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जानिए दक्षिणी ध्रुव की खोज करने वाले “रुआल आमुन्सन” के रोमांचक और खतरों से भरे सफर की कहानी

Google Doodle: आज ही के दिन दक्षिणी ध्रुव की खोज रुआल आमुन्सन ने की थी। इस काम में उन्होंने इतनी गोपनीयता रखी कि उनके जहाज के दल को खबर नहीं थी कि वह किस दिशा में जाएंगे।

नॉर्वे के रुआल आमुन्सन के सम्मान में बनाई गई उनकी मूर्ति। (Source: Dreamtime)

गूगल डूडल पर आज दक्षिणी ध्रुव की खोज करने वाले रुआल आमुन्सन को याद किया गया है। रुआल 105 साल पहले 14 दिसंबर 1911 में दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाले पहले शख्स थे। रुआल पहले उत्तरी ध्रुव की खोज करने निकले थे लेकिन जब उन्हें पता चला कि उत्तरी ध्रुव की खोज फ्रेडरिक कूक और रॉबर्ट पीयरी कर चुके हैं तो उन्होंने बड़े ही गोपनीय ढंग से दक्षिणी ध्रुव की खोज शुरु कर दी। रुआल ने अपने जहाज के दल और उनकी खोज की फंडिंग करने वाले लोगों को भी इस बात की भनक तक नहीं लगने दी कि दक्षिणी ध्रुव की खोज करने जा रहे हैं।

जब उत्तरी ध्रुव की खोज किए जाने की रिपोर्ट्स आने लगी तो रुआल की खोज के लिए फंडिंग कम होने लगी। इस परेशानी से निपटने के लिए रुआल ने अपना घर भी गिरवी रख दिया था। रुआल की खोज की यात्रा बड़ी ही रोमांचक रही थी। उनके जहाज दल में 19 लोग शामिल थे और लगभग 100 ग्रीनलैंड नस्ल के कुत्ते थे जो बर्फीले रास्तों पर स्लेज गाड़ी के जरिए सफर तय करने में मदद करते हैं। साथ ही रुआल के जहाज पर लाइब्रेरी भी थी जिसमें लगभग 3000 किताबें थीं। इसके अलावा दल का मनोबल बनाए रखने के लिए जहाज पर कुछ ग्रामोफोन और संगीत के उपकरण भी थे।

रुआल की खोज रोमांच के साथ-साथ बड़े खतरों से भरी थी। बे ऑफ व्हील्स में अपना बेस तैयार करके उन्होंने दक्षिणी ध्रुव की खोज की शुरुआत की। शुरुआत गलत होने की वजह से उनके दल के कुछ कुत्ते खो गए। वहीं खोज की शुरुआत के समय काफी ठंड और गलत शुरुआत होने से रुआल के दल का मनोबल टूटने लगा उन्हें वापिस अपने बेस पर जाना पड़ा। जब सर्दी थोड़ी कम हुई तो दल ने फिर से अपनी खोज की शुरुआत की। अपनी मंजिल पर पहुंचने के बाद रुआल ने उसका अच्छे से मुआयना किया ताकी वह यह दावा कर सकें कि वह ही पहले शख्स हैं जिन्होंने दक्षिणी ध्रुव की खोज की है।

रुआल दक्षिणी ध्रुव की खोज से पहले 1903-1906 में उत्तरी ध्रुव की खोज में लगे रहे थे। इस दौरान उन्होंने उत्तरी चुंबकीय ध्रुव का पता लगाया था। रुआल का जन्म नॉर्वे के बोर्ड में हुआ था और उन्होंने अपनी पढ़ाई ओस्लो में की थी। 1890 में ग्रेजुएट होने के बाद उन्होंने आयुर्वेद की भी पढ़ाई की लेकिन फिर जहाज पर नौकरी करने लगे। साथ ही उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों पर अपनी मौजूदगी दर्ज करने के बाद रुआल 17 जून 1928 को समुद्र में उत्तरी ध्रुव से लौट रहे एक खोए हुए जहाज का पता लगाने के लिए निकले थे जिसके बाद उनकी कोई खबर नहीं मिली।

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