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जर्मनी: इस मस्जिद में समलैंगिक और महिलाएं भी पढ़ सकती हैं नमाज, लेकिन नकाब-बुर्का पहनकर आने पर है सख्त मनाही

इस मस्जिद में महिलाओं को स्कार्फ पहनने की बाध्यता नहीं होगी। वे इमामों की तरह खुत्बा या उपदेश दे सकेंगी और अजान दे सकेंगी। खास बात ये है कि इस मस्जिद को सेंट जोहांस प्रोटेस्टेंट चर्च के भीतर बनाया गया है।

इस तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है।

जर्मनी में सीरान आतिश का एक ऐसी मस्जिद बनाने का सपना पूरा हो गया है जहां महिलाएं और पुरुष, सुन्नी और शिया, आम लोग और समलैंगिक एक साथ इबादत कर सकेंगे।जानी मानी महिला अधिकार कार्यकर्ता एवं वकील आतिश ने जर्मनी में प्रगतिशील मुस्लिमों के लिए इस तरह की इबादतगाह के लिए आठ साल तक लड़ाई लड़ी। वह ऐसा स्थान चाहती थीं जहां मुस्लिम अपने धार्मिक मतभेदों को भूलकर अपने इस्लामी मूल्यों पर ध्यान दें। उन्होंने कहा कि जर्मनी में उदारवादी मुस्लिमों के लिए यह अपने तरह की पहली मस्जिद है। जर्मनी में तुर्की के अतिथि कामगारों की बेटी 54 वर्षीय एटे उस निर्माणाधीन कमरे में प्रवेश करते ही भाव-विभोर हो उठीं। उन्होंने कहा, यह सपना सच होने जैसा है।

इब्न रूश्द गोयथे नाम की ये मस्जिद आज (16 जून) खुलेगी। यहां पर महिलाओं को स्कार्फ पहनने की बाध्यता नहीं होगी। वे इमामों की तरह खुत्बा या उपदेश दे सकेंगी और अजान दे सकेंगी। खास बात ये है कि इस मस्जिद को सेंट जोहांस प्रोटेस्टेंट चर्च के भीतर बनाया गया है। सीरान आतिश ने बताया कि ये एक ऐसी मस्जिद होगी जहां किसी को भी नकाब या बुर्के में प्रवेश नहीं मिलेगा। उनके मुताबिक ऐसा सुरक्षा कारणों की वजह से किया गया है। सीरान आतिश ने कहा कि ये उन जैसे सोच रखने वाले लोगों की धारणा है कि चेहरे को पूरी तरह से ढक देने वाले नकाब का धर्म से कोई लेना-देना नहीं है, बजाय इसके बुर्के या नकाब से ढका हुआ चेहरा एक राजनीतिक अवधारणा है।

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महिलाओं की अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाली सीरान आतिश ने बताया कि उदार विचारधारा के मुस्लिम छात्र अपने धर्म से दूर भागते हैं, ताकि कट्टरपंथी उसे निशाना ना बनाएं, हमें नौजवानों की इस समस्या का समाधान करना है और उन्हें एक विकल्प देना है। उनका कहना है कि बदलाव तभी आ सकता है जब आप खुद एक उदाहरण पेश करें, अपने धर्म के दरवाजे खोलें, उसे इस लायक बनाएं जहां हर सवाल को पूछा जा सकता है।

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