ताज़ा खबर
 

आतंकवाद से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाएंगे भारत और अफ्रीका

आतंकवाद के फैलाव का जिक्र करते हुए भारत ने 54 अफ्रीकी देशों से खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान और प्रशिक्षण के जरिए आतंकवाद से निपटाने के तरीकों पर सहयोग बढ़ाने की वकालत की है..

Author नई दिल्ली | October 28, 2015 1:29 AM

वैश्विक स्तर पर आतंकवादी संगठनों में बढ़ते संपर्क के कारण आतंकवाद के फैलाव का जिक्र करते हुए भारत ने 54 अफ्रीकी देशों से खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान और प्रशिक्षण के जरिए आतंकवाद से निपटाने के तरीकों पर सहयोग बढ़ाने की वकालत की है।

यहां तीसरे भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन की मंत्री-स्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में भारत की स्थायी सदस्यता की जोरदार वकालत करते हुए कहा कि भारत और अफ्रीका के करीब 2.5 अरब लोगों को इस विश्व संस्था में उनकी वाजिब जगह से वंचित नहीं रखा जा सकता। उन्होंने कहा कि हमारे सभी देश खुद को आतंकवाद के बढ़ते प्रकोप का सामना करते पा रहे हैं। राज्येतर तत्वों और सीमा पार आतंकवाद की समस्या ने एक नया रूप ले लिया है, इस चुनौती का पैमाना काफी बड़ा है और इससे देशों की शांति स्थिरता कमजोर हो रही है।

उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर ऐसे आतंकवादी संगठनों के बीच बढ़ते रिश्तों के मद्देनजर हमें खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान, प्रशिक्षण एवं अन्य उपायों के जरिए सहयोग बढ़ाना चाहिए ताकि इस गंभीर समस्या से निपटा जा सके। हम यह भी उम्मीद करते हैं कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के खिलाफ एक व्यापक करार को जल्दी से जल्दी अपनाने में सहयोग करेगा। आइएसआइएस और बोको हराम जैसे आतंकवादी संगठनों के बढ़ते खतरों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय में बढ़ती चिंता की पृष्ठभूमि में सुषमा ने यह बयान दिया है।

विदेश मंत्री ने ऊर्जा, व्यापार एवं सुरक्षा जैसे कई प्रमुख क्षेत्रों के बारे में भी बात की जहां दोनों पक्ष तालमेल कर सकते हैं और बहुपक्षीय मंच पर साथ मिल कर काम करने के अलावा सहयोग बढ़ा सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीयों और अफ्रीकियों की जनसंख्या 2.5 अरब के करीब है, फिर भी हमारे देशों को वैश्विक प्रशासन की संस्थाओं में उचित प्रतिनिधित्व से दूर रखा गया है। भारत और अफ्रीका को अब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के उनके वाजिब हक से दूर नहीं रखा जा सकता।

उन्होंने कहा कि हम ऐसी शासकीय संरचना से न्यायोचित व्यवहार की उम्मीद कैसे कर सकते हैं जिसमें पूरा अफ्रीकी महाद्वीप और एक ऐसा देश शामिल नहीं हो, जो मानवीयता के छठे हिस्से का प्रतिनिधित्व करता हो? वैश्विक संस्थाओं में लोकतांत्रिक सुधारों को जरूरी बताते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा का 70वां सत्र लंबे समय से लंबित पड़े इन मुद्दों पर ठोस परिणाम हासिल करने के लिए सुनहरा मौका है। जब तक हम ज्यादा लोकतांत्रिक वैश्विक प्रशासन की संरचनाएं स्थापित नहीं करेंगे, इस ग्रह की सामूहिक शांति एवं समृद्धि के लिए जरूरी ऐसी अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एवं विकास संरचनाएं हमसे दूर ही रहेंगी जो ज्यादा समानता पर आधारित और न्यायोचित हों।

सुषमा ने कहा कि अपर्याप्त विकास एवं असुरक्षा के विशाल क्षेत्रों में समृद्धि हासिल नहीं की जा सकेगी। उन्होंने कृषि, शिक्षा एवं कौशल विकास, ऊर्जा एवं आधारभूत संरचना, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी जैसे परंपरागत क्षेत्रों के अलावा नीली या महासागरीय अर्थव्यवस्था और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भी भारत और अफ्रीका की ज्यादा साझेदारी की वकालत की। संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा मिशनों में भारत के सबसे ज्यादा एक लाख 80 हजार सैनिकों की भागीदारी का जिक्र करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले ही घोषणा की है कि भारत संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा अभियानों में अपनी भागीदारी और बढ़ाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारत अपनी संस्थाओं और अपने मैदानों में अफ्रीकी शांतिरक्षकों को प्रशिक्षण भी देगा।

सुषमा स्वराज ने कहा कि भारत और अफ्रीका को केन्या में विश्व व्यापार संगठन के दसवें सम्मेलन और पेरिस में जलवायु परिवर्तन पर होने वाली 21वीं कांफ्रेंस आॅफ पार्टीज (सीओपी) से पहले एक साथ काम करने की जरूरत है, क्योंकि इस बाबत दोनों की चिंताएं और दोनों के हित एक जैसे हैं। हमारे वार्ताकार अभी बॉन में सहयोग कर रहे हैं। हम समानता एवं साझा हितों और अलग-अलग जिम्मेदारियों के आधार पर एक महत्वाकांक्षी और समग्र जलवायु परिवर्तन समझौते को अंतिम रूप देने के प्रति उत्सुक हैं।

लगातार ब्रेकिंग न्‍यूज, अपडेट्स, एनालिसिस, ब्‍लॉग पढ़ने के लिए आप हमारा फेसबुक पेज लाइक करेंगूगल प्लस पर हमसे जुड़ें  और ट्विटर पर भी हमें फॉलो करें

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App