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इन पांच जजों ने नवाज शरीफ को भ्रष्‍ट करार कर किया बर्खास्‍त, 540 पन्‍नों में लिखा गया फैसला

इसी साल अप्रैल में इन जजों के बीच फैसले को लेकर मत विभेद सामने आए थे। तब तीन जजों ने नवाज शरीफ के खिलाफ जबकि दो जजों ने शरीफ के पक्ष में अपनी बात रखी थी।

पाकिस्तान के पूर्व पीएम नवाज शरीफ

पनामा पेपर लीक मामले में पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को भ्रष्ट करार देकर पद से बर्खास्त कर दिया है। शरीफ की बर्खास्तगी का फैसला सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की एक खंडपीठ ने किया। इन जजों में जस्टिस आसिफ सईद खान खोसा, जस्टिस गुलजार अहमद, जस्टिस एजाज अफजल खान, जस्टिस इजाज उल अहसन और जस्टिस शेख अजमत सईद शामिल थे। इन जजों ने 540 पन्नों में फैसला लिखा है।  इसी साल अप्रैल में इन जजों के बीच फैसले को लेकर मत विभेद सामने आए थे। तब तीन जजों ने नवाज शरीफ के खिलाफ जबकि दो जजों ने शरीफ के पक्ष में अपनी बात रखी थी।

जस्टिस आसिफ सईद खान खोसा: जस्टिस खोसा साल 2010 में सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त किए गए थे। ये पनामा पेपर लीक मामले की सुनवाई करनेवाली खंडपीठ की अध्यक्षता कर रहे थे। इन्होंने 18 वर्षों के दौरान करीब 18 हजार मामलों की सुनवाई की है। अप्रैल में जस्टिस खोसा नवाज शरीफ को बर्खास्त करने के खिलाफ थे।

जस्टिस गुलजार अहमद: जस्टिस अहमद ने अपने करियर की शुरुआत सिंध हाईकोर्ट में एक वकील के तौर पर की थी। इसके बाद वो इसी हाईकोर्ट की बार एसोसिएशन में मानद सचिव बनाए गए। बाद में साल 2002 में वो सिंध हाईकोर्ट के जज बनाए गए। फिर 2011 में सीनियर जज बने। नवंबर 2011 में ही सुप्रीम कोर्ट में जज के तौर पर पदोन्नत हुए। जस्टिस अहमद भी जस्टिस खोसा की तरह शरीफ के प्रति नरम रुख रखनेवालों में थे।

जस्टिस एजाज अफजल खान: जस्टिस अफजल खान ने 1977 में खैबर लॉ कॉलेज से स्नातक की उपाधि ली है। इसके लंबे समय बाद वो साल 1991 में पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट में वकील के तौर पर एनरौल हुए। इन्होंने नौ साल तक पेशावर हाईकोर्ट में बतौर जज सेवा दी। इसके बाद साल 2009 में इन्हें पदोन्नति देकर हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाया गया। बाद में साल 2011 में जस्टिस खान सुप्रीम कोर्ट के जज बने। इन्होंने ही इस मामले में 540 पन्नों का फैसला लिखा है।

जस्टिस इजाज उल अहसन: पंजाब यूनिवर्सिटी लॉ कॉलेज से एलएलबी करने वाले जस्टिस अहसन न्यूयॉर्क के कॉरनेल यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रैज्यूएट हैं। इन्हें साल 2009 में लाहौर हाईकोर्ट में जज बनाया गया लेकिन साल 2011 में जाकर इनकी सेवा स्थाई हुई। जस्टिस अहसन साल 2015 में लाहौर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने फिर जून 2016 में उन्हें प्रोन्नति देकर सिप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया।

जस्टिस शेख अजमत सईद: जस्टिस सईद 1980 में लाहौर हाईकोर्ट में वकील के तौर पर एनरॉल हुए थे। लाहौर हाईकोर्ट में बहुत सारे हाई प्रोफाइल केसों से ये जुड़े रहे। साल 2004 में ये लाहौर हाईकोर्ट में एडिशनल जज बनाए गए। बाद में 2012 में ये सुप्रीम कोर्ट में जज बने।

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