अमेरिका की वायुसेना के पूर्व पायलट जेराल्ड एडी ब्राउन जूनियर को गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया गया। उन पर आरोप है कि उन्होंने बिना सरकारी अनुमति के चीन की सेना के पायलटों को ट्रेनिंग दी। यह अमेरिकी कानून आर्म्स एक्सपोर्ट कंट्रोल एक्ट (AECA) का उल्लंघन माना जाता है। इस बारे में जानकारी अमेरिकी न्याय विभाग ने दी है।
65 साल के ब्राउन, जिन्हें “रनर” के नाम से भी जाना जाता है, अमेरिकी नागरिक हैं। वे पहले अमेरिकी वायुसेना में एफ-35 लड़ाकू विमान के पायलट और प्रशिक्षक रह चुके हैं। उन्होंने कई युद्ध मिशनों की अगुवाई भी की थी। उन्हें इंडियाना राज्य के जेफरसनविल शहर से गिरफ्तार किया गया। 26 फरवरी को उन्हें इंडियाना के साउदर्न डिस्ट्रिक्ट की अदालत में मजिस्ट्रेट जज के सामने पेश किया जाएगा।
बिना अनुमति विदेशी सेना को ट्रेनिंग देना गैरकानूनी कार्य
अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के सहायक अटॉर्नी जनरल जॉन ए. आइजनबर्ग ने कहा कि वायुसेना ने ब्राउन को देश की सुरक्षा के लिए एक बेहतरीन फाइटर पायलट के रूप में तैयार किया था। लेकिन अब उन पर चीन के सैन्य पायलटों को प्रशिक्षण देने का आरोप है। उन्होंने साफ कहा कि अगर कोई अमेरिकी नागरिक — चाहे वह सैनिक हो या आम नागरिक — किसी विदेशी सेना को ट्रेनिंग देता है, तो उसके लिए विदेश मंत्रालय से लाइसेंस लेना जरूरी होता है। बिना अनुमति ऐसा करना गैरकानूनी है।
एफबीआई के सहायक निदेशक रोमन रोज़ाव्स्की ने भी बयान जारी कर कहा कि चीन की सरकार अमेरिका की सेना के मौजूदा और पूर्व सदस्यों की विशेषज्ञता का फायदा उठाकर अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
शिकायत के मुताबिक, ब्राउन चीन की वायुसेना के पायलटों को लड़ाकू विमान चलाने की ट्रेनिंग दे रहे थे। चीन की वायुसेना को पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स (PLAAF) कहा जाता है। इस तरह की ट्रेनिंग को अंतरराष्ट्रीय हथियार नियम (ITAR) के तहत ‘डिफेंस सर्विस’ माना जाता है। ब्राउन को इसके लिए अमेरिकी विदेश मंत्रालय के डिफेंस ट्रेड कंट्रोल विभाग (DDTC) से लाइसेंस लेना जरूरी था, जो उन्होंने नहीं लिया।
रिपोर्ट के अनुसार, ब्राउन का यह अनुबंध स्टीफन सू बिन नाम के एक चीनी नागरिक के जरिए तय हुआ था। सू बिन 2016 में अमेरिका की एक अदालत में दोषी मान चुका है कि उसने चीन के लिए अमेरिकी रक्षा कंपनियों के कंप्यूटर नेटवर्क हैक करने और संवेदनशील सैन्य जानकारी चुराने की साजिश रची थी। दिसंबर 2023 में ब्राउन चीन गए थे, जहां उन्होंने चीनी सैन्य पायलटों को ट्रेनिंग देना शुरू किया। वे फरवरी 2026 की शुरुआत में अमेरिका लौटे थे। अमेरिका लौटते ही उन पर कार्रवाई की गई।
न्याय विभाग ने बताया कि ब्राउन का मामला कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले सितंबर 2017 में पूर्व अमेरिकी मरीन कॉर्प्स पायलट डेनियल एडमंड डग्गन पर भी इसी तरह के आरोप लगाए गए थे। डग्गन पर भी बिना अनुमति चीन के सैन्य पायलटों को ट्रेनिंग देने और अंतरराष्ट्रीय मनी लॉन्ड्रिंग की साजिश रचने का आरोप था। अमेरिकी एजेंसियों का कहना है कि वे देश की सैन्य तकनीक और रणनीतिक बढ़त को सुरक्षित रखने के लिए सख्त कदम उठाते रहेंगे। अगर कोई भी व्यक्ति कानून तोड़कर विदेशी सेना की मदद करता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित किया है। उनकी तरफ से पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन पर जमकर निशाना साधा गया है, उन्होंने अपनी सरकार की भी तारीफ की है। उनका कहना है कि अमेरिका ने पिछले कुछ समय में ऐसे बदलाव देखे हैं जो सदियों में कभी नहीं हुए। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
