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‘हार्ट आॅफ एशिया’ के केंद्र में रहा आतंकवाद

आतंकवाद की समस्या से निपटने और अफगानिस्तान में स्थायित्व लाने के लिए निकट आर्थिक सहयोग को प्रोत्साहित करने की सदस्य देशों की प्रतिबद्धता के साथ बुधवार को पांचवा ‘हार्ट ऑफ एशिया’ सम्मेलन का समापन हुआ.

Author इस्लामाबाद | December 10, 2015 00:09 am
हार्ट आॅफ एशिया सम्मेलन में भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज। (पीटीआई फोटो)

आतंकवाद की समस्या से निपटने और अफगानिस्तान में स्थायित्व लाने के लिए निकट आर्थिक सहयोग को प्रोत्साहित करने की सदस्य देशों की प्रतिबद्धता के साथ बुधवार को पांचवा ‘हार्ट ऑफ एशिया’ सम्मेलन का समापन हुआ।
अफगानिस्तान पर आयोजित इस दो दिवसीय बहुपक्षीय सम्मेलन में 14 सदस्य देशों, 17 सहयोगी राष्ट्रों के मंत्री तथा 12 संगटनों के पदाधिकारी शामिल हुए। इनमें विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का नाम प्रमुख है। इस सम्मेलन में इस्लामाबाद घोषणापत्र को स्वीकृति दी गई जिसमें सभी अफगान तालिबान समूहों से बातचीत की प्रक्रिया में शामिल होने का आह्वान किया गया है।

पाकिस्तान के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज और अफगान विदेश मंत्री सलाहुद्दीन रब्बानी ने साझा संवाददाता सम्मेलन में इस घोषणापत्र के बारे में ऐलान किया। अजीज ने कहा कि सम्मेलन को बड़ी सफलता मिली है क्योंकि इसमें भाग लेने वालों ने अफगानिस्तान को स्थायित्व प्रदान करने के लिए निकट सहयोग पर सहमति जताई है।

रब्बानी ने इस घोषणापत्र के उन प्रमुख बिंदुओं को साझा किया जिनमें भागीदारी करने वाले प्रतिनिधियों ने एक दूसरे की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता, एकता और राजनीतिक स्वतंत्रता का सम्मान करने तथा एक दूसरे के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देने के सिद्धांतों का अनुसरण करने पर जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला हुआ है कि अफगानिस्तान एवं इस क्षेत्र के लिए आतंकवाद बड़ा खतरा है और इस समस्या से निपटने के लिए साझा प्रयास की जरूरत है।

‘हार्ट ऑफ एशिया’ सम्मेलन के घोषणापत्र में कहा गया है, ‘‘हम इसे स्वीकारते हैं कि आतंकवाद और हिंसक चरमपंथ क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शांति, सुरक्षा, स्थिरता एवं आर्थिक प्रगति के लिए निरंतर तथा गंभीर खतरा बने हुए हैं।’’

इस बात को दोहराया गया कि आतंकवाद, चरमपंथ और अलगाववाद तथा इनमें आपस के जुड़ाव से कई देशों, क्षेत्रों एवं इसके बाहर के लिए भी गंभीर चुनौती पैदा हुई है जिसका ठोस प्रयास के जरिए हल किया जाना जरूरी है। सम्मेलन में भाग लेने वाले देशों ने व्यावहारिक कदम उठाने तथा आतंकवाद की समस्या और सभी आतंकी संगठनों खासकर अलकायदा, आईएस एवं उनसे जुड़े संगठनों का मुकाबला करने एवं उनका खात्मा करने के लिए जरूरी कदम उठाने पर भी सहमति जताई।

उन्होंने आतंकवादियों की वित्तीय एवं साजोसामान के संसाधनों तक पहुंच रोकने, उनकी शरणस्थलियों एवं प्रशिक्षण स्थलों को तबाह करने तथा नए आतंकवादियों की भर्ती एवं प्रशिक्षण की क्षमता पर अंकुश लगाने के लिए जरूरी कार्रवाई करने का भी फैसला किया है।

सदस्य देशों ने शांतिपूर्ण वार्ता के जरिए संघर्षों का समाधान करने पर सहमति जताई तथा ‘अफगानिस्तान के स्वामित्व वाली तथा अफगान नीत शांति एवं सुलह के कदमों’ का समर्थन किया। घोषणापत्र में कहा गया है, ‘‘हम सभी अफगान तालिबान समूहों तथा सशस्त्र विपक्षी समूहों का आह्वान करते हैं कि वे अफगान सरकार के साथ बातचीत की प्रक्रिया में शामिल हों।’’

उन्होंने सहयोग बढ़ाने के लिए कदम उठाने पर भी सहमति जताई तथा तीन महीने के भीतर शांति एवं स्थिरता को प्रोत्साहित करने की खातिर क्षेत्रीय तकनीकी समूहों को परस्पर विश्वास बहाली के कदमों के लिए प्रस्ताव के साथ आने का काम दिया है। भाग लेने वाले देशों ने अगले साल ‘हार्ट आॅफ एशिया-इस्तांबुल प्रक्रिया’ के सम्मेलन के आयोजन की भारत द्वारा इच्छा जताने का स्वागत किया।

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