अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और एस जयशंकर के बीच वॉशिंगटन में अहम मुलाकात हुई है। इस मुलाकात में रूसी तेल से लेकर टैरिफ तक कई मुद्दों पर मंथन किया गया है। किस तरह से दोनों ही देशों के रिश्तों को मजबूत किया जाए, इस पर भी चर्चा हुई है। दोनों ही नेताओं ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए इस मुलाकात के बारे में विस्तृत जानकारी दी है।
जयशंकर ने क्या कहा?
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने लिखा कि भारत–अमेरिका रणनीतिक साझेदारी के कई पहलुओं पर विस्तृत चर्चा हुई, जिनमें व्यापार, ऊर्जा, परमाणु सहयोग, रक्षा, महत्वपूर्ण खनिज और प्रौद्योगिकी शामिल हैं। दोनों पक्षों ने साझा हितों को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई और जल्द ही और बैठकें करने का फैसला किया। अब जयशंकर ने अगर रिश्तों को मजबूत करने की बात कही तो मार्को रुबियो ने भी अहम जानकारी दी। उन्होंने कहा कि दोनों ही देश नए आर्थिक अवसर खोलने के लिए काम करने जा रहे हैं।
मार्को रुबियो ने क्या कहा?
मार्को रुबियो ने पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई बातचीत की भी तारीफ की और इसे काफी निर्णायक बताया। अमेरिकी विदेश मंत्रालयके प्रमुख उप-प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने भी एक बयान जारी किया। उन्होंने बोला कि महत्वपूर्ण खनिजों की खोज, खनन और प्रसंस्करण के क्षेत्र में किस तरह से द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाया जाए, इस पर चर्चा की गई। टॉमी के मुताबिक दोनों लोकतंत्र कैसे मिलकर साथ में काम करें, इस पर भी जयशंकर और रुबियो के बीच मंथन हुआ है।
भारत के ‘आलोचक’ ने क्या कहा?
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेन्ट ने भी इस मुलाकात को लेकर कई बातें कही हैं। एक पोस्ट में उन्होंने लिखा कि सप्लाई चेन को कैसे मजबूत बनाया जाए, आर्थिक सुरक्षा से जुड़े आपसी हितों को कैसे सुरक्षित रखा जाए, इस पर चर्चा हुई है। बड़ी बात यह है कि बेसेंन्ट वहीं शख्स हैं जिन्होंने भारत द्वारा आयात किए जा रहे रूसी तेल को एक बड़ा मुद्दा बनाया था। उन्होंने तो यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौते को भी निराशाजनकर करार दिया था।
पीएम मोदी-ट्रंप के बीच क्या बातचीत?
जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 फरवरी को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर यह दावा किया कि भारत और अमेरिका के बीच एक नया व्यापार समझौता हो गया है। यह ऐलान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत के बाद किया। ट्रंप के मुताबिक, इस कथित समझौते के तहत अमेरिका भारतीय सामान पर लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा जबकि भारत अमेरिकी उत्पादों पर अपने टैरिफ और नॉन-टैरिफ बैरियर शून्य करने की दिशा में कदम उठाएगा।
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