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घर में कुत्ते पालने से दमा की बीमारी से बच सकते हैं बच्चे, जानें कैसे?

जिन घरों में कुत्ते पाले जाते हैं, उन घरों के बच्चों में दमा होने का खतरा 15 फीसदी तक कम होता है।

Author लंदन | November 4, 2015 11:44 AM

जिन घरों में कुत्ते पाले जाते हैं, उन घरों के बच्चों में दमा होने का खतरा 15 फीसदी तक कम होता है। स्वीडन के वैज्ञानिकों के एक दल ने कम उम्र में कुत्तों के संपर्क में रहने और उसके बाद दमा के विकास के संबंध के अध्ययन के लिए नेशनल रजिस्टर का उपयोग करते हुए 10 लाख से भी अधिक बच्चों की सूचनाओं का विश्लेषण किया। पूर्व में भी इस सवाल का व्यापक तौर पर अध्ययन किया गया लेकिन कोई निर्णायक निष्कर्ष नहीं निकला।

नये अध्ययन में यह बात निकलकर सामने आयी है कि जो बच्चे कुत्तों के संपर्क में बड़े होते हैं उनमें उन बच्चों की तुलना में दमा का खतरा 15 फीसदी तक कम होता है जो कुत्तों के संपर्क के बिना बढ़ते हैं। अपसला विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर टुवे फॉल ने कहा ‘पूर्व के अध्ययनों से यह पता चला था कि फार्म पर बड़े होने वाले बच्चों में दमा का खतरा आधा हो जाता है। हम लोग देखना चाहते थे कि घर में कुत्तों के साथ बढ़ने वाले बच्चों में भी यह सत्य है या नहीं।’ फॉल ने कहा कि उनके निष्कर्षों में फार्म के प्रभाव की पुष्टि हुई और इसके साथ ही कुत्तों के संपर्क में बड़े होने वाले बच्चों में दमा का खतरा 15 फीसदी तक कम पाया गया।

उन्होंने कहा कि बहुत बड़ी संख्या में आंकड़ों की उपलब्धता के कारण उनको ये तथ्य मिले। स्वीडन में सभी लोगों के पास एक अनूठी व्यक्तिगत संख्या होती है। विशेषज्ञ फिजिशियन के पास मरीज के पहुंचने संबंधी आंकड़ा और प्रिस्क्रिप्शन नेशनल डेटाबेस में दर्ज हो जाता है जो बाद में अनुसंधानकर्ताओं के लिए उपलब्ध होता है। इस अध्ययन का प्रकाशन ‘जेएएमए पेडिएट्रिक्स’ में हुआ है।

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