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स्पेन : गैंगरेप कर बनाया वीडियो फिर भी बलात्कार के आरोपों से बरी, कई शहरों में विरोध प्रदर्शन

अदालत में एक जज ने तो यहां तक कह दिया कि इन लोगों को अन्य सभी आरोपों से बरी कर दिया जाए और सिर्फ लड़की का फोन चुराने का दोषी करार दिया जाए। लेकिन बेंच के अन्य दो जजों ने उन्हें यौन उत्पीड़न का दोषी करार दिया।

Author April 29, 2018 1:30 AM
पीड़िता के पक्ष में मैड्रिड, बार्सिलोना, सेविल और एलिकांटे समेत दर्जनों शहरों में हजारों लोग प्रदर्शन करने सड़कों पर निकले।(फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)

महिलाओं के खिलाफ हिंसा और बलात्कार की समस्या से हर देश जूझ रहा है। कहीं कम तो कहीं ज्यादा। यूरोप के एक देश स्पेन में भी इन दिनों एक गैंग रेप के मामले को लेकर लोग सड़कों पर उतर आए हैं। लोग पांच अभियुक्तों को सामूहिक बलात्कार के आरोपों से बरी कर देने के अदालत के फैसले का विरोध कर रहे हैं। अदालत ने इन लोगों को सामूहिक बलात्कार की बजाय यौन उत्पीड़न का दोषी पाया और उसके लिए उन्हें नौ साल की सजा सुनाई गई। लेकिन प्रदर्शनकारी कह रहे हैं कि यह उत्पीड़न नहीं, बलात्कार है। स्पेन के कानून में यौन उत्पीड़न को बलात्कार की तुलना में कम गंभीर अपराध माना जाता है। यौन उत्पीड़न में हिंसा और धमकी देना शामिल नहीं होता जबकि बलात्कार में होता है। लोग इस बात को लेकर गुस्सा हैं कि जो मामला उन्हें एक खुली किताब जैसा नजर आता है, उसमें ऐसा फैसला क्यों सुनाया गया। अभियोजन और बचाव पक्ष दोनों ही इस फैसले के खिलाफ अपील करने का एलान कर चुके हैं। लेकिन हजारों लोग पीड़िता के पक्ष में मैड्रिड, बार्सिलोना, सेविल और एलिकांटे समेत दर्जनों शहरों में प्रदर्शन करने सड़कों पर निकले और इस लड़ाई को अंजाम तक ले जाने की बात कर रहे हैं।

घटना 2016 की है जो पाम्पलोना शहर में पारंपरिक बुल फेस्टिवल के दौरान घटी। सेविल शहर के पांच युवकों ने मैड्रिड की रहने वाली पीड़ित पर न सिर्फ यौन हमला किया, बल्कि अपने मोबाइल से उसके वीडियो भी बनाए। मानवाधिकार कार्यकर्ता और राजनेता सवाल उठा रहे हैं कि क्या ऐसी घटना को बलात्कार के सिवाय कुछ और नहीं कहा जा सकता है जिसमें पांच लोग एक युवती के साथ जबरन सेक्स कर रहे हैं। पुलिस की रिपोर्ट कहती है कि इन पांचों ने लड़की के आसपास घेरा बनाया, उसके कपड़े हटाए और उसके साथ सेक्स करने लग गए। इस घटना के कुल सात वीडियो बनाए गए। इतना ही नहीं, इनमें से एक व्यक्ति बाद में एक व्हाट्सऐप ग्रुप पर इस बारे में शेखी बखारता हुआ भी मिला और उसने जल्द वीडियो शेयर करने का वादा भी किया। मुकदमे के दौरान दी गई गवाहियों के अनुसार आरोपियों ने पीड़िता को कार में चलने के लिए कहा था, लेकिन फिर वे उसे एक इमारत में ले गए। वहीं ये पूरी घटना हुई और उसके वीडियो बनाए गए।

पुलिस का कहना है कि पीड़ित लड़की पूरी घटना के दौरान शांत दिखी और उसने अपनी आंखें बंद किए रखीं। बाद में एक दंपत्ति को वह घबराई और परेशान अवस्था मिली। उसका फोन भी इस दौरान अभियुक्तों ने छीन लिया था। मुकदमे के दौरान पीड़िता ने बताया कि उस घटना के सदमे से उबरने के लिए अब भी उसका मनोवैज्ञानिक इलाज चल रहा है। इसके बावजूद अदालत में एक जज ने तो यहां तक कह दिया कि इन लोगों को अन्य सभी आरोपों से बरी कर दिया जाए और सिर्फ लड़की का फोन चुराने का दोषी करार दिया जाए। लेकिन बेंच के अन्य दो जजों ने उन्हें यौन उत्पीड़न का दोषी करार दिया। आरोपी 2016 से ही हिरासत में हैं। सरकारी वकील ने उनके लिए 20 साल की सजा मांगी थी। लेकिन अदालत के फैसले ने सबको हैरान कर दिया। अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि इस घटना में हिंसा का सहारा लिया गया और 18 साल की पीड़िता से सेक्स के सहमति नहीं ली गई थी।

वहीं अदालत का कहना है कि इस मामले में सहमति नहीं ली गई क्योंकि आरोपी दबदबा दिखाने की स्थिति में थे और उन्होंने पीड़िता की आजादी का हनन किया और इसीलिए वे यौन उत्पीड़न के दोषी हैं। इस घटना में जिस तरह का ब्यौरा पुलिस रिपोर्ट और अदालती कार्रवाई के दौरान सामने आया, उसने स्पेन की जनता को झकझोर दिया। ऐसे में अदालत का फैसला उन्हें ऐसा लगा कि जैसे आरोपियों के साथ नरमी बरती जा रही है। यह मामला स्पेन में महिला सुरक्षा की कसौटी बन गया। इसलिए इस पर सबकी नजरें टिकी थीं। लेकिन अदालत के फैसले ने उनके गुस्से को और भड़का दिया। जैसे ही अदालत ने अभियुक्तों नौ साल की सजा सुनाई तो हजारों लोग सड़कों पर उतर आए और “शेम, शेम” और “नो, नो” के नारे फिजाओं में गूजने लगे। स्पेन में सार्वजनिक आयोजनों के दौरान यौन उत्पीड़न के कई और मामले भी सामने आए हैं। वैसे स्पेन महिलाओं के लिए लगातार खतरनाक होता जा रहा है। 2017 के आंकड़े बताते हैं कि 1.58 लाख महिलाएं पुरूषों के हाथों हिंसा का शिकार हुईं। देश के प्रमुख न्यायिक संस्था सीजीपीजे के अनुसार 2016 के मुकाबले ये संख्या करीब 18 प्रतिशत ज्यादा है। हालांकि पिछले साल 33 हजार से ज्यादा लोगों को महिलाओं पर शारीरिक हिंसा और छेड़छाड़ के लिए सजाएं हुईं। सरकार ने लैंगिक हिंसा पर काबू पाने के लिए 1 अरब यूरो का फंड भी बनाया है, लेकिन स्थिति में बहुत बदलाव नहीं आया है। शायद यही वजह है कि लोगों का गुस्सा घरों से निकलकर सड़कों तक आ गया है।

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