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दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान विस्थापित पोलैंड के बच्चों पर भारत में लगेगी प्रदर्शनी

भारत में दूसरे विश्वयुद्ध के अंत तक पॉलिश शिविर मौजूद रहे। अंतिम पॉलिश परिवार 1948 में देश से गया।

Author संयुक्त राष्ट्र | April 21, 2016 11:32 PM
संयुक्त राष्ट्र। (फाइल फोटो)

भारत दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान विस्थापित होकर भारत में शरण पाने वाले पॉलिश बच्चों की कहानियों को बयां करती एक प्रदर्शनी शुक्रवार से आयोजित करेगा। इनमें से अधिकतर बच्चे अनाथ हो चुके थे। इस प्रदर्शनी के जरिए भारत हालिया इतिहास में विश्व के सामने उपजे सबसे बड़े शरणार्थी संकट के दौरान मानवता का संदेश देगा।

‘भारत की यात्रा: पॉलिश बच्चों और अच्छे महाराजा की युद्धकालीन गाथा’ शीर्षक वाली इस प्रदर्शनी की शुरुआत शुक्रवार से होगी। इसका आयोजन भारत और पोलैंड में संयुक्त राष्ट्र के स्थायी मिशनों द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है। यह प्रदर्शनी महायुद्ध के दौर की एक हृदयस्पर्शी कहानी दर्शाती है। उस दौरान 1000 से ज्यादा पॉलिश बच्चे कब्जाए जा चुके पोलैंड से साइबेरिया में निर्वासित हो गए थे और नवानगर के महाराजा जाम साहेब दिग्विजय सिंहजी रणजीत सिंहजी की उदारता के चलते उन्हें भारत में एक नया घर मिल गया था।

भारतीय मिशन की वेबसाइट पर दिए बयान में कहा गया कि 1941-42 में जब उन्हें शिविर छोड़कर जाने दिया गया तो वे बच्चे भारत आ गए। वहां महाराजा ने उनके लिए एक नया मकान बनवाया। उन्होंने ऐसा एक ऐसे मुश्किल समय पर करवाया, जब दुनिया में युद्ध चल रहा था और भारत खुद स्वतंत्रता के लिए संघर्ष कर रहा था। भारत में दूसरे विश्वयुद्ध के अंत तक पॉलिश शिविर मौजूद रहे। अंतिम पॉलिश परिवार 1948 में देश से गया।

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