फ्रांस सरकार ने मुस्लिम संगठन “मुस्लिम्स ऑफ फ्रांस” के शुक्रवार से शुरू हो रहे सालाना कार्यक्रम पर सुरक्षा कारणों से रोक लगा दी है। यह कार्यक्रम जो तीन से छह अप्रैल के बीच पेरिस–ले बुरजे एग्जीबिशन सेंटर (Paris–Le Bourget) में होने वाली थी।
पेरिस के पुलिस प्रमुख पैट्रिस फॉर (Patrice Faure) ने बताया कि यह फैसला देश के गृह मंत्री लॉरेंट नूनेज (Laurent Nunez) के कहने पर लिया गया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए यह कार्यक्रम सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता था, इसलिए इसे रद्द करना जरूरी समझा गया।
अधिकारियों का कहना है कि इस समय फ्रांस में सुरक्षा को लेकर काफी तनावपूर्ण माहौल है। देश में आतंकी हमले की आशंका बढ़ी हुई है और कई संवेदनशील जगहों पर पहले से ही कड़ी निगरानी रखी जा रही है। ऐसे में इतने बड़े स्तर पर लोगों का इकट्ठा होना कानून-व्यवस्था के लिए परेशानी खड़ी कर सकता था।
‘बैंक ऑफ अमेरिका’ पर हमले की साजिश
पुलिस प्रमुख ने यह भी कहा कि आने वाले दिनों में सड़कों पर पहले से ही भारी पुलिस बल तैनात रहेगा। इसलिए इस कार्यक्रम को अनुमति देने से हालात और मुश्किल हो सकते थे। सरकार का मानना है कि किसी भी तरह का जोखिम लेने से बेहतर है पहले ही एहतियात बरती जाए।
इस फैसले के पीछे हाल की एक घटना भी बड़ी वजह मानी जा रही है। पिछले हफ्ते पेरिस में बैंक ऑफ अमेरिका के दफ्तर पर बम हमले की साजिश को नाकाम किया गया था। इसके बाद से सुरक्षा एजेंसियां और ज्यादा सतर्क हो गई हैं। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे तनाव, खासकर अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच टकराव ने भी हालात को और संवेदनशील बना दिया है।
इस फैसले पर कार्यक्रम आयोजित करने वाली संस्था के प्रमुख मखलूफ मामेचे (Makhlouf Mameche) ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस रोक की जानकारी मिल गई है, लेकिन वे इससे सहमत नहीं हैं। उनकी संस्था अब इस फैसले के खिलाफ अदालत में अपील करेगी।फ्रांस सरकार का कहना है कि यह कदम सिर्फ सुरक्षा को ध्यान में रखकर उठाया गया है, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सके।
क्या है मुस्लिम्स ऑफ फ्रांस?
मुस्लिम्स ऑफ फ्रांस (Musulmans de France या MF) पहले यूनियन देज़ ऑर्गनाइजेशन इस्लामिक दे फ्रांस (UOIF) के नाम से जाना जाता था, फ्रांस का एक बड़ा मुस्लिम संगठन है और यह यूरोप में इस्लामिक संगठनों के संघ (Federation of Islamic Organizations in Europe) का फ्रांसीसी हिस्सा है। इसे तब के गृह मंत्री निकोलस सरकोजी ने Conseil Français du Culte Musulman में शामिल किया था, जिसकी वामपंथी और दक्षिणपंथी दोनों तरफ के लोगों ने आलोचना की थी। UOIF की स्थापना 1983 में मेउर्थ-ए-मोसेल में दो विदेशी छात्रों, अब्दल्लाह बेन मंसूर (ट्यूनीशिया) और महमूद जुहैर (इराक) ने लगभग 15 संगठनों को मिलाकर की थी, और 2005 तक यह लगभग 200 संगठनों तक फैल चुका था। इसका उद्देश्य फ्रांस के मुसलमानों की धार्मिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक, सामाजिक और मानवीय जरूरतों को पूरा करना है और यह अपनी वेबसाइट पर कहता है कि यह मुसलमानों की जिम्मेदार और सकारात्मक एकीकरण की समझ में भाग लेता है।
UOIF के पास लगभग 30 मस्जिदें हैं और यह 200 और मस्जिदों का संचालन करता है। यह यूरोपीय संगठन इस्लामिक फेडरेशन का हिस्सा है, जिसे कुछ खाड़ी देशों से फंड मिलता है और जिसका लक्ष्य यूरोपीय संदर्भ में इस्लाम को बढ़ावा देना है। इसका नेतृत्व यूनाइटेड किंगडम से अहमद अल-रावी करते हैं और यूरोपीय काउंसिल फॉर फतवा एंड रिसर्च उनकी मदद करती है, जो यूरोप के मुसलमानों के लिए सामूहिक फतवे जारी करती है। 7 नवंबर 2005 को UOIF ने नागरिक अशांति की निंदा करते हुए एक फतवा जारी किया जिसमें कहा गया कि किसी भी मुसलमान के लिए निजी या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या दूसरों की जिंदगी को खतरे में डालने वाली गतिविधियों में भाग लेना सख्त मना है।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान युद्ध को लेकर फ्रांस पर निशाना साधा है और कहा है कि फ्रांस इस संघर्ष में पर्याप्त सहयोग नहीं कर रहा। उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों पर व्यक्तिगत टिप्पणी भी की। ट्रंप ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति का मजाक उड़ाते हुए कहा, “मैंने फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों को फोन किया, जिनकी पत्नी उनके साथ बेहद बुरा बर्ताव करती हैं और वे अभी भी जबड़े पर लगे एक जोरदार मुक्के से उबर रहे हैं।” पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
