अफगानिस्तान में बिगड़ते हालात पर वैश्विक गोलबंदी, बंदूक वाली सरकार को समर्थन नहीं देगा भारत

अफगानिस्तान को लेकर इस राय के पक्ष में भारत और अमेरिका समेत 12 देश खड़े हो गए हैं। तालिबान के खिलाफ इस वैश्विक गोलबंदी में पाकिस्तान और चीन भी शामिल हुए हैं।

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तालिबानी आतंकी। फाइल फोटो।

अफगानिस्तान के इलाकों में तालिबान के बढ़ते कब्जे के बीच भारत ने साफ कर दिया है कि वहां बंदूक वाली सरकार को समर्थन नहीं दिया जाएगा। अफगानिस्तान को लेकर इस राय के पक्ष में भारत और अमेरिका समेत 12 देश खड़े हो गए हैं। तालिबान के खिलाफ इस वैश्विक गोलबंदी में पाकिस्तान और चीन भी शामिल हुए हैं। कतर में बुलाए गए औचक सम्मेलन में अफगानिस्तान की सुरक्षा स्थिति को नियंत्रित करने के तरीकों पर चर्चा की गई। इसमें सभी देशों ने एक सुर में तय किया कि वहां बंदूक के बल पर काबिज सरकार को समर्थन या मान्यता नहीं दी जाएगी।

भारत, अमेरिका, कतर, चीन, पाकिस्तान समेत 12 देशों के विदेश मंत्रालयों के प्रतिनिधि कतर में क्षेत्रीय सम्मेलन में शामिल हुए, जिसमें अफगानिस्तान में तेजी से खराब होती सुरक्षा स्थिति को नियंत्रित करने के तरीकों पर चर्चा की गई। भारत, अमेरिका और चीन समेत 12 देशों ने संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ के प्रतिनिधियों के साथ यह फैसला किया कि वे अफगानिस्तान में किसी भी ऐसी सरकार को मान्यता नहीं देंगे जो बंदूक की नोंक पर सत्ता हासिल करना चाहती है। इस सम्मेलन की मेजबानी कतर ने की।

भारत की ओर से विदेश मंत्रालय में पाकिस्तान-अफगानिस्तान-ईरान डिवीजन के संयुक्त सचिव जेपी सिंह ने दोहा में बैठक में प्रतिनिधित्व किया। भारत ने गुरुवार को कहा था कि अफगानिस्तान की स्थिति चिंता का विषय है और वह उस देश में हिंसा को खत्म करने के लिए व्यापक युद्धविराम की उम्मीद कर रहा है। इस सम्मेलन को लेकर अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइस ने कहा कि सभी देशों ने सहमति जताई है कि शांति प्रक्रिया को तेज करने की जरूरत है और वे सैन्य बल के माध्यम से स्थापित किसी भी सरकार को मान्यता नहीं देंगे।

समूचे दक्षिणी हिस्से में तालिबान का कब्जा
अफगानिस्तान में तालिबान ने शुक्रवार को चार और प्रांतों की राजधानियों पर कब्जा करते हुए देश के समूचे दक्षिणी भाग पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया और धीरे-धीरे काबुल की तरफ बढ़ रहा है। तालिबान आतंकियों ने अफगानिस्तान के हेलमंद प्रांत की राजधानी लश्कर गाह पर कब्जा करके पिछले कई दिनों से जोरदार टक्कर दे रहे स्थानीय कबीलाई प्रमुख इस्माइल खान को बंदी बना लिया है। इस्माइल खान के साथ-साथ अफगानिस्तान के उपगृहमंत्री जनरल रहमान और कई आला पुलिस अधिकारियों को पकड़ा गया है। तालिबान ने इस्माइल खान के किले को ध्वस्त कर दिया है।

इस्माइल खान को भारत का दोस्त कहा जाता रहा है। अफगानिस्तान के अधिकारियों ने स्थानीय मीडिया से इस बात की पुष्टि की है कि तालिबान ने दक्षिण हेलमंड प्रांत की राजधानी लश्करगाह पर कब्जा कर लिया है। इस्माइल खान, पुलिस और सेना के स्थानीय प्रमुख हेलिकॉप्टर से हेरात से निकलना चाहते थे लेकिन ये सभी तालिबान की गिरफ्त में आ गए हैं। इस्माइल खान एक पूर्व मुजाहिद हैं, जिन्होंने 1970 के दशक में हाथ में हथियार उठा लिया था। इसके बाद उन्होंने तालिबान के खिलाफ जंग लड़ी थी।

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