Former PM Imran Khan Timeline: पाकिस्तानी सियासत में ‘साइफर’ I-0678′ के ‘लीक’ से भूचाल आ गया है। ऐसे दावा किया जा रहा है यह वही दस्तावेज है जिसका जिक्र इमरान खान ने सत्ता गिरने के वक्त किया था। साल 2022 के अप्रैल में अविश्वास प्रस्ताव लाकर सत्ता से बेदखल किए जाने के बाद इमरान ने आरोप लगाया था कि अमेरिका ने उन्हें सत्ता से हटाने की साजिश रची क्योंकि वह उनकी नीतियों के सामने घुटने टेकने को तैयार नहीं।
उन्होंने एक गुप्त दस्तावेज की मौजूदगी का दावा किया था। उनका दावा था कि उस दस्तावेज में अमेरिकी अधिकारियों द्वारा उनकी सरकार को गिराने की बात कही गई थी। हालांकि, इमरान खान ने उस दस्तावेज का मसौदा सार्वजनिक नहीं किया था। अब कथित तौर पर अमेरिकी मीडिया आउटलेट ड्रॉप साइट ने उस दस्तावेज को सार्वजनिक कर दिया है, जिसके बाद से पीटीआई समर्थक लगातार सरकार के घेर रहे हैं।
बता दें कि इमरान खान पहली बार 1992 में दुनिया भर में चर्चा में आए, जब उनकी कप्तानी में पाकिस्तान ने क्रिकेट वर्ल्ड कप जीता। इसके बाद वह देश के सबसे लोकप्रिय चेहरों में शामिल हो गए। क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद उन्होंने सामाजिक कार्यों में खुद को लगाया और फिर राजनीति में कदम रखा।
पाकिस्तान की राजनीति में एंट्री
साल 1996 में उन्होंने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) पार्टी की स्थापना की। शुरुआत में उनकी पार्टी को ज्यादा सफलता नहीं मिली, लेकिन भ्रष्टाचार विरोधी छवि और युवा वर्ग में बढ़ती लोकप्रियता ने धीरे-धीरे उन्हें राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा चेहरा बना दिया।
साल 2013 के आम चुनावों में पीटीआई ने मजबूत प्रदर्शन किया और इमरान खान पाकिस्तान की राजनीति में मुख्य विपक्षी नेता बनकर उभरे। इसके बाद उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के खिलाफ बड़े आंदोलन चलाए।
आखिरकार जुलाई 2018 के आम चुनाव में पीटीआई सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई और इमरान खान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने। सत्ता में आने पर उन्होंने जनता भ्रष्टाचार खत्म करने, अर्थव्यवस्था सुधारने और “नया पाकिस्तान” बनाने का वादा किया। हालांकि, इमरान खान की सरकार को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
इमरान के शासन काल पाकिस्तान में महंगाई तेजी से बढ़ी, बेरोजगारी बढ़ी और देश आर्थिक संकट में फंस गया। अन्तर्राष्ट्रीय मौद्रिक कोष (IMF) से कर्ज लेने को लेकर भी सरकार की आलोचना हुई। विपक्ष लगातार आरोप लगाता रहा कि इमरान खान सेना के समर्थन से सत्ता में आए हैं। दूसरी ओर, इमरान खान खुद को एक मजबूत राष्ट्रवादी नेता के रूप में पेश करते रहे।
2022 में लाया गया अविश्वास प्रस्ताव
इसी बीच मार्च 2022 में पाकिस्तान की राजनीति ने बड़ा मोड़ लिया। विपक्ष ने इमरान खान सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। इसी दौरान इमरान खान ने दावा किया कि अमेरिका उनकी सरकार गिराने की साजिश रच रहा है। उन्होंने एक गुप्त राजनयिक दस्तावेज यानी ‘साइफर’ का जिक्र किया और कहा कि विदेशी ताकतें उन्हें सत्ता से हटाना चाहती हैं क्योंकि वह अमेरिका की नीतियों के आगे नहीं झुके।
9, अप्रैल 2022 में संसद में अविश्वास प्रस्ताव पास हो गया और इमरान खान को प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ा। उनके हटने के अगले ही दिन शहबाज शरीफ प्रधानमंत्री बने। पाकिस्तान के इतिहास में यह पहली बार था जब किसी प्रधानमंत्री को अविश्वास प्रस्ताव के जरिए हटाया गया। सत्ता से हटने के बाद भी इमरान खान की लोकप्रियता कम नहीं हुई। उन्होंने “हकीकी आजादी” आंदोलन शुरू किया और देशभर में रैलियां कीं।
उन्होंने शहबाज शरीफ सरकार को “इम्पोर्टेड हुकूमत” कहा और जल्द चुनाव कराने की मांग उठाई। उनकी रैलियों में भारी भीड़ जुटने लगी, खासकर युवाओं और शहरी इलाकों में उन्हें जबरदस्त समर्थन मिला।
सेना से रिश्तों में दरार
सत्ता से हटने के बाद पहली बार इमरान खान ने खुले तौर पर पाकिस्तान की सैन्य व्यवस्था पर सवाल उठाने शुरू किए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ शक्तिशाली लोग राजनीतिक फैसलों में हस्तक्षेप कर रहे हैं। यह वही दौर था जब पाकिस्तान की राजनीति में “न्यूट्रल” शब्द चर्चा में आया। इमरान खान ने सेना के खुद को “न्यूट्रल” कहने पर तंज कसते हुए कहा था कि “जानवर ही न्यूट्रल होते हैं।” इसके बाद सेना और इमरान खान के रिश्तों में खुली दूरी दिखाई देने लगी।
3 नवंबर 2022 में पंजाब प्रांत के वजीराबाद में एक रैली के दौरान इमरान खान पर गोलीबारी हुई, जिसमें वह घायल हो गए। गोलीबारी में उनके पैर में चोट लगी जबकि एक समर्थक की मौत हो गई। हमले के बाद इमरान खान ने तत्कालीन प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, गृह मंत्री राणा सनाउल्लाह और ISI के एक वरिष्ठ अधिकारी पर आरोप लगाए। हालांकि सरकार और सेना ने इन आरोपों को खारिज कर दिया। इसके बाद पाकिस्तान में राजनीतिक तनाव और बढ़ गया।
गिरफ्तारी के बाद कई मामले दर्ज
वहीं, 9 मई 2023 को पाकिस्तान रेंजर्स ने इमरान खान को इस्लामाबाद हाईकोर्ट परिसर से गिरफ्तार कर लिया। उन पर भ्रष्टाचार समेत कई मामलों में जांच चल रही थी। गिरफ्तारी के बाद पूरे पाकिस्तान में पीटीआई समर्थकों ने हिंसक प्रदर्शन किए। पहली बार सेना मुख्यालय और सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमले हुए। लाहौर में कोर कमांडर हाउस में भी तोड़फोड़ की गई।
पाकिस्तान की सेना ने इसे “ब्लैक डे” बताया और इसके बाद पीटीआ ईपर बड़ा एक्शन शुरू हुआ। पार्टी के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। वहीं, इमरान खान पर एक के बाद एक कई केस दर्ज किए गए। इनमें भ्रष्टाचार, गोपनीय दस्तावेज लीक करने, आतंकवाद भड़काने और सरकारी संस्थाओं के खिलाफ बयान देने जैसे आरोप शामिल थे।
सबसे चर्चित मामला “तोशाखाना केस” बना, जिसमें उन पर विदेशी नेताओं से मिले महंगे उपहार बेचने का आरोप लगा। इसके अलावा “साइफर केस” में उन पर गोपनीय राजनयिक दस्तावेज सार्वजनिक करने का आरोप लगा। अगस्त 2023 में तोशाखाना मामले में इमरान खान को तीन साल सजा सुनाई गई और उन्हें जेल भेज दिया गया। इसके साथ ही चुनाव लड़ने पर भी रोक लगा दी गई।
जनवरी 2024 से इमरान खान की कानूनी मुश्किलें लगातार बढ़ती चली गईं। 30 जनवरी 2024 को इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने “साइफर केस” में इमरान खान और पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी को 10-10 साल की सजा सुनाई। उन पर गोपनीय सरकारी दस्तावेजों के गलत इस्तेमाल का आरोप था। हालांकि बाद में 3 जून 2024 को दोनों को इस मामले में बरी कर दिया गया।
वहीं, 31 जनवरी 2024 को इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी को एक अन्य तोशाखाना मामले में 14 साल की सजा सुनाई गई, लेकिन बाद में सबूतों की कमी के चलते उन्हें इस मामले में भी राहत मिल गई। 3 फरवरी 2024 को इमरान खान और बुशरा बीबी को इस्लामी विवाह कानूनों के उल्लंघन के आरोप में सात साल की सजा सुनाई गई।
इस बीच 1 अप्रैल 2024 को इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने इमरान खान की तीन साल की तोशाखाना सजा पर रोक लगा दी। इसके बाद 13 जुलाई 2024 को इमरान खान और उनकी पत्नी को गैरकानूनी विवाह मामले में भी बरी कर दिया गया।
कानूनी लड़ाइयों के बीच 20 नवंबर 2024 को इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने तोशाखाना-2 मामले में इमरान खान को जमानत दे दी। लेकिन उसी दिन लाहौर हाई कोर्ट ने 9 मई 2023 की हिंसा से जुड़े मामलों में उनकी अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। इसके कुछ दिन बाद, 24 नवंबर 2024 को पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने इमरान खान की रिहाई, पार्टी कार्यकर्ताओं की आजादी और 8 फरवरी 2024 के चुनावों में कथित धांधली की जांच की मांग को लेकर इस्लामाबाद की ओर देशव्यापी रैलियां और प्रदर्शन शुरू कर दिए। लेकिन इनका भी कोई असर नहीं पड़ा।
चुनाव चिन्ह ‘बैट’ भी छीना गया
फरवरी 2024 के आम चुनाव इमरान खान के जेल में रहते हुए लड़े गए। चुनाव से पहले पीटीआई का चुनाव चिन्ह “बैट” भी छीन लिया गया। इसके बावजूद पीटीआई समर्थित निर्दलीय उम्मीदवारों ने बड़ी संख्या में सीटें जीतीं। इससे साफ हुआ कि इमरान खान की लोकप्रियता अब भी बनी हुई है। हालांकि सरकार बनाने में पीटीआई सफल नहीं हो सकी और शहबाज शरीफ दोबारा प्रधानमंत्री बने।
अब कथित अमेरिकी राजनयिक दस्तावेज “केबल I-0678” लीक होने के बाद इमरान खान का विदेशी साजिश वाला दावा फिर चर्चा में आ गया। पार्टी समर्थकों का कहना है कि यह दस्तावेज साबित करता है कि अमेरिका इमरान खान की सरकार हटाने में भूमिका निभा रहा था। हालांकि, अमेरिका लगातार इन आरोपों से इनकार करता रहा है।
इमरान खान फिलहाल कई मामलों में जेल में हैं, लेकिन पाकिस्तान की राजनीति में उनका प्रभाव अब भी बना हुआ है। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है।
