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नए प्रतिबंधों के जरिये रूस से निपटेंगे G7 देश, यूक्रेन को 29.5 अरब डॉलर की सहायता देने का ऐलान

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने रविवार को ट्वीट कर कहा था कि G-7 के सदस्य देश रूस से सोने के आयात पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा करने जा रहे हैं।

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G7 leaders (Photo Credit: Bundeskanzler Olaf Scholz/ twitter)

जर्मनी के म्यूनिख में G-7 देशों का सम्मेलन शुरू हो चुका है। यह सम्मेलन 26 जून से 28 जून तक चलेगा। दुनिया के सात विकसित देश इसका हिस्सा हैं। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी G-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए जर्मनी पहुंच गए हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से मची उथल-पुथल के बीच G-7 देशों ने रूस पर बड़े पैमाने पर कुछ नए प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है।

G-7 देशों के लीडर्स ने सोमवार को कहा कि वे रूस के खिलाफ लगाए गए व्यक्तिगत प्रतिबंध जारी रखना चाहते हैं। विनाशकारी रूस-यूक्रेन युद्ध की निंदा करते हुए G-7 लीडर्स ने यूक्रेन को 29.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर की सहायता देने का ऐलान किया। इस मदद से संकटग्रस्त यूक्रेन को अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने में मदद मिलेगी और यूक्रेनी लोगों को बुनियादी सेवाएं मुहैया की जा सकेंगी।

रूस से सोने के आयात पर प्रतिबंध: इसके साथ ही अमेरिका और सात प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं का समूह रूस से सोने के आयात पर प्रतिबंध लगाएगा। यह युद्ध के बाद से रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों में नवीनतम प्रतिबंध है। सोना रूस का दूसरा सबसे बड़ा निर्यात किया जाने वाला आइटम है और सोने के आयात पर प्रतिबंध लगाने से रूस के लिए वैश्विक बाजारों में भाग लेना कठिन हो जाएगा। ऐसे में सोने के बाजार में भागीदारी को रोककर रूस को वैश्विक अर्थव्यवस्था से अलग कर दिया जाएगा।

तेल के आयात पर पहले ही प्रतिबंध: G7 देशों ने कहा कि वे रूसी ऊर्जा पर निर्भरता को और कम करने के लिए उचित कदम उठाकर रूस का निर्यात राजस्व और कम करने की कोशिश करेंगे। G7 लीडर्स ने कहा कि हम वैश्विक अर्थव्यवस्था में सर्विस और टेक्नोलॉजी तक रूस की पहुंच को और सीमित करने की योजना बना रहे हैं। पश्चिमी देशों ने पहले ही रूस से तेल के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था।

जर्मनी के एलमौ में शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन, G7 देशों के प्रमुख नेताओं का मेन फोकस युद्धग्रस्त यूक्रेन को समर्थन प्रदान करने पर रहा। वहीं, रविवार को शिखर सम्मेलन के पहले दिन G-7 लीडर्स ने वैश्विक आर्थिक मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने एक साझा बयान में कहा, “सभी G7 देश उन संकटों को लेकर चिंतित हैं जिन्हें वर्तमान में दूर किया जाना है। कुछ देशों में विकास दर गिरना, बढ़ती महंगाई, कच्चे माल की कमी और सप्लाई चेन में व्यवधान जैसी समस्याएं आ रही हैं। ये कोई छोटी चुनौतियां नहीं हैं इसलिए इनके निदान के लिए सामूहिक प्रयास करना जरूरी है।”

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