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चाबहार बंदरगाह के पहले चरण का उद्घाटन आज, जानिए क्यों है यह चीन और पाक के लिए ‘सिरदर्द’

उद्घाटन के वक्त भारत के साथ अफगानिस्तान के प्रतिनिधि भी वहां मौजूद रहेंगे।

तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (एक्सप्रेस फोटो)

ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी आज (3 दिसंबर) चाबहार बंदरगाह के पहचे चरण का उद्घाटन करेंगे। उद्घाटन के वक्त भारत के साथ अफगानिस्तान प्रतिनिधि भी वहां मौजूद रहेंगे। जानिए इस बंदरगाह की कुछ खास बातें-

चाबहार बंदरगाह की खास बात है कि ये पाकिस्तान को दरकिनार करते हुए ईरान, भारत और अफगानिस्तान के बीच एक नया रणनीतिक पारगमन मार्ग खोलेगा। गुजरात के कांडला बंदरगाह एवं चाबहार बंदरगाह के बीच दूरी, नई दिल्ली से मुंबई के बीच की दूरी से भी कम है। इसलिए इस समझौते से भारत पहले वस्तुएं ईरान तक तेजी से पहुंचाने और फिर नए रेल एवं सड़क मार्ग के जरिए अफगानिस्तान ले जाने में मदद मिलेगी। इस बंदरगाह के जरिए ट्रांसपोर्ट लागत और समय की बचत होगी। इस परियोजना से दुनिया के अन्य देशों को भी जुड़ने में खासी मदद मिलेगी।

चाबहार पोर्ट का एक महत्व यह भी है कि यह पाकिस्तान में चीन द्वारा चलने वाले ग्वादर पोर्ट से करीब 100 किलोमीटर ही दूर है। चीन अपने 46 अरब डॉलर के चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे कार्यक्रम के तहत ही इस पोर्ट को बनवा रहा है। चीन इस पोर्ट के जरिए एशिया में नए व्यापार और परिवहन मार्ग खोलना चाहता है। हालांकि चाबहर निर्माण चीन और पाकिस्तान के लिए खासा सिरदर्द साबित हो सकता है।

चाबहार बंदरगाह परियोजना के पहले चरण को शाहिद बेहेश्टी बंदरगाह के तौर पर भी जाना जाता है। बंदरगाह ईरान के दक्षिणपूर्व सिस्तान बलूचिस्तान प्रांत में स्थित है।

उद्घाटन से पहले विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और उनके ईरानी समकक्ष जावेद जरीफ ने शनिवार (2 दिसंबर) को तेहरान में एक बैठक की और चाबहार बंदरगाह परियोजना सहित अन्य मुद्दों पर चर्चा की।

ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि जरीफ ने शाहिद बेहेश्टी बंदरगाह का उल्लेख किया और कहा कि यह ईरान-भारत के परस्पर और क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करता है।

ईरानी विदेश मंत्रालय के अनुसार उन्होंने कहा, ‘यह क्षेत्र के विकास में बंदरगाह और मार्गों के महत्व को दिखाता है जो मध्य एशियाई देशों को विश्व के अन्य देशों से ओमान सागर और हिंद महासागर के जरिए जोड़ता है।

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