Facebook Now Surrounded By Censorship of Nude Paintings - ...तो अब न्यूड पेंटिंग्स की सेंसरशिप पर घिरा फेसबुक - Jansatta
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…तो अब न्यूड पेंटिंग्स की सेंसरशिप पर घिरा फेसबुक

वीडियो में दिखाया गया है कि एक म्यूजियम में कलाकृतियों को देख रहे लोगों के पास आकर दो 'सोशल मीडिया इंस्पेक्टर' पूछते हैं कि क्या आपके पास सोशल मीडिया अकाउंट है?

प्रतीकात्मक तस्वीर।

आजकल फेसबुक के अच्छे दिन नहीं चल रहे हैं। कहीं यूजर्स का डाटा बेच कर पैसा बनाने के लिए उसकी खिंचाई हो रही है तो कुछ मामलों में डाटा शेयर करने में नानुकर की वजह से उसे अदालतों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। अब यूरोप में वायरल हो रहा एक वीडियो फेसबुक के लिए नई मुसीबत लेकर आया है और उस पर ‘कल्चरल सेंसरशिप’ के आरोप लग रहे हैं। विवाद की वजह है न्यूड कंटेट को लेकर फेसबुक की पॉलिसी। इसके तहत ऐसे फोटो, वीडियो और मीम ब्लॉक कर दिए जाते हैं जिनमें नग्नता हो। लेकिन इस चक्कर में नग्न कलाकृतियों से जुड़ी सामग्री भी फेसबुक पर ब्लॉक हो रही है। चूंकि यह काम कोई इंसान नहीं बल्कि एक कंप्यूटर एल्गोरिदम करता है तो उसके लिए सामान्य नग्न या कहिए अश्लील तस्वीरों और नग्नता वाली कलाकृतियों में फर्क करना मुश्किल है।

बेल्जियम के एक टूरिज्म बोर्ड विजिटफ्लांडर्स ने एक वीडियो बना कर फेसबुक पर निशाना साधा है। इस वीडियो में दिखाया गया है कि एक म्यूजियम में कलाकृतियों को देख रहे लोगों के पास आकर दो ‘सोशल मीडिया इंस्पेक्टर’ पूछते हैं कि क्या आपके पास सोशल मीडिया अकाउंट है? अगर उनका जवाब “हां” होता है तो ये ‘सोशल मीडिया इंस्पेक्टर’ उन्हें नग्न पेंटिंग से हटाकर दूसरी पेंटिंग्स की तरफ ले जाते हैं और कहते हैं कि आप इन्हें नहीं देखिए, यही आपके लिए ठीक है। उनकी कमीज पर पीछे लिखे एफबीआई में एफ फेसबुक के लोगों वाला एफ है। ये तथाकथित सोशल मीडिया इंस्पेक्टर कहते हैं कि जिन लोगों के पास सोशल मीडिया अकाउंट नहीं है, वे हर तरह की पेंटिंग देख सकते हैं।

इसका मतलब यह कुछ ऐसा ही है जैसे कोई आपको खजुराहो के मंदिरों से यह कह बाहर निकाल दे कि आप इन नग्न मूर्तियों को नहीं देख सकते। अब भले ही दुनिया उनकी कलात्मकता और उनके पीछे छिपे दर्शन का लोहा मानती हो, लेकिन कोई कह सकता है कि उनमें आखिरकार है तो नग्नता ही। वैसे भारत में तो नग्नता और कलात्मक अभिव्यक्ति हमेशा बहस का मुद्दा रही है। हिंदू देवी देवताओं की नग्न पेंटिंग्स बनाने के लिए मकबूल फिदा हुसैन जैसे कलाकारों को बहुत विरोध झेलना पड़ा है।

यूरोप में कलात्मक न्यूडिटी पर इस ताजा बहस की शुरुआत उस वक्त हुई फेसबुक ने एक वीडियो को ब्लॉक कर दिया जिसमें बेल्जियम के 17वीं सदी के मशहूर पेंटर रुबेन की कृति ‘द डिसेंट फ्रॉम द क्रॉस’ की कुछ फुटेज थी। इस पेंटिंग में ईसा मसीह को सूली से उतारते हुए दिखाया गया है। पेटिंग में उनके गुप्तांगों को ढकने वाले एक छोटे से कपड़े के अलावा उनके शरीर पर कुछ नहीं है। टूरिज्म बोर्ड ने फेसबुक को लिखे खुले खत में अपनी नाराजगी जताते हुए कहा है, “हमें इस बात पर हंसी आती है कि हमारे कलाकारों ने नग्न छातियों और कूल्हों वाली जो पेटिंग बनाई हैं वे आपको अनुचित लगती हैं लेकिन आपकी यह सेंसरशिप हमारे लिए मुश्किलें पैदा कर रही है।”

टूरिज्म बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि बहुत से कला प्रेमी फेसबुक इस्तेमाल करते हैं, इसलिए उनके बीच बेल्जियम के महान पेंटरों के काम को प्रमोट करने के लिए वे फेसबुक का सहारा लेना चाहते हैं। लेकिन फेसबुक की न्यूड पॉलिसी उनके लिए बाधा बन रही है। फेसबुक का कहना है कि वह इस बारे में विजिटफ्लांडर्स टूरिज्म बोर्ड से बात करने को तैयार है। ब्रिटिश अखबार गार्डियन के मुताबिक सामान्य पोस्ट में अगर पेटिंग्स का इस्तेमाल होता है तो फेसबुक उन्हें नहीं हटाएगा, उन्हें सिर्फ तभी ब्लॉक किया जाएगा, यदि उनका इस्तेमाल किसी विज्ञापन के लिए हुआ हो। वैसे 2016 में फेसबुक को वियतनाम युद्ध के दौरान ली गई एक नग्न बच्ची की तस्वीर के मामले में भी अपनी नीति बदलनी पड़ी थी।
फेसबुक जर्मनी में भी कई विवादों में घिरा है। हाल में फेसबुक के मुखिया मार्क जकरबर्ग ने ऐसी पोस्ट हटाने से इनकार कर दिया जिनमें यहूदी नरसंहार को खारिज किया गया था।

जर्मन सरकार चाहती है कि ऐसे यहूदी विरोधी पोस्ट हटाए जाएं, लेकिन जकरबर्ग ने ऐसा करने से साफ इनकार कर दिया और कहा कि उनके यूजर्स को किसी मुद्दे पर अपनी अलग राय रखने का पूरा अधिकार है। फेसबुक के इस कदम की जर्मन सरकार ने कड़ी आलोचना की। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान 60 लाख यहूदियों के कत्ल से इनकार करना जर्मनी और कई यूरोपीय देशों में अपराध है। लेकिन बहुत से लोग यहूदी नरसंहार पर सवाल उठाते हैं। ऐसे लोगों की टिप्पणी और पोस्ट को सेंसर करने से तो फेसबुक ने इनकार कर दिया। लेकिन न्यूड पेटिंग्स के मुद्दे पर वह सेंसरशिप के आरोप में घिरा है।

यह बात सही है कि एक सार्वजनिक सोशल मीडिया मंच होने के नाते फेसबुक के यूजर्स में हर उम्र और हर वर्ग के लोग शामिल हैं। ऐसे में, वहां अश्लील सामग्री पोस्ट नहीं की जा सकती। दूसरा, फेक न्यूज के इस दौर में सच्ची झूठी तस्वीरों के माध्यम से किसी को भी आसानी से बदनाम किया जा सकता है। ऐसा ना हो, इसे रोकने की जिम्मेदारी भी फेसबुक पर आती है जिसे दुनिया में करोड़ों लोग इस्तेमाल करते हैं। लेकिन अश्लीलता और कलात्मकता के बीच फर्क करना होगा।

फेसबुक पर करोड़ों लोग दिन रात पोस्ट, फोटो और वीडियो शेयर करते हैं, इसलिए मानवीय स्तर पर इतनी विशाल सामग्री को जांचना परखना इंसानों के बस की बात तो नहीं है। इसलिए इस काम के लिए तैयार किए गए एल्गोरिदम को ही बेहतर बनाना होगा। यह आसान नहीं है, क्योंकि जिस तरह सुंदरता देखने वाले की नजरों में होती है, उसी तरह क्या अश्लील है और क्या कलात्मक, यह आखिरकार वही तय करता है उसे देख रहा है।

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