि वहां परिचालन के लिए स्थितियां पूरी तरह सुरक्षित हैं।
इस क्षेत्र में सभी भारतीय नाविक सुरक्षित
जहाजरानी मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव मुकेश मंगल ने कहा कि भारतीय झंडे वाले किसी जहाज या भारतीय क्रू वाले किसी विदेशी जहाज से जुड़ी कोई घटना सामने नहीं आई है।
उन्होंने कहा, “इस क्षेत्र में सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। पिछले 72 घंटों में भारतीय झंडे वाले किसी जहाज या भारतीय क्रू वाले किसी विदेशी जहाज से जुड़ी कोई घटना सामने नहीं आई है। पिछले 72 घंटों में 404 कॉल और 903 ईमेल मिले हैं। मंत्रालय ने DG शिपिंग के जरिये 3300 से ज्यादा भारतीय नाविकों की सुरक्षित वापसी में मदद की है, जिनमें से 99 लोग पिछले 72 घंटों में वापस आए हैं। पूरे भारत में बंदरगाहों का कामकाज सामान्य है और कहीं भी भीड़भाड़ की कोई खबर नहीं है।”
शिपिंग रेट में भी गिरावट
इसके अलावा, उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया युद्ध के चलते जो शिपिंग रेट बहुत ज्यादा बढ़ गए थे, वे अब थोड़े कम होकर 20-फुट के कंटेनर के लिए 2000 अमेरिकी डॉलर हो गए हैं, जबकि 15 अप्रैल को यह रेट 2400 अमेरिकी डॉलर थे।
अतिरिक्त सचिव मंगल ने कहा, “15 अप्रैल को 20-फुट के कंटेनर के लिए यह (शिपिंग दर) लगभग 2400 अमेरिकी डॉलर थी, जो अब घटकर लगभग 2000 अमेरिकी डॉलर हो गई है।” अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच 28 फरवरी को शुरू हुए संघर्ष के कारण होर्मुज जलमार्ग की नाकेबंदी के बाद इस क्षेत्र में समुद्री तनाव बढ़ गया है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है। भारत खाड़ी देशों से आने वाले कच्चे तेल पर बहुत ज्यादा निर्भर है।
इसलिए होर्मुज जलमार्ग में स्थिरता देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। इस रास्ते में होने वाली किसी भी लंबी रुकावट का असर माल ढुलाई की लागत, बीमा प्रीमियम और कच्चे तेल की आपूर्ति के समय पर पड़ सकता है। ऐसा माना जा रहा है कि सरकारी एजेंसियां और तेल कंपनियां इस क्षेत्र में काम कर रहे व्यापारिक जहाजों पर मंडरा रहे खतरों का आकलन करते हुए आपातकालीन उपायों पर आपस में तालमेल बिठा रही हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल की सप्लाई सामान्य होने में लगेगा लंबा वक्त
संयुक्त अरब अमीरात की सरकारी तेल कंपनी ADNOC ने कहा है कि अगर मध्य-पूर्व में चल रहा संघर्ष अभी खत्म भी हो जाता है तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल का पूरी तरह प्रवाह 2027 की पहली या दूसरी तिमाही से पहले बहाल नहीं होगा। यहां क्लिक कर पढे़ं पूरी खबर…
