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पूर्व खालिस्‍तानी आतंकी को डिनर इनवाइट पर कनाडाई राजनीति में भूचाल, भारत के समर्थन में प्रस्‍ताव लाएगा विपक्ष

जस्टिन ट्रुडो के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने ट्रुडो की भारत यात्रा को नुकसान पहुंचाने के मकसद से भारत सरकार के कुछ तत्वों द्वारा अटवाल को निमंत्रण भेजने की साजिश का आरोप लगाया था। ट्रुडो ने इस बात का विरोध नहीं किया जिसके बाद कनाडा की संसद में मंगलवार को इस मुद्दे को उठाया गया।

Author टोरंटो | March 1, 2018 6:19 PM
कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो की पत्नी के साथ जसपाल अटवाल की तस्वीर। (ANI Twitter/ CBCNews)

पिछले सप्ताह दिल्ली में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो के रात्रिभोज में पूर्व खालिस्तानी आतंकी जसपाल अटवाल को निमंत्रण दिए जाने के विवाद ने कनाडा की राजनीति में भूचाल ला दिया है। विपक्ष भारत की एकता व अखंडता के समर्थन और खालिस्तानी अलगाववादियों की निंदा के लिए एक प्रस्ताव लाने जा रहा है। ट्रुडो के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने ट्रुडो की भारत यात्रा को नुकसान पहुंचाने के मकसद से भारत सरकार के कुछ तत्वों द्वारा अटवाल को निमंत्रण भेजने की साजिश का आरोप लगाया था। ट्रुडो ने इस बात का विरोध नहीं किया जिसके बाद कनाडा की संसद में मंगलवार को इस मुद्दे को उठाया गया। भारत ने इन आरोपों को आधारहीन और अस्वीकार्य बताते हुए खारिज कर दिया है। इस पर विपक्षी कंजरवेटिव पार्टी ने बुधवार को ट्रुडो से भारत के खंडन पर प्रतिक्रिया देने को कहा।

ट्रुडो ने अपने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार द्वारा भारत के खिलाफ लगाए गए आरोपों का बचाव किया था और कहा था, “जब हमारे शीर्ष राजनयिकों में से कोई या सुरक्षा अधिकारियों में से कोई कनाडा के लोगों से कुछ कहता है तो वह इसलिए क्योंकि वह जानता है कि यह सच है।” भारत के खिलाफ आरोपों को अजीब बताते हुए विपक्षी कंजरवेटिव पार्टी के नेता एंड्रयू शीर ने प्रधानमंत्री ट्रुडो से कहा, “क्या प्रधानमंत्री अपने इस साजिश सिद्धांत के समर्थन में कोई सबूत पेश करेंगे?”

विपक्षी दल खालिस्तानी अलगाववादियों की निंदा और भारत की एकता के समर्थन में गुरुवार को संसद में प्रस्ताव लाने जा रहा है। यह देखना दिलचस्प रहेगा कि ट्रुडो और उनकी पार्टी के कई सिख सांसद इस प्रस्ताव पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं। उल्लेखनीय है कि जस्टिन ट्रूडो ने हाल ही में अपने एक वरिष्ठ अधिकारी की इस दलील का समर्थन किया है जिसमें उन्होंने (अधिकारी ने) कहा है कि भारत में मौजूद बुरे राजनीतिक तत्वों ने खालिस्तानी अलगाववादी जसपाल अटवाल को भारत में भोज में आमंत्रित करने की साजिश रची थी ताकि कनाडा की सरकार सिख चरमपंथ की समर्थक नजर आए।

अटवाल को साल 1986 में भारतीय मंत्री मल्कियत सिंह सिद्धू पर कनाडा दौरे के दौरान जानलेवा हमले के प्रयास में दोषी पाया गया था। उस पर उज्जवल दोसांझ पर हमला करने का भी आरोप है, हालांकि यह आरोप सिद्ध नहीं हो सका था। दोसांझ बाद में ब्रिटिश कोलंबिया प्रमुख और संघीय मंत्री बने थे। मल्कियत सिंह सिद्धू के मामले में अटवाल को बाद में सबूतों की गुणवत्ता के आधार पर बरी कर दिया गया था।

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