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अमेरिकी सीनेटर ने किया पाकिस्‍तान को F-16 लड़ाकू विमान का विरोध, सीनेट में बिल पेश

ओबामा प्रशासन के इस फैसले के बाद भारत ने दिल्ली में मौजूद अमेरिकी राजदूत को तलब किया था।

कुछ दिनों पहले अमेरिकी डिफेंस हेडक्वार्टर्स पेंटागन ने पाकिस्तान को आठ एफ-16 फाइटर जेट बेचने की डील पर मुहर लगाई थी।

अमेरिका ने पाकिस्तान को एफ-16 फाइटर जेट बेचने का विरोध किया है। एक रिपब्लिकन सांसद ने सीनेट में ज्वाइंट रिजोल्यूशन पेश किया है। इसमें पाकिस्तान को भरोसेमंद न बताते हुए उसे ये फाइटर जेट्स बेचने पर रोक लगाने की मांग की गई है। सीनेटर रैंड पॉल कुछ समय पहले अपनी पार्टी की तरफ से अमेरिकी राष्ट्रपति कैंडिडेट की रेस में शामिल थे। पॉल ने ही पाकिस्तान को एफ-16 की बिक्री को रोकने की मांग वाला ज्वाइंट रेजोल्यूशन सीनेट में पेश किया है। खास बात तो यह है कि हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की फॉरेन रिलेशन पर बनी कमेटी ने भी ओबामा सरकार के फैसले पर सवाल उठाए हैं। और अब पॉल का समर्थन भी इस कमेटी को मिल गया है।

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सीनेटर रैंड पॉल ने कहा कि पाकिस्तान और अमेरिका के रिश्ते हमेशा से परेशानियों वाले रहे हैं। हालांकि, पाकिस्तान सरकार अमेरिका को आतंकवाद के खिलाफ जंग में सहयोगी मानती है, लेकिन पाकिस्तान के व्यवहार से कुछ और ही मतलब निकलता है। हम उन्हें करोड़ों डॉलर्स की मदद दे चुके हैं, लेकिन पाकिस्तानी आर्मी और इंटेलिजेंस हमेशा तालिबान और आतंकियों की मदद करती आई हैं। पाकिस्तान का दोहरा रवैया है। दूसरे अमेरिकी सांसद भी पाकिस्तान पर सवाल उठाते रहे हैं। रैंड पॉल से पहले चैम्बर ऑफ कांग्रेस और फॉरेन अफेयर्स कमेटी भी ओबामा प्रशासन के फैसले पर सवालिया निशान लगा चुकी है। कमेटी ने तो साफ तौर पर इस डील को रोकने के लिए कहा है।

इस कमेटी के चेयरमैन बॉब क्रॉकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन कैरी को लिखे लेटर में कहा था कि पाकिस्तान का दोहरा रवैया है और उसे एफ-16 फाइटर जेट्स नहीं दिए जाने चाहिए। क्रॉकर ने वॉल स्ट्रीट जनरल को दिए साक्षात्कार में कहा, अमेरिका करदाता का पैसा पाकिस्तान को जेट फाइटर्स के लिए सब्सिडी देने में इस्तेमाल क्यों किया जा रहा है। हमारे सैनिक अफगानिस्तान में शांति बहाली की कोशिश कर रहे हैं और पाकिस्तान वहां आतंकियों की मदद कर रहा है। कुछ दिनों पहले अमेरिकी डिफेंस हेडक्वार्टर्स पेंटागन ने पाकिस्तान को आठ एफ-16 फाइटर जेट बेचने की डील पर मुहर लगाई थी। 70 करोड़ डॉलर की इस डील के तहत पाकिस्तान को लॉकहीड मार्टिन ग्रुप के इन प्लेन के अलावा रडार और बाकी इक्विपमेंट्स भी मिलेंगे। ये प्लेन हर तरह के मौसम में हमला कर सकते हैं।

ओबामा प्रशासन के इस फैसले के बाद भारत ने दिल्ली में मौजूद अमेरिकी एम्बेसडर को तलब किया था। भारत ने उनसे कहा, पाकिस्तान का रिकॉर्ड बताता है कि वह हथियार बेचे जाने लायक देश नहीं है। हम ओबामा एडमिनिस्ट्रेशन के फैसले से निराश हैं। उधर, अमेरिका से दूसरे देशों को हथियार बेचने का काम देखने वाली पेंटागन की डिफेंस सिक्युरिटी को-ऑपरेशन एजेंसी ने इस डील को मंजूरी दे दी है। एजेंसी का कहना है कि, हम ये फाइटर जेट इसलिए दे रहे हैं, ताकि पाकिस्तान की खुद की हिफाजत करने की ताकत बढ़े। वह काउंटर टेररिज्म ऑपरेशन्स को भी मजबूती से अंजाम दे सके।

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