जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने 26 फरवरी 2026 को चीन यात्रा के दौरान हांग्जो में यूनिट्री रोबोटिक्स कंपनी का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने रोबोटों के कई दिलचस्प प्रदर्शन बड़े ध्यान से देखे। मर्ज की यह यात्रा चीन की तकनीकी प्रगति को करीब से देखने और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई।
फ्रेडरिक मर्ज के साथ फॉक्सवैगन और बीएमडब्ल्यू जैसे बड़े जर्मन कंपनियों के अधिकारी भी थे, जो चीनी फर्मों के साथ कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रही हैं। यह दौरा चीन की उन्नत रोबोटिक तकनीक और एआई (AI) क्षमताओं का प्रदर्शन था, जहां चीन ने दुनिया में मानव-समान रोबोट (humanoid robots) के उत्पादन और तैनाती में बढ़त हासिल की है।
फ्रेडरिक मर्ज के दौरे का मकसद?
जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की यह यात्रा चीन की तकनीकी प्रगति को नजदीक से समझने, रोबोटिक्स और एआई के क्षेत्र में सहयोग के अवसर तलाशने और जर्मनी–चीन के आर्थिक रिश्तों को मजबूत बनाए रखने के उद्देश्य से है। इसका मकसद चीन के साथ पुराने व्यापारिक रिश्तों को और मजबूत करना है। पिछले साल चीन, जर्मनी का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया था।
हालांकि, इन रिश्तों में कुछ समस्याएं भी हैं। चीन के साथ व्यापार में जर्मनी का घाटा काफी बढ़ गया है। पिछले साल यह घाटा 89 अरब यूरो तक पहुंच गया। जर्मन कंपनियों का कहना है कि चीनी कंपनियां सस्ते सामान बेचकर बाजार में ज्यादा दबाव बना रही हैं।
बुधवार को बीजिंग में चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग से मुलाकात के दौरान, और बाद में राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने से पहले मर्ज़ ने कहा कि वे दोनों देशों के बीच सहयोग को बेहतर और ज्यादा निष्पक्ष बनाना चाहते हैं।
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अन्य शीर्ष नेताओं से बातचीत के बाद जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने कहा कि चीन 120 एयरबस विमान खरीदने पर राजी हो गया है। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ और व्यापारिक समझौते अभी प्रक्रिया में हैं। दोनों नेताओं ने कहा कि वे आपसी रिश्तों को और मज़बूत करना चाहते हैं। बातचीत के दौरान शी जिनपिंग ने मर्ज़ से कहा कि चीन जर्मनी के साथ संबंधों को “एक नए स्तर” तक ले जाने के लिए तैयार है।
यूक्रेन और ताइवान पर हुई चर्चा
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की बातचीत में अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। मर्ज़ ने कहा कि ताइवान को लेकर चीन जो भी कदम उठाए, वह शांतिपूर्ण तरीके से होना चाहिए।
मर्ज़ ने यह भी बताया कि उन्होंने चीन से कहा है कि वह यूक्रेन में चल रहे युद्ध को खत्म कराने के लिए रूस पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करे। यूरोप के कई नेता मानते हैं कि चीन इस दिशा में अभी पर्याप्त प्रयास नहीं कर रहा है। मर्ज़ ने कहा कि बीजिंग से आने वाले संदेशों को मॉस्को में गंभीरता से लिया जाता है।
बैठक के बाद दोनों देशों ने एक संयुक्त बयान जारी किया। इसमें कहा गया कि वे यूक्रेन में युद्धविराम और स्थायी शांति के प्रयासों का समर्थन करते हैं, निष्पक्ष व्यापार और एक-दूसरे के बाजारों तक समान पहुंच को जरूरी मानते हैं, और बातचीत के जरिए सभी चिंताओं को सुलझाने के लिए तैयार हैं।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन द्वारा कई देशों पर लगाए गए टैरिफ के बाद, हाल के महीनों में कई पश्चिमी नेता बीजिंग का दौरा कर चुके हैं। इनमें ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी शामिल हैं।
इजरायली राष्ट्रपति को भारत आने का न्योता, पीएम मोदी बोले- दिल्ली से आगे भी जाना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को इजरायल के राष्ट्रपति इसाहक हर्ज़ोग से मुलाकात की। मुलाकात के बाद पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच गहरे रिश्तों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें इजरायल में कितना प्यार और सम्मान मिला। पढ़ें पूरी खबर।
