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‘पाकिस्तान में रची गई थी मुंबई हमले की साजिश, कराची से दिए गए निर्देश’

मुंबई आतंकी हमले के मुख्य जांचकर्ता ने कहा है कि इस हमले की साजिश पाकिस्तान में रची गई और अभियान भी इसी देश से छेड़ा गया तथा कराची स्थित ऑपरेशन रूम से इस अभियान को निर्देश दिये गये थे...

Author August 5, 2015 01:15 am
26/11 मुंबई हमले में 166 लोग मारे गए थे।

पाकिस्तान के लिए शर्मिंदा करने वाला खुलासा करते हुए उसके मुंबई आतंकी हमले के मुख्य जांचकर्ता ने कहा है कि इस हमले की साजिश पाकिस्तान में रची गई और अभियान भी इसी देश से छेड़ा गया तथा कराची स्थित ऑपरेशन रूम से इस अभियान को निर्देश दिये गये थे।

वर्ष 2008 के हमले में 166 लोगों के मारे जाने के कुछ हफ्तों बाद संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) के प्रमुख बनाए गए शीर्ष पुलिस अधिकारी तारिक खोसा ने ‘डॉन’ अखबार के लिए लिखे रहस्योदघाटन करने वाले लेख में साजिश और इसकी जांच के बारे में विस्तृत जानकारी दी और उस बात की पुष्टि की जो भारत लंबे समय से कह रहा है।

पाकिस्तान सरकार और इंटरपोल में शीर्ष पदों पर रह चुके और वर्ष 2007 में पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की हत्या मामले में आपराधिक जांच शुरू करने वाले खोसा ने लिखा, ‘‘पाकिस्तान को मुंबई हमले से निपटना होगा जिसकी साजिश उसकी जमीन पर रची गई और अभियान भी यहीं से चलाया गया। इसके लिए सच का सामना करने और गलतियां स्वीकारने की जरूरत है।’’

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उन्होंने मांग की कि पाकिस्तान की सरकारी सुरक्षा मशीनरी को सुनिश्चित करना चाहिए कि ‘‘घातक आतंकी हमलों’’ के हमलावरों और साजिशकर्ताओं को सजा मिले।

खोसा ने कहा कि यह मामला लंबे समय से अटका हुआ है और प्रतिवादियों द्वारा देर करने की नीति, सुनवाई करने वाले न्यायाधीश का बार बार बदलना, मामले के अभियोजक की हत्या और कुछ अहम गवाहों द्वारा वास्तविक गवाही से पलटना अभियोजकों के लिए गंभीर झटके हैं।

इस मामले के तथ्य पेश करते हुए खोसा ने लिखा, ‘‘पहली बात, अजमल कसाब पाकिस्तानी नागरिक था, जिसके रहने के स्थान, शुरुआती पढ़ाई लिखाई और एक प्रतिबंधित आतंकी संगठन में उसके शामिल होने के बारे में जांचकर्ताओं ने सबूत जुटाए।’’

खोसा ने लिखा, ‘‘दूसरी बात, लश्कर ए तैयबा के आतंकवादियों को सिंध के थट्टा के पास प्रशिक्षण दिया गया और वहां से समुद्र मार्ग से उन्हें भेजा गया। जांचकर्ताओं ने प्रशिक्षण शिविर की पहचान कर ली थी और उसका पता लगा लिया था।’’

खोसा ने कहा कि मुंबई में प्रयोग किये गये विस्फोटक उपकरणों के आवरण इस प्रशिक्षिण शिविर से बरामद हुए और उनका मिलान भी हो गया। उन्होंने लिखा, ‘‘तीसरी बात, आतंकवादी जिस एक भारतीय नाव से मुंबई पहुंचे, उन्होंने उसका अपहरण करने के लिए जिस मछली पकड़ने वाली नाव का इस्तेमाल किया, उसे बंदरगाह पर वापस लाया गया, इसके बाद इसे रंगा गया और छिपाया गया। जांचकर्ताओं ने इस नाव को बरामद कर लिया और इसे आरोपियों से जोड़ा।’’

खोसा ने कहा, ‘‘चौथी बात, आतंकवादियों द्वारा मुंबई बंदरगाह के पास छोड़ी गई पेटेंट नंबर वाली नौका के इंजन से जांचकर्ताओं ने पता लगाया कि इसे जापान से आयात करके लाहौर और फिर कराची स्पोर्ट्स शॉप पर लाया गया जहां से लश्कर ए तैयबा से जुड़े आतंकवादी ने इसे नौका के साथ खरीदा।’’

खोसा ने धन की आमद के बारे में भी बात की जिसका संबंध गिरफ्तार आरोपियों से निकला। उन्होंने लिखा, ‘‘पांचवीं बात, कराची में जिस अभियान कक्ष से अभियान को निर्देश दिये गये, उसकी भी पहचान हो गई और जांचकर्ताओं ने उसका पता लगाया। इंटरनेट प्रोटोकाल पर आवाज के जरिये संवाद का भी पता लग गया।’’

खोसा ने कहा, ‘‘छठी बात, कथित कमांडर और उसके सहयोगियों की भी पहचान करके उन्हें गिरफ्तार किया गया। सातवीं बात, विदेश स्थित कुछ फाइनेंसर और मददगारों को गिरफ्तार करके सुनवाई का सामना कराने के लिए लाया गया।’’

उन्होंने लिखा कि पाकिस्तान की जनता को प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और उनके भारतीय समकक्ष नरेंद्र मोदी के बीच पिछले महीने रूस के उफा में हुई बैठक से जुड़े घटनाक्रम का स्वागत करना चाहिए। उन्होंने पाकिस्तान सरकार से अच्छे और बुरे तालिबान के बीच अंतर खत्म करने के लिए भी कहा।

खोसा ने लेख में लिखा कि अच्छे और बुरे तालिबान के बीच दोहरेपन और भेद को मिरामशाह से मुरीदके और कराची से क्वेटा तक खत्म किया जाना चाहिए।

मुंबई हमले की जांच पर विस्तार से बताते हुए खोसा ने कहा कि भारतीय पुलिस अधिकारियों के साथ कई जांच डोजियरों की अदला बदली करने के बाद निचली अदालत से रिकॉर्डेड आवाज से तुलना के लिए कथित कमांडर और उसके सहयोगियों के आवाज के नमूने प्राप्त करने की मंजूरी देने का अनुरोध किया गया।

खोसा ने कहा, ‘‘अदालत ने आदेश दिया कि आरोपियों की रजामंदी ली जाए। जाहिर तौर पर, संदिग्धों ने इंकार कर दिया। इसके बाद रजामंदी नहीं मिलने के बावजूद आवाज के नमूने लेने के लिए जांचकर्ताओं को अधिकृत करने को लेकर एक सत्र अदालत में एक याचिका दायर की गई। उस समय लागू साक्ष्य अधिनियम या आतंकवाद निरोधक कानून में इस तरह का कोई प्रावधान नहीं होने के चलते अनुरोध ठुकरा दिया गया।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इसके बाद जांचकर्ता अपील करने उच्च न्यायालय गये। मुझे लगता है कि वह अपील अब भी लंबित है। न्यायपूर्ण सुनवाई अधिनियम 2013 इस तरह के तकनीकी सबूतों की स्वीकार्यता की व्यवस्था करता है। हालांकि पुराने समय से इसका क्रियान्वयन बहस का बिन्दु है।’’

मोदी शरीफ बैठक के बाद पांच सूत्रीय ढांचा पेश करने वाले एक पृष्ठ के संयुक्त बयान में कहा गया, ‘दोनों पक्ष आवाज के नमूने उपलब्ध कराने जैसी अतिरिक्त सूचनाओं सहित (पाकिस्तान में) मुंबई मामले की सुनवाई तेज करने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए सहमत हैं।’’

हालांकि बाद में पाकिस्तान ने इस मामले में भारत से ‘‘और सबूत तथा जानकारी’’ देने के लिए कहा। खोसा ने मुंबई मामले को ‘‘अद्वितीय’’ मामला बताया क्योंकि यह एक ऐसी घटना है जिसमें दो क्षेत्राधिकार शामिल हैं और दो जगह सुनवाई भी हो रही है। उन्होंने राय दी कि दोनों पक्षों के कानूनी विशेषज्ञों को एक दूसरे पर अंगुली उठाने के बजाय एक साथ बैठने की जरूरत है।

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