जर्मनी: गुरुद्वारा हमले के मामले में तीसरे संदिग्ध ने स्वीकारा गुनाह

गुरुद्वारे के प्रवेश कक्ष में हुए विस्फोट में 60 वर्षीय एक ग्रंथी गंभीर रूप से घायल हो गया था और दो अन्य को मामूली चोटें आई थी।

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जर्मनी में गुरुद्वारे के बाहर खड़ी पुलिस। (photo DPA via AP)

जर्मनी के एस्सान शहर में इस्लामी आतंकवादियों द्वारा एक गुरुद्वारे पर की गई बमबारी के संबंध में गिरफ्तार तीसरे किशोर ने अधिकारियों के सामने स्वीकार कर लिया है कि वह आतंकवादी हमला करने वालों के समूह में शामिल था। मीडिया रिपोर्ट में यह बात कही गई है। एआरडी टीवी नेटवर्क के ‘रिपोर्ट म्यूनचेन’ कार्यक्रम के अनुसार अपने साथियों के बीच ‘आमिर’ के नाम से जाना जाने वाला तोल्गा आई ‘‘कमांडर इन चीफ’’ प्रतीत होता है जिसने मोहम्मद बी और यूसुफ टी के 16 अप्रैल की शाम नानकसर सतसंग सभा गुरुद्वारा में बम विस्फोट करने का आदेश दिया था।

पूछताछ के दौरान तोल्गा आई ने यह नहीं बताया कि गुरुद्वारे को निशाना बनाने का मकसद या पृष्ठभूमि क्या थी। हमले के समय गुरूद्वारे में विवाह समारोह चल रहा था जिसमें 200 से अधिक मेहमानों ने शिरकत की थी। उसने स्वीकार किया कि वह गुरुद्वारे पर हमला करने वाले समूह में शामिल था। रिपोर्ट में कहा गया है कि जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या तोल्गा आई और हमले के चार दिन बाद गिरफ्तार किए गए माध्यमिक स्कूल के 16 वर्षीय मोहम्मद एवं यूसुफ किसी आतंकवादी समूह का हिस्सा हैं या उनके समूह में और भी युवा शामिल हैं या नहीं।

गुरुद्वारे के प्रवेश कक्ष में हुए विस्फोट में 60 वर्षीय एक ग्रंथी गंभीर रूप से घायल हो गया था और दो अन्य को मामूली चोटें आई थी। जांचकर्ताओं ने पता लगाया है कि तीनों संदिग्धों का संबंध एक कट्टरपंथी मौलवी और एस्सान के निकट ड्यूसबर्ग में एक ट्रेवल एजेंसी से है। तीनों संदिग्ध कई बार एस्सान की अस्सालम मस्जिद गए थे जिसे अधिकारी कट्टरपंथी इस्लामियों के बैठक स्थल के रूप मे जानते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि जर्मनी का संघीय अभियोजक कार्यालय इस संदेह के कारण इस मामले की जांच एस्सान में राज्य अभियोजक से अपने हाथ लेने की संभावना की समीक्षा कर रहा है कि गिरफ्तार किए गए तीनों किशोर आतंकवादी समूह का हिस्सा हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि तोल्गा को एस्सान में जिला अदालत द्वारा जारी किए गए गिरफ्तारी वारंट के आधार पर हिसारत में रखा गया है। तोल्गा पर पुलिस का ध्यान उस समय गया जब उसकी मां ने उसके कट्टरपंथी इस्लामियों के साथ संबंध के बारे में पुलिस को बताया और उनके बेटे द्वारा तैयार कुछ नोटिस उन्हें सौंपे।

तोल्गा की मां को चिंता थी कि वह इस्लामिक स्टेट (आईएस) आतंकवादी समूह की खातिर लड़ने के लिए सीरिया जाने की तैयार कर रहा था। रिपोर्ट के अनुसार ऐसा भी माना जा रहा है कि उसका दिंसलाकेन में ‘‘लोहबर्गर बिग्रेड’’ के साथ भी संपर्क है जो कुछ वर्ष पहले लड़ाकों के रूप में आईएस में शामिल होने वाले जिहादियों का समूह है। तोल्गा की मां ने जब पुलिस से संपर्क किया तो इलाके के निकट शेरम्बेक के स्थानीय अधिकारियों ने तोल्गा के विदेश जाने पर प्रतिबंध लगा दिया और उसका पासपोर्ट जब्त कर लिया। तोल्गा का परिवार शेरम्बेक में ही रहता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस सहयोग ने तोल्गा को सीरिया जाने से रोक दिया लेकिन वह उसे कट्टरपंथी इस्लामी मार्ग पर आगे बढ़ने से नहीं रोक दिया। जांचकर्ताओं ने तोल्गा की फेसबुक प्रोफाइल पर 17 अप्रैल का एक संदेश देखा कि उस दिन उसका विवाह हुआ था। उनका मानना है कि यूसुफ और मोहम्मद ने भी पिछले छह सप्ताह में ऐसा ही किया और तीनों ने विवाह कराने के लिए साथी ढूंढने में मदद करने वाली इस्लामी एजेंसियों के जरिए अपने जीवन साथियों को ढूंढा। रिपोर्ट के अनुसार उनके विवाह समारोह कड़ी इस्लामी परंपराओं के तहत हुए। इसमें कहा गया कि जांचकर्ताओं को अभी इस बात की जानकारी नहीं है कि संदिग्ध आतंकवादी ने किन से विवाह किया और उनका मकसद क्या था।